Friday, March 20, 2026
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सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों की ‘कार्यवाहक डीजीपी’ संस्कृति पर लगाई फटकार, नियुक्ति में देरी पर UPSC को अदालत का रुख करने की दी नसीहत

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों द्वारा कार्यवाहक डीजीपी संस्कृति पर फटकार लगाई है। वहीं, नियुक्ति में देरी करने पर यूपीएससी से अदालत का रुख करने को कहा है।

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, (5 फरवरी) को राज्य सरकारों द्वारा नियमित पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) की बजाय कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त करने की संस्कृति पर फटकार लगाई। अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि यदि राज्य पुलिस महानिदेशकों की नियुक्ति में देरी करती हैं तो यूपीएससी को अदालत का रुख करने को भी कहा है।

अदालत ने सरकारों द्वारा नियमित पुलिस महानिदेशकों की नियुक्ति के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को सिफारिशें न भेजने को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने क्या कहा?

सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की पीठ ने कहा कि इस प्रथा के कारण योग्य और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को डीजीपी पद के लिए विचार किए जाने से वंचित किया जाता है।

अदालत ने यह भी कहा कि राज्य सरकारें प्रकाश सिंह दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए डीजीपी के चयन के लिए समय पर नाम नहीं भेजती हैं और इसके बजाय कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त करने का विकल्प चुनती हैं।

इस प्रथा पर रोक लगाने के लिए अदालत ने यूपीएससी को राज्य सरकारों को पत्र लिखकर डीजीपी के चयन के लिए समय पर प्रस्ताव मांगने का अधिकार दिया। पीठ ने यह भी कहा कि यदि कोई राज्य अनुपालन करने में विफल रहता है तो यूपीएससी उससे संपर्क कर सकता है।

सुनवाई के दौरान पीठ ने आदेश पारित किया कि “हम यूपीएससी को यह अधिकार देते हैं कि जब भी ऐसी स्थिति उत्पन्न हो वह राज्यों को पत्र लिखकर संबंधित डीजीपी की सिफारिशों के लिए समय पर प्रस्ताव भेजे। यदि ऐसे प्रस्ताव नहीं भेजे जाते हैं तो हम यूपीएससी को प्रकाश सिंह मामले में आवेदन करने का निर्देश देते हैं। यह स्पष्ट है कि संबंधित राज्यों की जवाबदेही सहित आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”

सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के मुताबिक, किसी राज्य में डीजीपी या पुलिस बल के प्रमुख की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा यूपीएससी द्वारा चयनित तीन अधिकारियों के पैनल से की जाती है।

यूपीएससी ने जताई आपत्ति

अदालत ने आज जो निर्देश जारी किए उनमें डीजीपी की समय पर नियुक्ति के लिए निर्देश जारी किए। सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। इस आदेश में यूपीएससी को राज्य सरकार द्वारा अनुशंसित नामों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था।

यूपीएससी ने हालांकि इस निर्देश पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि राज्य सरकार ने डीजीपी के चयन में अत्यधिक देरी की है। केंद्रीय निकाय ने बताया कि अंतिम डीजीपी अनुराग शर्मा 2017 में सेवानिवृत्त हुए थे और उसके बाद राज्य ने यूपीएससी को कोई सिफारिश नहीं भेजी थी।

राज्य सरकार ने अंततः अप्रैल 2025 में एक सिफारिश भेजी, लेकिन यूपीएससी ने यह कहते हुए उस पर कोई कार्रवाई नहीं की कि 2017 से ही काफी देरी हो चुकी है। यूपीएससी ने इसे एक गंभीर चूक माना और राज्य सरकार से प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट से पहले स्पष्टीकरण या आदेश प्राप्त करने को कहा। उसने यह भी कहा कि तेलंगाना सरकार ऐसी देरी करने वाली अकेली राज्य सरकार नहीं है।

अदालत ने जताई चिंता

पीठ ने यूपीएससी की चिंता से सहमति जताते हुए कहा कि इस तरह की देरी से कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के करियर विकास पर असर पड़ा है जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं और राज्य द्वारा उनकी अनदेखी की गई है।

अदालत ने हालांकि यह भी कहा कि यूपीएससी की आपत्ति से सुधार नहीं होगा बल्कि इससे दोषी राज्यों को ही लाभ होगा। इसके मुताबिक, अदालत ने यूपीएससी को तेलंगाना के लिए डीजीपी के चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में लगातार कई सालों से कार्यवाहक डीजीपी चुने जा रहे हैं। ईटीवी भारत की खबर के मुताबिक, राज्य में मई 2022 में तत्कालीन डीजीपी मुकुल गोयल को हटाकर डीएस चौहान को कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया था। यह सिलसिला लगातार जारी रहा। इसके बाद आरके विश्वकर्मा, विजय कुमार, प्रशांत कुमाल कार्यवाहक डीजीपी बनाए गए। फिलहाल राजीव कृष्ण कार्यवाहक डीजीपी हैं।

अमरेन्द्र यादव
अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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