नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (23 मार्च) को लद्दाख के कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि वह तो पहले ही जेल से रिहा हो चुके हैं। हालांकि, उनकी पत्नी ने मामले को लंबित रखने की मांग की थी। वांगचुक की हिरासत के खिलाफ अदालत में बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका दायर की गई थी।
केंद्र सरकार द्वारा वांगचुक को रिहा करने के हालिया फैसले के मद्देनजर, जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो द्वारा दायर याचिका को बंद कर दिया।
केंद्र सरकार ने सोनम वांगचुक की हिरासत की थी रद्द
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने बीती 14 मार्च को जलवायु कार्यकर्ता की हिरासत रद्द कर दी थी। सरकार ने कहा कि लद्दाख में “शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल” बनाने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया था।
सोनम वांगचुक की तरफ से पक्ष रखने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल उपस्थित हुए। सिब्बल ने अंगमो की याचिका को लंबित रखने और रामनवमी की छुट्टियों के बाद इस पर विचार करने का अनुरोध किया।
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हालांकि, सुनवाई कर रही पीठ इस अनुरोध पर सहमत नहीं हुई। पीठ ने कहा कि ” किसके लिए? नहीं नहीं, यह क्या है? अब और क्या बचा है? “
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी कहा कि इस मामले को अब बंद किया जाए। मेहता ने कहा कि ” मैं श्री सिब्बल से अनुरोध करूंगा कि वे इसे ऐसे ही रहने दें। “
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए क्या कहा?
इसके बाद अदालत ने याचिका खारिज कर दी। इसमें कहा गया था ” चुनौती दिए गए आदेश की वैधता समाप्त हो जाने के कारण या दूसरे शब्दों में कहें तो हिरासत आदेश रद्द हो जाने के कारण याचिका में की गई प्रार्थना निरर्थक हो गई है। अतः याचिका का निपटारा किया जाता है। “
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ज्ञात हो कि सितंबर 2025 में वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया था। वह लेह में लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के लिए राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची का दर्जा देने की मांगों कर रहे थे। इस दौरान विरोध प्रदर्शनों के बीच उन्हें हिरासत में लिया गया था।
इसके बाद उनकी पत्नी ने उनकी रिहाई के लिए अदालत में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की थी।

