Saturday, November 29, 2025
Homeभारतसुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से दिव्यांगजनों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों से निपटने...

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से दिव्यांगजनों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों से निपटने के लिए सख्त कानून पर विचार करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से दिव्यांगजनों के लिए अपमानजनक टिप्पणियों से निपटने के लिए सख्त कानून पर विचार करने को कहा है।

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 27 नवंबर को केंद्र सरकार से दिव्यांगजनों के सम्मान की रक्षा के लिए सख्त कानून की आवश्यकता पर जोर दिया। अदालत ने केंद्र से कहा कि वह दिव्यांगजनों और दुर्लभ आनुवंशिक विकारों से ग्रस्त व्यक्तियों का उपहास करने वाली अपमानजनक टिप्पणियों को एससी-एसटी अधिनियम की तर्ज पर दंडनीय अपराध बनाने के लिए एक कानून बनाने पर विचार करे।

एससी एसटी (प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीस) एक्ट, 1989 अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के विरुद्ध जातिवादी गाली, भेदभाव, अपमान और हिंसा को अपराध घोषित करता है तथा अपराधों को गैर-जमानती बनाता है।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने क्या कहा?

सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की पीठ ने कहा “आप एससी एसटी एक्ट की तर्ज पर सख्त कानून क्यों नहीं ला सकते जो जातिवादी टिप्पणियों को अपराध मानता हो – अगर आप उन्हें नीचा दिखाते हैं तो सजा का प्रावधान है?”

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए थे, उन्होंने इस टिप्पणी की सराहनी की और कहा कि हास्य किसी की गरिमा की कीमत पर नहीं हो सकता।

पीठ ने यह भी कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अश्लील, अपमानजनक या अवैध सामग्री को विनियमित करने के लिए एक “तटस्थ, स्वतंत्र और स्वायत्त” निकाय की आवश्यकता है।

यह भी पढ़ें – दिल्लीः खराब वायु गुणवत्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट 3 दिसंबर को करेगी सुनवाई

दिव्यांगजनों (पीडब्ल्यूडी) के विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणियों और उपहास से निपटने के लिए दिशानिर्देश तैयार करने या तंत्र स्थापित करने के मुद्दे पर पीठ को प्रसारण मंत्रालय द्वारा सूचित किया गया कि कुछ दिशानिर्देश बनाने की प्रक्रिया चल रही है।

दिशानिर्देशों को सार्वजनिक करने को कहा

पीठ ने मंत्रालय से दिशानिर्देशों को चर्चा के लिए सार्वजनिक करने को कहा और मामले की सुनवाई चार सप्ताह बाद सूचीबद्ध कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट मेसर्स एसएमए क्योर फाउंडेशन द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जो दुर्लभ स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी रोग से प्रभावित व्यक्तियों के लिए काम करता है।

इस याचिका में “इंडियाज गॉट लेटेंट” के होस्ट समय रैना और अन्य सोशल मीडिया प्रभावशाली लोगों, विपुन गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर और निशांत जगदीश तंवर द्वारा किए गए चुटकुलों को उजागर किया गया था।

भविष्य में अपने आचरण के प्रति सावधान रहने का निर्देश देते हुए पीठ ने हास्य कलाकार रैना और अन्य को दिव्यांगजनों की सफलता की कहानियों के बारे में हर महीने दो कार्यक्रम या शो आयोजित करने का निर्देश दिया ताकि दिव्यांगजनों, विशेषकर एसएमए से पीड़ित लोगों के उपचार के लिए धन जुटाया जा सके।

अमरेन्द्र यादव
अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments