नई दिल्लीः अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) जाने वाले पहले भारतीय शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र सम्मान की घोषणा की गई है। यह घोषणा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर की। शुभांशु शुक्ला को यह सम्मान बीते साल अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर जाने को लेकर दिया जा रहा है। इसके साथ ही नौसेना की दो महिला अधिकारियों को शौर्य चक्र देने की घोषणा की गई है।
शुभांशु की इस भूमिका के लिए उन्हें सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है। ग्रुप कैप्टन शुक्ला एक्सिओम-4 मिशन के दौरान अंतरिक्ष यान (आईएसएस) का दौरा करने वाले पहले भारतीय बने और उन्होंने कक्षा में 18 दिन बिताए। यह मिशन विंग कमांडर राकेश शर्मा की 1984 में सोवियत सोयुज मिशन पर ऐतिहासिक अंतरिक्ष उड़ान के बाद चार दशकों से अधिक समय के बाद मानव अंतरिक्ष उड़ान में भारत की वापसी का प्रतीक था।
शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय
इसी के साथ ग्रुप कैप्टन अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय नागरिक और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन जाने वाले पहले नागरिक बन गए हैं। यह पुरस्कार एक दुर्लभ ऐतिहासिक मिसाल कायम करता है, जहां विंग कमांडर शर्मा को भी अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बनने पर अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था।
अशोक चक्र के अलावा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस साल कुल 70 वीरता पुरस्कारों को मंजूरी दी है। इनमें तीन कीर्ति चक्र और 13 शौर्य चक्र शामिल हैं। पुरस्कार पाने वालों में छह को मरणोपरांत यह सम्मान दिया जा रहा है।
भारतीय नौसेना की दो महिला अधिकारियों लेफ्टिनेंट कमांडर डिलना के और लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ए को शौर्य चक्र से सम्मानित किया जाएगा। कुछ दिनों पहले ही उन्होंने भारतीय नौसेना के नौकायन पोत (आईएनएसवी) तारिणी पर सवार होकर आठ महीने की अवधि में 21,600 समुद्री मील (लगभग 40,000 किमी) की दूरी तय करके विश्व का चक्कर लगाने का असाधारण अभियान पूरा करके इतिहास रचा था।
विमानों में पूरे किए हैं 2000 घंटे
भारतीय वायु सेना में ग्रुप कैप्टन शुक्ला को एक बेहद अनुभवी लड़ाकू और परीक्षण पायलट माना जाता है। उन्होंने Su-30 MKI, MiG-21, MiG-29, Jaguar और Hawk जैसे अग्रणी लड़ाकू विमानों और प्रशिक्षण प्लेटफार्मों के साथ-साथ Dornier और An-32 परिवहन विमानों सहित विभिन्न प्रकार के विमानों में 2,000 से अधिक उड़ान घंटे पूरे किए हैं।
उनके मिशन के अनुभव को भारत की व्यापक अंतरिक्ष महत्वकांक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत गगनयान कार्यक्रम के तहत 2027 में अपना पहला स्वदेशी मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन पूरा करने का लक्ष्य बना रहा है। इसके साथ ही 2035 तक एक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन और 2040 तक मानवयुक्त चंद्र मिशन की योजना भी है।

