तेहरान: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गुरुवार को कहा कि तेहरान ने भारत समेत मित्र देशों के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी है। अराघची ने कहा, ‘हमने चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान जैसे मित्र देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे दी है।’
होर्मुज जलडमरूमध्य या स्ट्रेट ऑफ होर्मूज वैश्विक तेल और गैस व्यापार के लिए अहम समुद्री मार्ग है। इजराइल और अमेरिका के खिलाफ जंग की शुरुआत के बाद से ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में जवाबी हमलों को जारी रखते हुए प्रभावी रूप से इस रास्ते को अवरुद्ध किया हुआ है।
‘स्ट्रेट ऑफ होर्मूज केवल दुश्मनों के लिए बंद’
अराघची ने कहा कि जलमार्ग ‘दुश्मनों और उनके सहयोगियों’ के लिए बंद है। अघराची ने कहा, ‘हमारे दृष्टिकोण से होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से बंद नहीं है। यह केवल शत्रुओं के लिए बंद है। हमारे शत्रुओं और उनके सहयोगियों के जहाजों को गुजरने देने का कोई कारण नहीं है।’
अराघची ने ईरानी सरकारी टेलीविजन को दिए एक इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से बंद नहीं किया गया है और कुछ ऐसे देशों को प्रतिबंधों से छूट दी गई है, जिनके साथ ईरान के मैत्रीपूर्ण संबंध हैं।
‘अपनी शर्तों पर जंग खत्म करेंगे’
अराघची ने भी कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच देश ‘क्षेत्र में अमेरिकी हितों को निशाना बनाने’ पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। सरकारी टेलीविजन से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी देश जो अमेरिकी हितों को साझा करता है, उसे ईरान द्वारा ‘वैध लक्ष्य’ माना जाएगा।
अराघची ने कहा, ‘हम निश्चित रूप से अपनी शर्तों पर युद्ध का अंत चाहते हैं, और इस तरह से कि यह यहाँ दोबारा न दोहराया जाए।’ व्हाइट हाउस द्वारा बातचीत जारी होने की बात कहे जाने के बावजूद, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत करने की योजना नहीं बना रहा है और लड़ाई जारी रखने का इरादा रखता है।
उन्होंने कहा, ‘फिलहाल, हमारी नीति प्रतिरोध जारी रखने की है।’ ईरानी विदेश मंत्री ने आगे कहा, ‘हम बातचीत करने का इरादा नहीं रखते, अभी तक कोई बातचीत नहीं हुई है, और मेरा मानना है कि हमारा रुख पूरी तरह से सैद्धांतिक है। अभी बातचीत की बात करना हार स्वीकार करने के समान है।’
इस बीच, पाकिस्तानी अधिकारियों ने पहले कहा था कि इस्लामाबाद ने तेहरान को 28 फरवरी को शुरू हुई लड़ाई को रोकने के लिए अमेरिका की 15 सूत्री योजना से अवगत कराया है। दूसरी ओर अमेरिकी प्रेस सेक्रेटरी केरोलिन लेविट ने कहा कि 15 सूत्री प्रस्ताव की खबरों में ‘कुछ सच्चाई’ है।
वहीं, इस योजना पर टिप्पणी करते हुए अरघची ने कहा, ‘इन्हें विभिन्न विचारों के रूप में प्रस्तुत किया गया था, जिनमें से सभी को देश के वरिष्ठ अधिकारियों को बता दिया गया है, और यदि कोई रुख अपनाना होगा, तो निश्चित रूप से उस पर निर्णय लिया जाएगा।”
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