भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का दिन ‘ब्लैक थर्सडे’ साबित हुआ। बुधवार की तेजी के बाद गुरुवार को बाजार खुलते ही कोहराम मच गया। महज एक घंटे के कारोबार में बीएसई (BSE) की मार्केट कैप 422 लाख करोड़ रुपये से घटकर 412 लाख करोड़ रुपये पर आ गई। यानी निवेशकों की 10 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति पलक झपकते ही साफ हो गई।
सेंसेक्स में करीब 1,500 अंकों की गिरावट आई, जबकि निफ्टी 50 भी 2% से ज्यादा टूटकर 22,300 के स्तर से नीचे फिसल गया। पूरी खबर विस्तार से यहां पढ़ सकते हैं
गिरावट का असर व्यापक रहा। सभी 16 सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में रहे, बैंकिंग, फाइनेंशियल, फार्मा, एविएशन और इंफ्रा शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में रहे।
इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण एक साथ काम कर रहे हैं:
शेयर बाजार गिरने के 5 बड़े कारण
1.अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने का डर: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अगले 2-3 हफ्तों में कड़े हमले की चेतावनी दी है। इससे मध्य-पूर्व में युद्ध और फैलने की आशंका बढ़ गई है। इस अनिश्चितता ने निवेशकों को जोखिम से दूर रहने के लिए मजबूर किया, जिससे बाजार में बिकवाली तेज हो गई।
2. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल: बाजार में मची उथल-पुथल का दूसरा कारण रहा कच्चे तेल में तेज उछाल। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें रातों-रात 5% उछलकर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगे तेल से व्यापार घाटा बढ़ने और महंगाई अनियंत्रित होने के डर ने बाजार को नीचे धकेला।
3. विदेशी निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली: ट्रंप के ताजा बयान के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बाजार से हाथ खींच लिए हैं। अकेले 1 अप्रैल को FIIs ने ₹8,331 करोड़ के शेयर बेचे। घरेलू संस्थानों की खरीदारी इस भारी बिकवाली को थामने में नाकाम रही, जिससे बाजार का संतुलन बिगड़ गया।
4. रुपये की कमजोरी और RBI के सख्त नियम: भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94 के स्तर को पार कर गया है। इसके अलावा, आरबीआई द्वारा मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी रोकने के लिए नियमों को कड़ा करने से बैंक शेयरों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा, जिससे बैंक निफ्टी 2.6% तक लुढ़क गया।
5. बढ़ती अस्थिरता और तकनीकी कमजोरी: बाजार में डर को मापने वाला इंडेक्स India VIX आज 5% तक बढ़ गया, जो संकेत देता है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। निफ्टी का अपने प्रमुख रेजिस्टेंस लेवल (22,770) को पार न कर पाना भी तकनीकी रूप से भारी गिरावट का कारण बना।

