Friday, March 20, 2026
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‘नेहरू को बदनाम करना सत्ताधारी दल का मुख्य उद्देश्य’, सोनिया गांधी का BJP पर तीखा हमला

सोनिया गांधी ने कहा कि नेहरू को उनके समय की चुनौतियों से काटकर देखना और ऐतिहासिक संदर्भों से अलग करके उनका मूल्यांकन करना गलत है।

दिल्ली में जवाहर भवन पर आयोजित एक कार्यक्रम में कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी ने सत्ताधारी पार्टी पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि आज की सरकार का मुख्य उद्देश्य जवाहरलाल नेहरू की छवि को खराब करना है। ‘द नेहरू सेंटर इंडिया’ लॉन्च कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि नेहरू के विचारों और योगदान पर आलोचना हो सकती है, लेकिन उन्हें तोड़मरोड़ कर प्रस्तुत करना, उनके कथनों का गलत अर्थ निकालना और उनकी विरासत को नष्ट करने की कोशिश अस्वीकार्य है।

सोनिया गांधी ने अपने संबोधन में सीधे तौर पर बीजेपी या आरएसएस का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके शब्दों से यह साफ था कि निशाना किस पर है। उन्होंने कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि नेहरू को बदनाम करना आज की सत्ता व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य है। वे सिर्फ उन्हें भुलाना नहीं चाहते, बल्कि उस सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक बुनियाद को खत्म करना चाहते हैं, जिस पर यह राष्ट्र खड़ा है।”

उनका यह बयान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की हालिया टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि नेहरू बाबरी मस्जिद के निर्माण में सरकारी धन लगाना चाहते थे, पर सरदार पटेल ने इसे रोका। कांग्रेस ने इसे झूठ करार देते हुए सरकार पर समाज में विभाजन फैलाने का आरोप लगाया।

सोनिया गांधी ने कहा कि जो ताकतें आज नेहरू पर हमला कर रही हैं, उनका स्वतंत्रता संग्राम में कोई योगदान नहीं रहा और न ही संविधान निर्माण से उनका कोई जुड़ाव रहा। उन्होंने कहा, “यह वही विचारधारा है जिसने नफरत का माहौल पैदा किया, जिसका परिणाम महात्मा गांधी की हत्या के रूप में सामने आया। आज भी उनके हत्यारों को महिमामंडित किया जाता है।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि नेहरू जैसे बड़े व्यक्तित्व की आलोचना स्वाभाविक है, लेकिन उनकी विरासत को मिटाने की संगठित कोशिश, और इतिहास को अपने हिसाब से गढ़ने का प्रयास न तो ईमानदार है और न ही स्वीकार्य। उन्होंने कहा, “विश्लेषण एक बात है, लेकिन जानबूझकर की गई तोड़फोड़ और गलत व्याख्या पूरी तरह अस्वीकार्य है।”

सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि नेहरू को उनके समय की चुनौतियों से काटकर देखना और ऐतिहासिक संदर्भों से अलग करके उनका मूल्यांकन करना गलत है। उनके मुताबिक यह अभियान सिर्फ नेहरू के व्यक्तित्व को छोटा करने का नहीं, बल्कि देश की उस बुनियाद को कमजोर करने का प्रयास है जिसे नेहरू ने मजबूत किया था।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि यह लड़ाई आसान नहीं है, लेकिन नेहरू की विरासत को बचाने और इतिहास को सच के साथ खड़ा रखने के लिए इस अभियान का सामना करना जरूरी है।

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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