नई दिल्ली: पिछले कुछ महीनों से शशि थरूर की कांग्रेस में भूमिका और राजी-नराजी की खबरों के बीच गुरुवार को एक अलग तस्वीर सामने आई। थरूर ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया केरल विधानसभा चुनाव से ‘विवादों के निपटारे’ को लेकर यह बैठक हुई।
संसद भवन परिसर में खड़गे के कक्ष में हुई यह बैठक एक घंटे पैंतालीस मिनट से अधिक चली। यह बैठक ऐसे समय हुई जब पार्टी को इस बात की चिंता सता रही थी कि थरूर प्रकरण केरल में एक बड़ी समस्या का रूप ले सकता है, जहां कांग्रेस एक दशक विपक्ष में रहने के बाद सत्ता में वापसी के लिए पुरजोर प्रयास कर रही है।
बैठक से बाहर निकलते हुए थरूर ने सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘मैंने अपने दो पार्टी नेताओं, विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष के साथ चर्चा की। हमारी बहुत अच्छी, रचनात्मक और सकारात्मक चर्चा हुई।’ हाल की अनबन की अटकलों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, ‘सब ठीक है और हम एक ही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। मैं और क्या कह सकता हूं।’
शशि थरूर-खड़गे और राहुल गांधी की बैठक, क्या हुआ अंदर?
सूत्रों ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि यह एक ‘विस्तृत’ बैठक थी जिसमें ‘विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।’ थरूर ने बाद में एक्स पर एक पोस्ट में दोनों नेताओं को ‘सौहार्दपूर्ण और रचनात्मक चर्चा’ के लिए धन्यवाद दिया और आधिकारिक बयान दोहराया कि पार्टी ‘भारत की जनता की सेवा में’ आगे बढ़ रही है और वे ‘सभी एकमत’ हैं।
बैठक की एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर शेयर की गई जिसमें थरूर, राहुल और खड़गे मुस्कुराते हुए नजर आ रहे हैं।
जब थरूर से पूछा गया कि क्या केरल के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के मुद्दे पर चर्चा हुई, तो उन्होंने इस संभावना को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा, ‘यह मुद्दा कभी था ही नहीं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे किसी भी पद के लिए उम्मीदवार बनने में कोई दिलचस्पी नहीं है। फिलहाल मैं सांसद हूं… संसद में उनके हितों की रक्षा करना मेरा काम है।’
यह बैठक तब हुई जब थरूर कथित तौर पर कोच्चि में हाल ही में हुए एक कार्यक्रम में उनके साथ हुए दुर्व्यवहार और उनके समर्थकों द्वारा कुछ राज्य नेताओं द्वारा उन्हें दरकिनार करने के प्रयासों से नाराज थे।
राहुल गांधी ने किया था नजरअंदाज
थरूर के करीबी सूत्रों के अनुसार, तात्कालिक कारण यह भी था कि राहुल गांधी ने 19 जनवरी को कोच्चि में ‘महापंचायत’ के दौरान मंच पर अन्य नेताओं का जिक्र करते हुए भी थरूर को कथित तौर पर नजरअंदाज किया था। केरल से चार बार सांसद रह चुके और कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य थरूर तब मंच पर मौजूद थे।
इसके तुरंत बाद थरूर ने खड़गे की अध्यक्षता में आयोजित केरल की एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक में भाग नहीं लिया, जिससे यह अटकलें लगने लगीं कि ठीक चुनाव से पहले केरल कांग्रेस में आंतरिक तनाव गहरा रहा है। कांग्रेस 10 साल विपक्ष में रहने के बाद वामपंथियों से सत्ता छीनने की कोशिश कर रही है।
ऐसे में आंतरिक प्रतिद्वंद्विता का तमाशा खड़ा नुकसानदायक हो सकता है, खासकर तब जब भाजपा भी अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ सूत्र ने पीटीआई को बताया, ‘परिणाम तो बाद में ही पता चलेगा’ और अगले कुछ हफ्तों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि ‘एकमत’ का नारा वास्तव में राजनीतिक समन्वय में तब्दील होता है या नहीं।

