नई दिल्ली: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दो दिवसीय राजकीय दौरे का समापन शुक्रवार रात को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा आयोजित भव्य विदाई रात्रिभोज के साथ हुआ। इस दौरान, एक ओर जहाँ भारत की सांस्कृतिक समृद्धि और कूटनीतिक गर्मजोशी देखने को मिली, वहीं कांग्रेस सांसद शशि थरूर की उपस्थिति ने पार्टी के भीतर नया विवाद खड़ा कर दिया।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने थरूर के निमंत्रण स्वीकार करने पर हैरानी व्यक्त की। उन्होंने कहा, “यह काफी आश्चर्यजनक है कि एक निमंत्रण भेजा गया और निमंत्रण स्वीकार भी किया गया। सबकी अंतरात्मा की एक आवाज होती है। जब मेरे नेताओं को आमंत्रित नहीं किया जाता है, लेकिन मुझे किया जाता है, तो हमें समझना चाहिए कि यह खेल क्यों खेला जा रहा है, कौन खेल रहा है, और हमें इसका हिस्सा क्यों नहीं होना चाहिए…”
पवन खेड़ा ने कहा, “जिन्होंने ऐसा निमंत्रण जारी किया, वे भी कई सवाल उठाते हैं। और जिन्होंने निमंत्रण स्वीकार किया, वे भी जांच के दायरे में हैं।”
हालांकि कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने थरूर को बुलाए जाने को ‘सामान्य’ बताया, लेकिन विपक्ष के नेताओं को नजरअंदाज करने पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा, “ऐसे महत्वपूर्ण मामले में, जिसमें महत्वपूर्ण विदेश नीति शामिल है, उस कद के विपक्ष के नेता को आमंत्रित न करना सरकार की बहुत संकीर्ण सोच और पक्षपातपूर्ण रवैये को दर्शाता है।”
कांग्रेस नेता उदित राज ने प्रधानमंत्री मोदी पर साजिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “ऐसे मौके पर भी प्रधानमंत्री मोदी साज़िश करने से नहीं चूकते। अगर विपक्ष के नेता मेहमान प्रतिनिधियों से मिलते, तो वह समझदारी की बात कहते। सिर्फ़ दिखावेबाज़ी ने अब तक देश को कुछ नहीं दिया।”
पूर्व कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने विपक्षी नेताओं की विदेशी मेहमानों से मुलाकात की पुरानी संसदीय परंपरा की याद दिलाई और आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने इसे “पूरी तरह से ध्वस्त” कर दिया है। उन्होंने कहा, “रूस के साथ तो भारत का रिश्ता गांधी परिवार ने बनाया था। उनको ही नहीं मिलने देना विचित्र बात है।”
कांग्रेस के सवालों पर भाजपा ने क्या कहा?
भाजपा नेताओं ने थरूर के बचाव में कहा कि यह योग्यता और प्रोटोकॉल का मामला है। पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने एक्स पर लिखा, “ध्यान खींचने वाली बात यह रही कि पुतिन के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में आयोजित भोज के लिए राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को निमंत्रण नहीं भेजा गया, जबकि शशि थरूर प्रमुख अतिथियों में शामिल थे। राजनीति जितनी छोटी और विभाजनकारी होती जा रही है, उम्मीद थी कि राष्ट्रपति भवन इससे ऊपर रहेगा।”
इस पर बीजेपी नेता प्रीति गांधी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “राहुल गांधी को इसलिए नहीं बुलाया गया क्योंकि वे इस राज्य भोज की प्रोटोकॉल सूची में शामिल नहीं थे। ऐसे कार्यक्रमों में संवैधानिक पदाधिकारी और कूटनीतिक एजेंडे से जुड़े अधिकारी शामिल होते हैं, न कि राजनीतिक हक जताने वाले लोग।
जहां तक शशि थरूर का सवाल है, उन्हें बुलाने का स्पष्ट कारण है। वे विदेश मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष हैं और यह पद इस दौरे से सीधे जुड़ा हुआ है। यह बिल्कुल सामान्य कूटनीतिक प्रक्रिया है।

बीजेपी सांसद राजेश मिश्रा ने भी जोर दिया कि थरूर को उनकी विदेशी मामलों की विशेषज्ञता के कारण बुलाया गया।
विवाद पर शशि थरूर ने क्या कहा?
पुतिन के लिए आयोजित रात्रिभोज में जाने से पहले संसद के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए शशि थरूर ने कहा था, “मुझे नहीं पता किस आधार पर निमंत्रण दिए गए… लेकिन मैं जाऊंगा।” उन्होंने संसदीय परंपराओं की बात करते हुए कहा, “एक समय था जब विदेश मामलों की स्थायी कमेटी के चेयरमैन को नियमित रूप से आमंत्रित किया जाता था। इसे फिर से बहाल किया गया है क्योंकि मुझे निमंत्रित किया गया है।”
थरूर ने कहा कि डिनर के लिए निमंत्रण विदेशी संबंधों पर उनके काम से संबंधित था। उन्होंने एनडीटीवी के संपादक राहुल कंवल से बातचीत में कहा, “मैं कुछ समय बाद यहां लौटा हूँ। इस बार ऐसा लगता है कि उन्होंने अन्य आवाज़ों के लिए थोड़ा और खुलने का फैसला किया है… चूंकि विदेशी देशों के साथ संबंध ही संसदीय स्थायी समिति का विषय हैं, इसलिए बातचीत, माहौल आदि की कुछ जानकारी होना सहायक होता है। इसलिए, मैं इस कारण से यहाँ आकर बहुत खुश हूँ। न ज़्यादा, न कम।”
थरूर ने स्पष्ट किया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को आमंत्रित न किए जाने के सवाल पर उन्हें निमंत्रणों के आधार की जानकारी नहीं है, लेकिन उन्हें आमंत्रित किए जाने पर वह निश्चित रूप से सम्मानित महसूस कर रहे हैं। थरूर ने जोर देकर कहा कि एक सांसद के रूप में अपने निर्वाचन क्षेत्र की बेहतरी के लिए सरकार के साथ सहयोग करने का सवाल “एक अलग बातचीत” है, जिसका राष्ट्रपति भवन के रात्रिभोज में आमंत्रित होने से कोई लेना-देना नहीं है।
पार्टी छोड़ने की अटकलें और थरूर का मापा जवाब
हाल के दिनों में सरकार की प्रशंसा करने वाले थरूर के बयानों और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी राष्ट्रीय पहलों के लिए उन्हें प्रतिनिधिमंडल में शामिल करने पर कांग्रेस द्वारा लगातार व्यक्त की गई निराशा के बीच, केरल के तिरुवनंतपुरम से सांसद के पार्टी छोड़ने की अटकलें फिर से तेज हो गई हैं।
पूर्व टीएमसी सांसद जवाहर सरकार ने थरूर पर निशाना साधते हुए एक्स पर लिखा, “ऐसा राजनीतिक घालमेल क्यों? जब मैं टीएमसी से असहमत था, तो मैंने पार्टी और सांसद पद दोनों छोड़ दिए। वह ऐसा क्यों नहीं कर सकते?”
इन अटकलों पर थरूर ने मापा और सांकेतिक जवाब देते हुए कहा: “…मुझे नहीं पता कि यह सवाल क्यों पूछा जाना चाहिए। मेरा मतलब है कि मैं कांग्रेस पार्टी का सांसद हूँ। मैं निर्वाचित होने के लिए काफी प्रयास से गुजरा हूँ। कुछ और होने के लिए पर्याप्त विचार और अन्य चीज़ों की आवश्यकता होगी।” उन्होंने कहा कि मतदाताओं के लिए उनका एक काम है, जिसे वह पूरी ईमानदारी से कर रहे हैं।
विपक्षी नेताओं को आमंत्रित न किए जाने पर कई महीनों से विवाद चल रहा है। एक दिन पहले राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि उन्हें विदेशी मेहमानों से मिलने से रोका जाता है। शशि थरूर और कांग्रेस आलाकमान के बीच अनबन की खबरें भी रही हैं। इसी साल उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया था, जिसका हिंदी में अर्थ था- ‘जहाँ अज्ञान ही सुख है, वहाँ बुद्धिमान होना मूर्खता है।’ इसके अलावा, इसी साल ‘सिंदूर ऑपरेशन’ के बाद भारतीय पक्ष को विदेश में रखने के लिए जिन नेताओं को चुना गया, उनमें शशि थरूर का नाम भी शामिल था।
पुतिन के लिए आयोजित डिनर में क्या क्या था?
पुतिन के सम्मान में दिए गए इस शानदार भोज में भारत की पाक कला की विविधता को दर्शाया गया। मेनू में साउथ इंडियन शैली के रसम ‘मुरुंगेलई चारु’, कश्मीरी अखरोट की चटनी के साथ गुच्छी डून चेटिन, काले चने के शिकमपुरी कबाब, और वेजिटेबल झोल मोमोज शामिल थे। मुख्य व्यंजन में जाफरानी पनीर रोल, पालक मेथी मटर साग और विभिन्न प्रकार की भारतीय रोटियाँ जैसे लच्छा परांठा और मिस्सी रोटी परोसी गईं। अंत में बादाम हलवा, केसर-पिस्ता कुल्फी और रूसी लोक संगीत तथा भारतीय रागों (जैसे यमन, भैरवी) का सुंदर फ्यूजन प्रस्तुत किया गया।
रात्रिभोज के दौरान, राष्ट्रपति पुतिन ने भारत-रूस संबंधों की बढ़ती गहराई की प्रशंसा की। उन्होंने 15 साल पहले हुए समझौते का जिक्र किया जिसने दोनों देशों के संबंधों को “विशेष रूप से विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” तक पहुँचाया था। उन्होंने दोनों देशों की संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाले अधिक संतुलित वैश्विक व्यवस्था की साझा इच्छा पर भी जोर दिया और संबंधों को भारत के ही वाक्यांश “साथ चलेंगे, साथ बढ़ेंगे” से वर्णित किया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ को रेखांकित किया और कहा कि 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में जारी संयुक्त बयान द्विपक्षीय जुड़ाव के लिए एक महत्वाकांक्षी मार्ग निर्धारित करता है। पुतिन ने रात्रिभोज के तुरंत बाद दिल्ली छोड़ दी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर उन्हें हवाई अड्डे तक छोड़ने गए। दोनों नेताओं ने परिवहन कनेक्टिविटी को मजबूत करने और 2030 तक आर्थिक साझेदारी में महत्वपूर्ण विस्तार का लक्ष्य निर्धारित करने पर सहमति व्यक्त की है। प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी पर्यटकों के लिए 30 दिन का निःशुल्क ई-टूरिस्ट वीज़ा और ई-ग्रुप टूरिस्ट वीज़ा शुरू करने की भी घोषणा की।

