Friday, March 20, 2026
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Share Market Update: शेयर बाजार में क्यों है आज बड़ी गिरावट, 5 वजहें; निवेशकों के 7 लाख करोड़ से ज्यादा स्वाहा

शेयर बाजार में आज सभी क्षेत्रों में बिकवाली का दबाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। प्राइवेट बैंक, ऑटो, फाइनेंसियल, पीएसयू बैंक, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, सर्विसेज, डिफेंस और मेटल के साथ सभी सूचकांक लाल निशान में हैं।

मुंबई: शेयर बाजार में गुरुवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। बाजार खुलने के साथ ही शुरुआती घंटे में सेंसेक्स में 1900 से ज्यादा अंकों की गिरावट हुई। निफ्टी भी 500 से ज्यादा अंक गिरा। बाद के घंटों में मामूली सुधार हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख का असर दिखा। आलम ये हुआ कि बाजार खुलने के शुरुआती कुछ घंटे में ही तेज गिरावट से बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण से 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक स्वाहा हो गए।

दोपहर 1 बजे तक निफ्टी50 करीब 2.22 प्रतिशत या 527.60 अंक गिरकर 23,150.20 पर और सेंसेक्स 2.61 प्रतिशत यानी 1678 अंक गिरकर 75,019.17 पर कारोबार कर रहा था। बाजार बंद होते-होते बीएसई सेंसेक्स 2,496.89 अंक का गोता लगाकर 74,207.24 और एनएसई निफ्टी 775.65 अंक की गिरावट के साथ 23,002.15 अंक पर पहुंच गया।

इससे पहले बाजार खुलने के साथ सुबह से ही सभी क्षेत्रों में बिकवाली का दबाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। प्राइवेट बैंक, ऑटो, फाइनेंसियल, पीएसयू बैंक, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, सर्विसेज, डिफेंस और मेटल के साथ सभी सूचकांक लाल निशान में हैं। निफ्टी रियल्टी सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सूचकांक रहा, जिसमें 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद निफ्टी ऑटो और निफ्टी प्राइवेट बैंक में भी लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट आई। सेंसेक्स पैक में 30 में से 28 शेयर लाल निशान में थे।

स्टॉक मार्केट आखिर क्यों गिरा, क्या हैं 5 बड़ी वजहें

  1. कच्चे तेल के दाम में वृद्धि: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में 4% की तेजी आई है। बाजार में हलचल की ये एक बड़ी वजह मानी जा रही है। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड की कीमत लगभग 3.1% बढ़कर 99.31 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है। वहीं, ब्रेंट क्रूड की कीमत में भी लगभग 4.1% की वृद्धि हुई है और यह 111.59 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रही। इसमें और तेजी की संभावना है।
  2. HDFC बैंक के शेयरों में तेज गिरावट: शेयर बाजार पर एक असर एचडीएफसी बैंक का भी दिखा। भारत के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक एचडीएफसी बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर अतानु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद बैंक के शेयरों में गुरुवार को तेज गिरावट हुई। एक समय यह गिरावट 9 प्रतिशत तक पहुंच गई लेकिन बाद में ये इसमें कुछ रिकवरी हुई। अतानु चक्रवर्ती ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और यह 18 मार्च से प्रभावी हो गया है।
    चक्रवर्ती 2021 में बैंक के बोर्ड में शामिल हुए थे। अपने इस्तीफे पत्र में उन्होंने पिछले दो वर्षों में बैंक के भीतर हुए कुछ घटनाक्रमों पर चिंता व्यक्त की थी। बहरहाल, शेयर बाजार में हलचल के बीच रिजर्व बैंक ने गुरुवार को ही बयान जारी किया कि एचडीएफसी की वित्तीय स्थिति मजबूत है और इसे पेशेवर बोर्ड और मजबूत मैनेजमेंट द्वारा चलाया जा रहा है।
  3. वैश्विक शेयर बाजारों का असर: भारत के शेयर बाजार पर वैश्विक शेयर बाजारों पर नजर आ रहे दबाव का भी असर है। बुधवार को अमेरिकी बाजारों में भारी गिरावट देखी गई, क्योंकि फेडरल रिजर्व ने मुद्रास्फीति बढ़ने का संकेत दिया और ब्याज दरों में कटौती की घोषणा नहीं की। एसएंडपी 500 इंडेक्स 1.36 प्रतिशत गिरकर 6,624.7 पर बंद हुआ, जो लगभग चार महीनों में इसका सबसे निचला स्तर है। नैस्डैक कंपोजिट 1.46 प्रतिशत गिरा, जबकि डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 1.63 प्रतिशत फिसल गया।

इसके अलावा गुरुवार को एशियाई बाजारों में भी नकारात्मक रुझान देखने को मिला है। जापान का निक्केई सूचकांक 2.5 प्रतिशत गिरा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक (KOSPI) 1 प्रतिशत से अधिक नीचे रहा। हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक भी 1.4 प्रतिशत नीचे आया। यूरोप में बुधवार के सत्र के अंत में बाजार भारी गिरावट के साथ बंद हुए। ब्रिटेन का FTSE 100 और जर्मनी का DAX दोनों ही लगभग 1 प्रतिशत गिरे।

  1. विदेशी निवेशकों की ओर से जारी बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों ने गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली जारी रखा रखा है। उन्होंने बुधवार को 2,714 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। यह लगातार 14वां सत्र था जब नेट आउटफ्लो हुआ। हालांकि इस आंकड़े में अभी गुरुवार की गतिविधि शामिल नहीं है, लेकिन हाल के सत्रों में लगातार जारी बिकवाली के रुझान का असर पूरे बाजार पर पड़ रहा है।
  2. लगातार दबाव में रुपया: भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले और कमजोर होकर 92.63 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार LKP सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष (कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी ने कहा, ‘बढ़ते आयात बिल का लगातार दबाव मुद्रा पर बना हुआ है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और होर्मुज जलडमरूमध्य से माल ढुलाई में जारी बाधाओं के कारण भारत के लिए आयात लागत में लगातार वृद्धि चिंता को बढ़ा रही है।’ उन्होंने आगे कहा कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने की संभावना है, जिससे रुपये पर दबाव बना रहेगा।
विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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