नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने बुजुर्गों को निशाना बनाने वाले एक बड़े निवेश धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। दिल्ली पुलिस की दक्षिण-पश्चिम जिला साइबर सेल के मुताबिक, यह अंतरराज्यीय रैकेट दिल्ली, मुंबई और राजस्थान के विभिन्न हिस्सों से संचालित हो रहा था। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने ‘म्यूल बैंक अकाउंट’ (धोखाधड़ी के पैसों के लेनदेन के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते) के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए दक्षिण-पश्चिम जिले के एडिशनल डीसीपी अभिमन्यु पोसवाल ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि इस जांच की शुरुआत एक वरिष्ठ नागरिक की शिकायत के बाद हुई।
पीड़ित बुजुर्ग ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि निवेश के नाम पर उनके साथ 22.67 लाख रुपये की बड़ी धोखाधड़ी की गई है। तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस की टीम ने दिल्ली और राजस्थान में कई संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की।
निवेश धोखाधड़ीः बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से भारी मात्रा में सिम कार्ड, मोबाइल फोन, चेक बुक, एटीएम कार्ड और कई अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि यह नेटवर्क देश के अलग-अलग कोनों में फैला हुआ है और ठगी की गई रकम को तुरंत कई अलग-अलग बैंक खातों (Mule Accounts) के जरिए घुमाया जाता था, ताकि पुलिस की पकड़ से बचा जा सके।
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कैसे काम करता था यह नेटवर्क?
पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधी मुख्य रूप से वरिष्ठ नागरिकों को अधिक रिटर्न का लालच देकर निवेश के लिए प्रेरित करते थे। एक बार पैसे ट्रांसफर होने के बाद, ये जालसाज उस राशि को ‘म्यूल बैंक अकाउंट्स’ के जाल में डाल देते थे, जहाँ से इसे नकदी के रूप में निकाल लिया जाता था या दूसरे डिजिटल वॉलेट में भेज दिया जाता था।
दिल्ली पुलिस ने नागरिकों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत निवेश योजना या अनजान कॉल के झांसे में न आएं। पुलिस अब इस सिंडिकेट के अन्य सदस्यों और इनके द्वारा इस्तेमाल किए गए अन्य खातों की तलाश में जुटी है, ताकि ठगी गई पूरी राशि का पता लगाया जा सके।

