बिहार विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत हासिल करने के बाद नई सरकार फुल एक्शन मोड में नजर आ रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पटना में अधिकारियों से बैठक कर रहे हैं तो डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी दिल्ली दौरे पर थे। गुरुवार को उनकी मुलाकात, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई।
पहली बार गृह विभाग की जिम्मेदारी मिलने के बाद उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पूरे जोर-शोर से प्रदेश की कानून व्यवस्था को सुधारने में लग गए हैं। गुरुवार, 27 नवंबर को दिल्ली में सम्राट चौधरी ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। बिहार विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद दोनों नेताओं की पहली औपचारिक बैठक मानी जा रही है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ सम्राट चौधरी की मुलाकात को लेकर फिलहाल कोई बयान नहीं आया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस औपचारिक बैठक में बिहार के कानून व्यवस्था की स्थिति, बुनियादी ढांचे के विकास, राज्य में निवेश को बढ़ावा देने और पुलिस के आधुनिकीकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई है।
बिहार में नए राजनीतिक माहौल में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को गृह विभाग दिए जाने को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में भाजपा के बढ़ते प्रभाव के प्रमाण के रूप में देखा जा रहा है।
गौर करने वाली बात यह है कि नीतीश कुमार ने पिछले दो दशक में, चाहे वो महागठबंधन के साथ सरकार हो या एनडीए के साथ, कभी भी गृह विभाग अपने अलावा किसी और को नहीं दिया। माना जा रहा है कि नीतीश ने भाजपा की लंबे समय से चली आ रही मांग को स्वीकार करते हुए सम्राट चौधरी को गृह विभाग आवंटित किया है। वैसे भी देश के गृहमंत्री अमित शाह तारापुर में चुनाव प्रचार के दौरान सम्राट चौधरी की कार्यशैली और मुद्दों की समझ की प्रशंसा की थी।
चुनाव प्रचार के दौरान अमित शाह ने मुंगेर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा था, ‘आप सम्राट चौधरी को तारापुर से जिताइए और हम उन्हें बड़ा आदमी बना देंगे।’
अमित शाह के इस बयान के बाद इतना तो तय ही हो गया था कि सम्राट चौधरी को एनडीए की सरकार बनने पर कुछ बड़ा ही मिलेगा। वहीं अमित शाह के इस बयान को राजनीतिक हलकों में भाजपा नेतृत्व द्वारा सम्राट को भविष्य में पार्टी के चेहरे के रूप में पेश करने की मंजूरी के रूप में देखा गया।
गृह विभाग की बागडोर अब सम्राट के हाथों में आने से, प्रशासन और नौकरशाही पर उनका प्रभाव बढ़ने की उम्मीद है। कैबिनेट में नंबर दो की हैसियत से, सम्राट के पास कानून-व्यवस्था की पूरी कमान और जवाबदेही है, और माना जा रहा है वह सीमांचल क्षेत्र में घुसपैठ जैसे मुद्दों को सीधे तौर पर संभालेंगे।
पिछले शुक्रवार को गुजरात में बीएसएफ के 61वें स्थापना दिवस समारोह में गृह मंत्री शाह ने कहा कि ‘बिहार में भाजपा नीत एनडीए की जीत देश में घुसपैठियों के खिलाफ जनादेश है। एनडीए सरकार में नीतीश के मुख्यमंत्री बने रहने के बावजूद, अब भाजपा नेतृत्व की ओर बढ़ती दिख रही है।’ ऐसे में माना जा रहा है कि अमित शाह की पूरी नजर अब सम्राट चौधरी पर है।
गौरतलब है कि किसी भी सरकार में गृह विभाग सबसे शक्तिशाली विभाग माना जाता है। या कुछ यूं कहें कि किसी गठबंधन की सरकार में ये अपनी ताकत दिखाने और जताने का माध्यम भी होता है। नई सरकार के इस फैसले से अब बिहार की राजनीति में करीब दो दशक बाद सबसे बड़ा पावर-शिफ्ट देखने को मिल रहा है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पहली बार गृह विभाग की कमान खुद से हटाकर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सौंप दी है, यह सिर्फ मंत्रालय का बदलाव नहीं यह सत्ता का नया नक्शा तैयार करने वाला फैसला है।
गृह विभाग बिहार सरकार का सबसे अहम मंत्रालय माना जाता है – कानून-व्यवस्था,पुलिस प्रशासन, खुफिया तंत्र और राज्य की सुरक्षा से जुड़ा हर अहम आदेश। अब तक ये सब फैसले सीधे मुख्यमंत्री निवास से निकलते थे। लेकिन पहली बार यह शक्ति मुख्यमंत्री आवास से निकलकर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के हाथों में पहुंच गई है। यही कारण है कि इसे सिर्फ डिपार्टमेंट शफल नहीं, बल्कि सत्ता संरचना में ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है।
गृह विभाग मिलने का मतलब साफ है अब राज्य की सुरक्षा, पुलिस सिस्टम, ट्रांसफर-पोस्टिंग और इन्वेस्टिगेशन जैसे बड़े फैसले उपमुख्यमंत्री के दफ्तर से तय होंगे। राजनीतिक गलियारों में एक बात अब साफ-साफ कही जा रही है सत्ता का नया केंद्र अब सिर्फ मुख्यमंत्री आवास नहीं, बल्कि सम्राट चौधरी का ऑफिस भी होगा। यह फैसला दिखाता है कि भाजपा सरकार में अपना दबदबा तेज़ी से बढ़ा रही है। सम्राट चौधरी को पार्टी और सत्ता दोनों में टॉप लेवल रोल दिया जा रहा है। आने वाले महीनों में वे बिहार बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभर सकते हैं।
बिहार की राजनीति में सम्राट चौधरी का उदय अब नई कहानी लिखने जा रहा है। सम्राट की राजनीतिक शैली, पार्टी पर पकड़, और अब गृह की कमान यह सब मिलकर उनके कद को और भी बड़ा करने जा रहा है।
अब इतना तो तय है गृह विभाग मिलने के बाद सम्राट चौधरी सिर्फ उपमुख्यमंत्री नहीं रहे, वे अब सरकार का दूसरा सबसे बड़ा पावर सेंटर बन चुके हैं। यह सिर्फ जिम्मेदारी का विस्तार नहीं, यह बिहार की राजनीति में एक नए शक्ति केंद्र के उदय का एलान है।
गौरतलब है कि इस बार हुए बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए ने प्रचंड जीत दर्ज की है। वहीं महागठबंधन को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा है। एनडीए को इस चुनाव में कुल 202 सीट आए हैं, जिसमें से भाजपा को सबसे अधिक 89 सीट मिली है। वहीं जेडीयू को 85, लोजपा(रामविलास) को 19 और अन्य को 9 सीटें मिली है। इस बार बीजेपी बिहार में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में निकल के सामने आई है।

