Friday, March 20, 2026
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यूक्रेन को हथियार दिया तो…,रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने द. कोरिया को दी चेतावनी

मॉस्को/सियोलः रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने दक्षिण कोरिया को चेतावनी दी है कि अगर वह यूक्रेन को रूस के खिलाफ युद्ध में हथियार देता है, तो यह एक बड़ी गलती होगी। पुतिन की यह टिप्पणी तब आई जब दक्षिण कोरिया ने कहा कि वह रूस और उत्तर कोरिया के बीच नए समझौते के जवाब में इस पर विचार कर रहा है।

उत्तर कोरिया की यात्रा के बाद वियतनाम पहुंचे पुतिन ने मीडियाकर्मियों से कहा था कि अगर दक्षिण कोरिया यूक्रेन को हथियार देने का फैसला करता है, तो मॉस्को ऐसे निर्णय लेगा जो दक्षिण कोरिया के वर्तमान नेतृत्व को पसंद नहीं आएंगे। गौरतलब है कि उत्तर कोरिया की यात्रा पर पुतिन ने किम जोंग उन के साथ एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए।

पुतिन ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका और उसके सहयोगी यूक्रेन को हथियार देना जारी रखते हैं, तो रूस भी उत्तर कोरिया को हथियार देने के लिए तैयार है। पुतिन ने कहा, “जो लोग इन हथियारों की आपूर्ति करते हैं, वे सोचते हैं कि वे हमसे युद्ध नहीं कर रहे हैं। मैंने प्योंगयांग में भी कहा कि तब हम भी दुनिया के अन्य क्षेत्रों को हथियार देने का अधिकार रखते हैं।”

पुतिन जोर देकर कहा कि रूस भी पश्चिमी देशों की तरह अपने अधिकार को सुरक्षित रखना चाहता है। वह पश्चिमी देशों के विरोधियों को हथियार प्रदान करने के लिए स्वतंत्र है। नैतिक रूप से कोई अन्य देश इस पर उंगली नहीं उठा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि मास्को परमाणु हथियारों के उपयोग पर अपने सिद्धांत में संशोधन पर विचार कर रहा है, क्योंकि पश्चिम परमाणु सीमा को कम करने के लिए कम-क्षमता वाले हथियारों पर काम कर रहा है।

दक्षिण कोरिया ने रूसी राजदूत को तलब किया

दक्षिण कोरिया ने रूसी-उत्तर कोरियाई समझौते की निंदा करते हुए इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया था। पुतिन की टिप्पणियों के बाद, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने शुक्रवार को कहा कि वह यूक्रेन को हथियार आपूर्ति करने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार करेगा और उसका रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि रूस इस मुद्दे पर कैसे विचार करता है।

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने कहा कि रूस और उत्तर कोरिया के बीच की संधि कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है। ब्लिंकन ने कहा कि अमेरिका इस संधि के जवाब में “विभिन्न उपायों” पर विचार करेगा।

दक्षिण कोरिया ने सीमा तनाव बढ़ने के बीच उत्तर कोरिया के साथ संधि के खिलाफ विरोध दर्ज करने के लिए रूसी राजदूत को तलब किया। उसने मांग की कि मास्को प्योंगयांग के साथ सैन्य सहयोग तुरंत बंद कर दे। शुक्रवार को जिनोविएव के साथ अपनी बैठक में, दक्षिण कोरिया के उप विदेश मंत्री किम होंग-क्यून ने संधि की निंदा की और रूस से उत्तर कोरिया के साथ सैन्य सहयोग तुरंत रोकने का आह्वान किया।

रूस की तास समाचार एजेंसी के अनुसार, दक्षिण कोरिया ने यह भी कहा कि वह यूक्रेन को हथियार देने पर विचार करेगा। इस पर रूस के राजदूत जॉर्जी जिनोविएव ने नाराजगी जताई और कहा कि रूस को ब्लैकमेल और धमकाना अस्वीकार्य है।

द. कोरिया ने रूस के साथ युद्ध में की यूक्रेन की मदद

बीबीसी के मुताबिक, दक्षिण कोरिया ने यूक्रेन को मानवीय सहायता और सैन्य उपकरण दिए हैं, लेकिन अब तक घातक हथियार नहीं दिए हैं। इसका कारण यह है कि उसकी नीति युद्धरत देशों को हथियार न देने की है। कुछ लोग यूक्रेन में उम्मीद कर रहे थे कि रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग के कारण सियोल अपनी नीति पर पुनर्विचार करेगा। विश्लेषकों ने कहा था कि यूक्रेन पुतिन की उत्तर कोरिया की यात्रा का उपयोग दबाव बढ़ाने के लिए करेगा। इस यात्रा के दौरान, किम जोंग उन ने रूस के यूक्रेन पर हमले के लिए “पूर्ण समर्थन” का वादा किया। रूस पहले से ही यूक्रेन में उत्तर कोरियाई मिसाइलों का उपयोग कर रहा है।

अमेरिका, जापान ने जताई थी चिंता

शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने रूस-उत्तर कोरिया समझौते पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह समझौता “किसी भी देश के लिए चिंता का विषय होना चाहिए जो शांति और स्थिरता बनाए रखना चाहता है।” उन्होंने कहा कि यह समझौता कोई आश्चर्य की बात नहीं है और अमेरिका कई महीनों से दोनों देशों के बढ़ते रक्षा संबंध के बारे में चेतावनी दे रहा था।

उधर जापान ने भी रूस के उत्तरी कोरिया के साथ हुए समझौते को लेकर चिंता जाहिर की है। जापा ने कहा कि “राष्ट्रपति पुतिन ने उत्तर कोरिया के साथ सैन्य प्रौद्योगिकी सहयोग से इनकार नहीं किया, जिससे वह गंभीर रूप से चिंतित है। जापान के सरकारी प्रवक्ता योशिमासा हयाशी ने कहा कि यह समझौता अस्वीकार्य है।

 

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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