नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मॉनीटरी पॉलिसी कमिटी की बैठक में लिए फैसलों की जानकारी देते हुए बुधवार को बताया कि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच सतर्कता बरतते हुए रेपो रेट को बिना किसी बदलाव के 5.25% पर रखा गया है। साथ ही आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.9% रखा है। इसके अलावा केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026 के लिए वास्तविक जीडीपी ग्रोथ को 7.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया है।
रेपो रेट में बदलाव नहीं होना आम आदमी के लिए राहत की बात है। इससे लोन महंगे नहीं होंगे और न ही आपकी ईएमआई बदलेगी। रेपो दर में आखिरी बार बदलाव दिसंबर 2025 में हुआ था। आरबीआई गवर्नर ने कहा, ‘मौजूदा व्यापक आर्थिक और वित्तीय परिदृश्यों और भविष्य का आकलन करने के बाद, कमिटी ने सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो दर को अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया।’
बता दें कि रिजर्व बैंक जिस ब्याज दर पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट को कम या ज्यादा करने का सीधा असर आमतौर पर बैंक के ग्राहकों पर पड़ता है। रेपो रेट कम होने से बैंक को कम ब्याज पर आरबीआई से लोन मिलता है। इससे बैंक भी ग्राहकों को कम ब्याज पर लोन देते हैं। अगर इसमें वृद्धि होती है तो हमारी-आपकी ईएमआई पर भी इसका असर दिखता है।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब मौजूदा संघर्ष के कारण वैश्विक अनिश्चितता बढ़ गई है। उन्होंने कहा, ‘मॉनीटरी पॉलिसी कमिटी ने गौर किया कि पिछली नीतिगत बैठक के बाद से भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं काफी बढ़ गई हैं।’
मुद्रास्फीति नियंत्रण में लेकिन जोखिम बरकरार
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि बैंक दर और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) की दर 5.50 प्रतिशत पर यथावत रखी गई है, जबकि स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (एसडीएफ) की दर भी 5.00 प्रतिशत पर बरकरार है। उन्होंने कहा कि फिलहाल मुद्रास्फीति नियंत्रण में है, लेकिन ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और मौसम संबंधी खाद्य कीमतों पर संभावित प्रभाव के कारण जोखिम बढ़ रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बाहरी कारक भारत की आर्थिक गति के लिए प्रमुख जोखिम बने हुए हैं। इसके अलावा खराब मौसम और बेमौसम बारिश की वजह से भी फल, सब्जियों और अनाज की कीमतों में बढ़ोतरी होने की आशंका है। ईरान युद्ध की वजह से सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ रहा है। वैसे बताते चलें कि अब से कुछ घंटे पहले ही ईरान युद्ध में दो हफ्ते से सीजफायर का ऐलान दोनों पक्षों की ओर से किया जा चुका है।
बहरहाल, आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना कर रही है। आपूर्ति-पक्ष की बाधाएं और ऊर्जा कीमतों में उछाल के कारण महंगाई के फिर से बढ़ने की आशंका बनी हुई है। हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है और देश की मैक्रोइकोनॉमिक स्थिति पहले की तुलना में कहीं अधिक स्थिर और सक्षम है।
आरबीआई गवर्नर के अनुसार वित्त वर्ष 2027 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। पहली तिमाही में यह 4 प्रतिशत, दूसरी में 4.4 प्रतिशत, तीसरी में 5.2 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 4.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है।
संजय मल्होत्रा ने साथ ही 2025 को एक चुनौतीपूर्ण वर्ष बताया, लेकिन यह भी कहा कि अक्टूबर की नीति के बाद से मुद्रास्फीति में कमी आई है। उन्होंने बैंकिंग प्रणाली की बेहतर कार्यकुशलता को अर्थव्यवस्था के लिए एक प्रमुख सहारा बताया।
GDP की वृद्धि दर 6.9% रहने का अनुमान
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि चालू वित्त वर्ष (2026-27) में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं, खासकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, भारत की विकास दर पर दबाव डाल सकती हैं। बैंक ने पहली तिमाही में 6.8%, दूसरी तिमाही में 6.7%, तीसरी तिमाही में 7% और चौथी तिमाही में 7.2% की वृद्धि का अनुमान लगाया है। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध, तेल की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव आर्थिक दृष्टिकोण को प्रभावित कर सकते हैं। आरबीआई ने साथ ही उम्मीद जताई है कि निजी निवेश में सुधार आगे भी जारी रहेगा, जिससे आर्थिक विकास को समर्थन मिलेगा।
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