अयोध्याः राम मंदिर ने आज अपनी पूर्णता को प्राप्त कर लिया। प्राण प्रतिष्ठा के 673 दिनों बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वजा फहराई। मंदिर के शिखर पर फहराया जाने वाला ध्वज पारंपरिक उत्तर भारतीय नागर शैली की वास्तुकला पर आधारित है, जबकि मंदिर के चारों ओर बना 800 मीटर का परकोटा दक्षिण भारतीय आर्किटेक्चरल परंपरा को दर्शाता है। दोनों शैलियों का यह संगम मंदिर की वास्तु विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि को उजागर करता है।
ध्वज 10 फीट ऊंचा और 20 फीट लंबा समकोण तिकोना है। इस पर उकेरा गया चमकता सूर्य भगवान श्री राम की तेजस्विता और वीरता का प्रतीक है। वहीं कोविदार वृक्ष और ‘ॐ’ का अंकन इसे आध्यात्मिक अर्थ देता है, जो रामराज्य के मूल्यों और भारतीय संस्कृति की आत्मा को दर्शाता है।
मंदिर के शिखर पर जैसे ही धर्म ध्वज फहराया गया, पूरा परिसर ‘जय श्री राम’ के गगनभेदी उद्घोष से गूंज उठा। इस दौरान कई लोग भावुक दिखे। इस ऐतिहासिक क्षण पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहे। ध्वजारोहण के बाद पीएम मोदी ने रामभक्तों को संबोधित किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज संपूर्ण भारत ही नहीं, संपूर्ण विश्व राममय है। हर रामभक्त के मन में अद्वितीय संतोष और असीम कृतज्ञता है। उन्होंने कहा कि सदियों पुरानी वेदना आज समाप्त हो रही है और पांच सौ वर्षों से जल रही आस्था की अग्नि यज्ञ की पूर्णाहुति रूप में आज शांत हो रही है। यह केवल ध्वजारोहण नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है, जो आने वाली सदियों तक रामराज्य के आदर्शों और सिद्धांतों का उद्घोष करेगा।
प्रधानमंत्री ने धर्मध्वज को संघर्ष, साधना और समाज की सहभागिता का प्रतीक बताते हुए कहा कि इसका भगवा रंग सूर्यवंश की महिमा को दर्शाता है। ध्वज पर बना ओम शब्द और रघुकुल का प्रतीक कोविदार वृक्ष सत्यमेव जयते की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि यह ध्वज कर्म और कर्तव्य की प्रधानता का संदेश देता है और उस समाज की कल्पना करता है जहां गरीबी, भेदभाव और दुख न हों।
पीएम मोदी ने उन लोगों को भी प्रणाम कहा जो मंदिर नहीं आ सके लेकिन दूर से ध्वज को नमन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या वह भूमि है जहां आदर्श आचरण में बदलते हैं। यही नगरी श्रीराम की जीवन यात्रा की शुरुआत थी। जब राम गए तो युवराज थे, और लौटे तो मर्यादा पुरुषोत्तम। यह परिवर्तन समाज की शक्ति और सामूहिक धर्म से संभव हुआ। विकसित भारत बनाने के लिए भी वही सामूहिक भावना जरूरी है।
संघर्ष का संकल्प आज सिद्ध हुआः मोहन भागवत
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि आज का दिवस उन संतों, श्रद्धालुओं और कार्यकर्ताओं को समर्पित है जिन्होंने इस स्वप्न को साकार करने के लिए संघर्ष करते हुए अपना जीवन अर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल, संत परमहंस चंद्र दास और अन्य अनेक विभूतियों की आत्मा आज तृप्त हुई होगी क्योंकि उनके संकल्प का परिणाम अब वास्तविक रूप में सामने है।
भागवत ने धर्मध्वज पर बने कोविदार वृक्ष को रघुकुल की जीवन दृष्टि का प्रतीक बताया। यह त्याग और लोककल्याण की भावना को दर्शाता है, जो स्वयं धूप में खड़े रहकर दूसरों के लिए फल और छाया प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज ने साढ़े पांच सौ वर्षों तक अपने सत्व को सिद्ध किया और आज उसी शक्ति के बल पर रामलला भव्य मंदिर में विराजमान हैं। यह केवल निर्माण नहीं, बल्कि हिंदू समाज की धैर्य, श्रद्धा और संकल्प की विजय है।
उन्होंने कहा कि अब कार्य शुरू हो चुका है – ऐसा भारत खड़ा करना होगा जो सबके लिए छाया बांटे, सबके लिए सुख का कारण बने। विपरीत परिस्थितियों में भी संकल्प पूरा करने की क्षमता ही रामराज्य का आधार बनेगी।
सीएम योगी आदित्यनाथ बोले- नए युग की शुरुआत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन की शुरुआत प्रभु श्रीराम और भारत माता की जयघोष से की। उन्होंने कहा कि आज का ध्वजारोहण यज्ञ की समाप्ति नहीं, बल्कि नए युग की शुरुआत है। श्रीराम का मंदिर 140 करोड़ भारतीयों की आस्था और आत्मगौरव का प्रतीक है। यह दिवस उन संतों, कार्यकर्ताओं और योद्धाओं की तपस्या को समर्पित है जिन्होंने संघर्ष के मार्ग को अपना धर्म माना।
सीएम योगी ने कहा कि 500 वर्षों में साम्राज्य बदले, पीढ़ियां बदलीं, लेकिन आस्था कभी नहीं टूटी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे संगठनों ने इसे जीवित रखा और जब प्रधानमंत्री मोदी ने नेतृत्व संभाला, तब एक नए विश्वास का जन्म हुआ। आज वही विश्वास अयोध्या को उत्सवों की वैश्विक राजधानी बना रहा है। हर दिशा में रामराज्य की नींव रखी जा रही है।
योगी ने कहा कि नए भारत में विकास और विरासत का समन्वय दिखाई देता है। राशन, स्वास्थ्य सेवा, आवास और अन्य सुविधाएं बिना भेदभाव हर व्यक्ति तक पहुंच रही हैं, यही रामराज्य की परिकल्पना है। आज अयोध्या आस्था, आधुनिकता और अर्थव्यवस्था के नए युग में प्रवेश कर चुकी है। बेहतर कनेक्टिविटी, धार्मिक मार्गों का विकास और अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट इसे नई दिशा दे रहे हैं। अयोध्या देश की पहली सोलर सिटी और सस्टेनेबल स्मार्ट सिटी के रूप में एक नई पहचान बना रही है।

