नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी ने महाराष्ट्र की एकमात्र राज्यसभा सीट हासिल करने के लिए महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के भीतर गहन बातचीत शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार पार्टी इसे राज्य सभा में अपनी स्थिति को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी बता रही है। दरअसल, महाराष्ट्र में सात राज्य सभा सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव होने हैं। इसमें विपक्ष के जीतने योग्य एक ही सीट नजर आ रही है। इस एकमात्र को लेकर शिवसेना यूबीटी दावा ठोक चुकी है, लेकिन कांग्रेस भी फिलहाल इस पर लगातार बातचीत जारी रखे हुए है।
कांग्रेस के सामने कौन सी मुश्किल?
इस साल राज्यसभा की 72 सीटें रिक्त हो रही हैं। ऐसे में कांग्रेस पार्टी के सामने संख्या की एक महत्वपूर्ण परीक्षा है जो यह निर्धारित कर सकती है कि क्या वह नेता प्रतिपक्ष (LoP) का पद बरकरार रख पाएगी या नहीं। संसदीय नियमों के अनुसार, LoP पद का दावा करने के लिए किसी पार्टी के पास 245 सदस्यीय सदन में कम से कम 10 प्रतिशत यानी कम से कम 25 सांसद होने चाहिए।
कांग्रेस के पास वर्तमान में 27 सदस्य हैं, लेकिन अभिषेक मनु सिंहवी, रजनी पाटिल, फूलोदेवी नेताम और के. टी. एस. तुलसी जैसे वरिष्ठ नेताओं के रिटायर होने से इसकी संख्या इस सीमा से नीचे गिरने का खतरा है।
सबसे अहम बात यह भी है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, जो राज्यसभा में विपक्ष के नेता भी हैं, उनका कार्यकाल भी जून में समाप्त होने वाला है। नई सीटें हासिल करने में विफल रहने पर पार्टी को विपक्ष के नेता के पद से जुड़े संवैधानिक अधिकार, संस्थागत प्रभाव और राजनीतिक प्रतिष्ठा से वंचित रहना पड़ सकता है। इसी स्थिति से बचने के लिए, कांग्रेस के महाराष्ट्र प्रभारी रमेश चेन्निथला ने कथित तौर पर शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे से संपर्क किया है।
कांग्रेस ने दिया उद्धव ठाकरे को बड़ा ऑफर!
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस पार्टी ने एक रणनीतिक ‘सीट अदला-बदली’ का प्रस्ताव शिवसेना यूबीटी के सामने रखा है। इसके अनुसार कांग्रेस राज्यसभा सीट पर अभी चुनाव लड़ेगी ताकि राष्ट्रीय स्तर पर उसकी सीटों की संख्य स्थिर हो सके, और बदले में वह भविष्य में महाराष्ट्र विधान परिषद (एमएलसी) के लिए ठाकरे का समर्थन करेगी।
कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि यह कदम महज पार्टी-केंद्रित मांग नहीं है, बल्कि केंद्र में इंडिया ब्लॉक और महाराष्ट्र में एमवीए दोनों में स्थिरता बनाए रखने के लिए आवश्यक है। हालांकि, इस प्रस्ताव का अंतिम निर्णय क्षेत्रीय सहयोगियों, विशेष रूप से ठाकरे और एनसीपी के वरिष्ठ नेता शरद पवार की सहमति पर निर्भर करता है।
हालांकि, 16 मार्च के चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 5 मार्च तेजी नजदीक आ रही है। ऐसे में गेंद विपक्ष की क्षेत्रीय पार्टियों के पाले में है। उद्धव ठाकरे और शरद पवार अब कांग्रेस की अपील पर सहमत होते हैं या नहीं, यह देखने वाली बात होगी। साथ ही यह विपक्षी गठबंधन की आंतरिक मजबूती और एकता के लिए भी निर्णायक प्रश्न बना हुआ है, जिसे लेकर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं।

