Saturday, November 29, 2025
Homeभारत'कौन जानता है कल सिंध फिर से भारत में वापस आ जाए',...

‘कौन जानता है कल सिंध फिर से भारत में वापस आ जाए’, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बड़ा बयान

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सिंधी समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि भू राजनीतिक सीमाएं बदल सकती हैं। उन्होंने कहा कि सिंध पहले भारत का हिस्सा था।

नई दिल्लीः रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार, 23 नवंबर को एक बड़ा बयान दिया है जिससे पड़ोसी देश पाकिस्तान में हलचल मच सकती है। एक कार्यक्रम में संबोधन के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि हालांकि सिंध आज भारत का हिस्सा नहीं है लेकिन यह क्षेत्र भारत की सभ्यतागत विरासत से गहराई से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि सिंध जो कि 1947 से पहले अविभाजित भारत का हिस्सा था और विभाजन के बाद पाकिस्तान में शामिल हुआ और भविष्य में भारत में आ सकता है।

राजनाथ सिंह ने क्या कहा?

राजनाथ सिंह की यह टिप्पणी ऐसे वक्त में आई है जब मई में ऑपरेशन सिंदूर के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव जारी है। रविवार को नई दिल्ली में सिंधी समाज को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि “सभ्यता की दृष्टि से सिंध हमेशा भारत का हिस्सा रहेगा।” इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि भू-राजनैतिक सीमाएं स्थायी नहीं हैं।

कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि “आज सिंध की भूमि भारत का हिस्सा नहीं हो सकती है लेकिन सभ्यता की दृष्टि से सिंध हमेशा भारत का हिस्सा है। और जहां तक भूमि का सवाल है सीमाएं बदल सकती हैं। कौन जानता है कल सिंध फिर से भारत में आ जाए।”

मौजूदा समय में सिंध पाकिस्तान का एक राज्य है जो कि सिंधी समुदाय के लोगों का मूल स्थान है जो भारत की आबादी का एक बड़ा हिस्सा है। सिंधु घाटी सभ्यता का उद्गम स्थल भी सिंध ही है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विभाजन के दशकों बाद भी सिंधी हिंदुओं के साथ भावनात्मक और सांस्कृतिक संबंध पर चर्चा करते हुए वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी का उल्लेख किया।

इस दौरान उन्होंने आडवाणी के लेखों का हवाला देते हुए कहा कि उस पीढ़ी के कई सिंधी हिंदुओं ने सिंध को भारत से अलग करने को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है।

हिंदू और मुसलमान मानते हैं पवित्र

उन्होंने कहा कि हिंदू और मुसलमान दोनों ऐतिहासिक रूप से सिंधु नदी के जल को पवित्र मानते रहे हैं।

उन्होंने कहा “मैं यहां लाल कृष्ण आडवाणी का भी जिक्र करना चाहूंगा। उन्होंने अपनी एक किताब में लिखा कि विशेष रूप से उस पीढ़ी के सिंधी हिंदुओं ने सिंध को भारत से अलग करने पर स्वीकार नहीं कर पाए हैं। सिर्फ सिंध में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में हिंदू सिंधु नदी को पवित्र मानते थे। सिंध के कई मुसलमान भी मानते थे कि सिंधु नदी का पानी मक्का के आब-ए-जमजम से कम पवित्र नहीं है। यह आडवाणी का कथन है।”

सांस्कृतिक बंधन को दोहराते हुए सिंह ने कहा कि सिंध के लोग – चाहे वे आज कहीं भी रहते हों – “हमेशा हमारे अपने रहेंगे।”

इन टिप्पणियों ने अपने समय और व्यापक भू-राजनैतिक संदर्भ कारण ध्यान आकर्षित किया है। इससे आने वाले दिनों में पाकिस्तान की ओर से कड़ी कूटनीतिक प्रतिक्रिया का मंच तैयार है।

अमरेन्द्र यादव
अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments