लोकसभा में बजट पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अमेरिका के साथ हुए हालिया व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। राहुल गांधी ने समझौते को पूरी तरह सरेंडर करार देते हुए कहा कि भारत को पाकिस्तान के बराबर खड़ा नहीं किया जा सकता। उनके आरोपों पर सरकार ने कड़ा जवाब दिया और विशेषाधिकार हनन नोटिस लाने की बात कही।
राहुल गांधी ने कहा कि अगर ‘इंडिया’ गठबंधन अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा होता, तो समझौता बराबरी की शर्तों पर होता। उन्होंने कहा कि किसी भी बातचीत में भारतीय डेटा सबसे अहम संपत्ति है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि डिजिटल ट्रेड नियमों पर नियंत्रण छोड़ दिया गया, डेटा लोकलाइजेशन हटाया गया और डेटा के फ्री फ्लो की अनुमति दी गई। साथ ही डिजिटल टैक्स पर कैप और सोर्स कोड डिस्क्लोजर में ढील जैसे कदम भारत के हितों के खिलाफ बताए।
राहुल गांधी ने कहा कि बातचीत मालिक और नौकर की तरह नहीं, बल्कि बराबरी के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर ‘इंडिया’ अलायंस राष्ट्रपति ट्रंप के साथ बातचीत कर रहा होता, तो हम साफ कर देते कि यह बातचीत मालिक और नौकर के बीच नहीं, बल्कि दो बराबर की ताकतों के बीच होनी चाहिए। हम भारत की ऊर्जा सुरक्षा और किसानों के हितों पर कोई मोलभाव नहीं होने देते। अगर अमेरिका अपने किसानों की सुरक्षा चाहता है, तो भारत भी अपने किसानों की रक्षा करेगा।
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि समझौते के बाद यह स्थिति बन सकती है कि भारत कहां से तेल खरीदेगा, यह अमेरिका तय करे। यदि भारत किसी ऐसे देश से तेल खरीदे जो अमेरिका को स्वीकार न हो, तो टैरिफ के जरिए दबाव बनाया जा सकता है। उनके मुताबिक इससे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता सीमित हो सकती है।
राहुल गांधी ने अपने भाषण में एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने 1.5 अरब भारतीयों का भविष्य सरेंडर कर दिया। यह सरेंडर इसलिए किया गया है क्योंकि प्रधानमंत्री भाजपा के उस फाइनेंशियल सिस्टम” को बचाना चाहते हैं, जिस पर अमेरिका में केस चल रहा है। इस बयान के दौरान सदन में भारी हंगामा हुआ।
राहुल गांधी और पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल के बीच भी दिलचस्प नोकझोंक देखने को मिली, जहाँ राहुल ने पुराने संबंधों का हवाला देते हुए मजाकिया लहजे में कहा कि “आप (जगदंबिका पाल), कांग्रेस के पुराने सदस्य हैं, इसलिए मैं आज एक खास एहसान करूंगा, मैं पीछे हट जाऊंगा। आप जानते हैं कि हमें आपसे प्यार है। हम जानते हैं कि आपका दिल वहां नहीं है, आपका दिल यहां है।”
इसपर जगदंबिका पाल ने कहा कि मैं यहां एक पीठासीन अधिकारी के तौर पर हूं। अगर आप वहां बैठे हैं, तो इसका मतलब है कि आपने मेरी सलाह नहीं मानी।
राहुल गांधी के आरोपों पर भाजपा ने क्या कहा?
राहुल गांधी के आरोपों पर सरकार ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि वे सदन को गुमराह करने और बेबुनियाद आरोप लगाने के लिए राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस लाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संसद के स्पष्ट नियम हैं और किसी भी सदस्य को गंभीर आरोप लगाने से पहले नोटिस देना और उसे साबित करना होता है। रिजिजू ने मांग की कि राहुल गांधी सदन में अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करें।
भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने भी कहा कि बिना आधार के आरोपों से सदन और विपक्ष के नेता की गरिमा दोनों प्रभावित होती हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत किसी के आगे नहीं झुकेगा। वहीं, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने दोहराया कि सभी फैसले किसानों के हितों को ध्यान में रखकर लिए गए हैं और उनके हित पूरी तरह सुरक्षित हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने राजस्थान के बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा कि प्रमुख मुद्दों और निवेश की स्पष्ट रूपरेखा का अभाव है।
राजद सांसद मनोज झा ने राहुल गांधी के बयान का बचाव करते हुए कहा कि उसे रूपक के तौर पर समझा जाना चाहिए और बड़े सवालों से ध्यान नहीं भटकाया जाना चाहिए। मनोज झा ने कहा कि लोहिया जी तो उस दौर में कहते थे कि भारत को कोई बेचने की साजिश कर रहा है। मेटाफर है और अगर आप मेटाफर नहीं समझते हैं तो ये चिंता का विषय है। जो कुछ उन्होंने कहा, एपस्टीन फाइल सबने पढ़ी है, दुनिया में इस पर इस्तीफे हो रहे हैं यहां पर्दा डाला जा रहा है।

