नई दिल्लीः लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने त्रिपुरा के छात्र पर हुए हमले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को घेरा है। उन्होंने देहरादून में त्रिपुरा के एमबीए छात्र पर हुए नस्लीय हमले को लेकर कहा कि भाजपा के नफरत फैलाने वाले नेतृत्व द्वारा इस तरह की हिंसा को सामान्य बना दिया गया है।
गौरतलब है कि देहरादून में बीते दिनों त्रिपुरा के दो भाइयों पर नस्लीय हमला हुआ जिसमें एक की मौत हो गई। मारा गया छात्र एंजेल चकमा एमबीए का छात्र था। राहुल गांधी ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे घृणा अपराध बताया और कहा कि यह लंबे समय से चले आ रहे माहौल का परिणाम है।
त्रिपुरा के रहने वाले थे एंजेल चकमा
एंजेल चकमा त्रिपुरा के नंदनगर जिले के रहने वाले थे। उस पर देहरादून में नस्लीय टिप्पणी का विरोध करने पर छह लोगों के समूह द्वारा 9 दिसंबर को पिटाई कर दी गई। इससे चकमा को गंभीर चोटें आईं और बीती 26 दिसंबर को उसकी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया।
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया। इसमें लिखा “देहरादून में एंजेल चकमा और उनके भाई माइकल के साथ जो हुआ वह एक भयावह घृणा अपराध है। नफरत रातोंरात पैदा नहीं होती। वर्षों से इसे रोजाना – विशेष रूप से हमारे युवाओं को – जहरीली सामग्री और गैर-जिम्मेदार बयानों के माध्यम से बढ़ावा दिया जा रहा है। और सत्ताधारी भाजपा के नफरत फैलाने वाले नेतृत्व द्वारा इसे सामान्य बना दिया गया है।”
राहुल ने आगे लिखा “भारत सम्मान और एकता पर बना है न कि भय और दुर्व्यवहार पर। हम प्रेम और विविधता का देश हैं। हमें एक मृत समाज नहीं बनना चाहिए जो साथी भारतीयों को निशाना बनाए जाने पर आंखें मूंद ले। हमें आत्मचिंतन करना होगा और यह समझना होगा कि हम अपने देश को किस ओर जाने दे रहे हैं।”
पुलिस के मुताबिक, 9 दिसंबर को एंजेल चकमा और उसका भाई माइकल देहरादून में एक शराब की दुकान के पास स्थित एक कैंटीन में पी रहे थे तभी दूसरा समूह आया। इसमें आरोपी सूरज ख्वास (22), अविनाश नेगी (25) और सुमित (25) भी शामिल थे।
इस समूह ने एंजेल और उसके भाई पर नस्लीय टिप्पणी करते हुए निशाना साधा। जब भाइयों ने विरोध किया तो यह विवाद हिंसक हमले में बदल गया। इसमें चाकू और अन्य धारदार चीजें शामिल थीं। अपने भाई को बचाने की कोशिश के दौरान माइकल भी घायल हो गया।
पुलिस ने पांच आरोपियों को किया गिरफ्तार
एंजेल के पिता बीएसएफ के जवान हैं। उन्होंने कहा कि उनके बेटे को हमलावरों द्वारा बार-बार ‘चाइनीज’ और ‘चाइनीज मोमो’ कहकर पुकारा गया। इसके बावजूद एंजेल ने उनसे कहा कि वह भारतीय है, चीनी नहीं फिर भी हमलावरों ने कथित तौर पर उस पर चाकुओं और अन्य धारदार हथियारों से हमला कर दिया।
इस मामले में पुलिस ने अब तक छह में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। नेपाल के कंचनपुर निवासी यज्ञराज अवस्थी फरार हैं। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी में सहायक सूचना देने वाले को 25,000 रुपये का इनाम देने की घोषणा की है और कई स्थानों पर छापेमारी कर रही है। पुलिस की एक टीम को नेपाल भी भेजा गया है।
घटना पर बढ़ते आक्रोश के बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ऐसी घटनाएं स्वीकार्य नहीं हैं और कहा कि सरकार अपराधियों के साथ कड़ाई से पेश आएगी। उन्होंने जोर दिया कि राज्य सरकार उत्तराखंड में रहने वाले हर नागरिक की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि फरार आरोपी को जल्द से जल्द पकड़ें। उन्होंने कहा “जो कानून-व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को सरकार से किसी भी प्रकार की दया की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। ऐसे उपद्रवियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।”
इस घटना को दुखद और अप्रत्याशित बताते हुए त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि उनके उत्तराखंड समकक्ष ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, “दिल्ली सरकार जो इस घटना से अवगत है, ने उत्तराखंड सरकार को इस मामले में कार्रवाई करने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं।”
इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर खूब आक्रोश देखा गया और लोगों ने न्याय की मांग की।

