नई दिल्ली: केरल में अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों का प्रचार जोरों पर है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी बुधवार को केरल में कोझिकोड में एक रैली में शामिल होना था। हालांकि, सोनिया गांधी की तबीयत खराब होने और अस्पताल में भर्ती होने की वजह से वे केरल नहीं जा सके। हालांकि, उन्होंने चुनावी रैली को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। इसी दौरान उन्होंने मां सोनिया के अस्पताल में भर्ती होने और केरल की नर्स द्वारा उनकी देखरेख किए जाने का जिक्र किया। राहुल गांधी ने कहा कि यही केरलम की भावना है।
राहुल गांधी ने कहा, ‘कल रात मैं अस्पताल में अपनी माँ के कमरे में एक छोटे से सोफे पर सो रहा था, और किसी भी बेटे की तरह, मैं उनकी सेहत को लेकर बहुत चिंतित था। पूरी रात मुझे सिर्फ एक ही बात से सुकून मिला। मुझे केरल की एक नर्स से सुकून मिला, जो हर घंटे आकर मेरी माँ का हालचाल पूछती थी। हर घंटे वह आती और उनका हालचाल लेती। वह मुस्कुराती और उनका हाथ थाम लेती। मैं सोचने लगा कि केरल की नर्सों ने कितने ही बेटों, बेटियों, भाइयों और बहनों को उनके सबसे कठिन क्षणों में सहारा दिया होगा।’
राहुल ने आगे कहा, ‘सुबह-सुबह मैंने उनसे पूछा- क्या आप रात में सोती हैं, या पूरी रात काम करती हैं?’ उन्होंने कहा मैं पूरी रात काम करती हूँ। तो, जब पूरी दुनिया सो रही होती है, केरल की महिलाएं, न केवल केरल में बल्कि दिल्ली में, पूरे देश में और दुनिया भर में, लोगों को दिलासा दे रही होती हैं, उनका हाथ थाम रही होती हैं और उन्हें सुकून का एहसास करा रही होती हैं। मेरे लिए, यही केरलम राज्य की भावना है।’
राहुल गांधी ने क्यों किया केरल की नर्सों का जिक्र
राहुल गांधी द्वारा चुनाव से ठीक पहले नर्सों का जिक्र किए जाने के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। देश में केरल की करीब 10 लाख से ज्यादा नर्सें काम करती हैं। विदेशों में यह संख्या और भी ज्यादा है। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि राहुल ने केरल की नर्सों का जिक्र कर बड़े पैमाने पर वोटों को साधने की कोशिश की है।
आंकड़े बताते हैं कि राज्य में 45 लाख से अधिक पंजीकृत नर्सें हैं। इसके अलावा लगभग 15,000 नर्सें हर साल स्नातक होती हैं। केरल में नर्सिंग कॉलेजों की तादाद काफी ज्यादा है। अंग्रेजी पर अच्छी पकड़ होने की वजह से विदेशों में भी काम करना इनके लिए आसान होता है। इसके अलावा अनुशासन, मेहनती और पेशेवर व्यवहार के कारण दुनिया भर के अस्पताल इन्हें प्राथमिकता देते हैं। केरल की नर्सें खाड़ी देशों से लेकर यूरोप, अमेरिका तक के अस्पतालों में मौजूद हैं।
केरल में 9 अप्रैल को मतदान
केरल में 9 अप्रैल को एक चरण में मतदान होना है। राज्य में 140 विधानसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव के लिए 985 उम्मीदवार मैदान में हैं। राज्य में मुख्य मुकाबला कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन और सीपीएम के नेतृत्व वाले एलडीएफ के बीच है। साल 2021 के विधानसभा चुनाव में सीपीएम के नेतृत्व वाली एलडीएफ ने 99 सीटें जीती थी। वहीं, कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ को 41 सीटें मिलीं और भाजपा कोई सीट नहीं जीत पाई थी। इससे पहले 2016 में पार्टी ने पहली बार केरल विधानसभा में एक सीट जीती थी।
एलडीएफ के लिए यह चुनाव तीसरी लगातार बार सत्ता बनाए रखने की परीक्षा होगी। केरल के चुनावी इतिहास में पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। एलडीएफ ने 2021 में सत्ता में वापसी की थी और राज्य में लंबे समय से बदलती सरकार की परंपरा को पिछली बार तोड़ा था।
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