Friday, March 20, 2026
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संविधान पर खतरा… संस्थानों पर कब्जा, राहुल गांधी ने जर्मनी में भाजपा-RSS पर क्या आरोप लगाएं, BJP ने बताया ‘लीडर ऑफ प्रोपेगैंडा’

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पिछले हफ्ते तीन दिनों के जर्मनी दौरे पर थे। यहां एक कार्यक्रम में उन्होंने भाजपा, आरएसएस और भारतीय जांच एजेंसियों पर कई तरह के आरोप लगाए। कांग्रेस ने राहुल के स्पीच का वीडियो भी जारी किया है।

पिछले हफ्ते जर्मनी के दौरे पर गए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक कार्यक्रम में भाजपा पर देश की लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं को कब्जे में लेने का आरोप लगाया। जर्मनी के बर्लिन स्थित हर्टी स्कूल में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा की राजनीति का मूल प्रस्ताव ही संविधान और समानता की अवधारणा को कमजोर करना है।

कांग्रेस द्वारा सोमवार (22 दिसंबर 2025) को जारी करीब एक घंटे के वीडियो में राहुल गांधी कहते हैं कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था सिर्फ देश की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक अहम सार्वजनिक संपत्ति है। ऐसे में भारतीय लोकतंत्र पर हो रहा हमला वैश्विक लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी सीधा हमला है।

‘संविधान को खत्म करने की कोशिश

‘पॉलिटिक्स इज द आर्ट ऑफ लिसनिंग’ नाम से पोस्ट किए गए वीडियो में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा जो राजनीतिक दिशा प्रस्तावित कर रही है, वह संविधान के मूल विचारों को खत्म करने वाली है। उनके मुताबिक इसमें राज्यों के बीच समानता, भाषाओं और धर्मों की बराबरी और हर नागरिक के समान मूल्य की भावना को कमजोर करने की कोशिश शामिल है। उन्होंने कहा कि संविधान का केंद्रीय आधार यही है कि हर व्यक्ति की कीमत समान है, लेकिन बीजेपी इस विचार को खत्म करना चाहती है।

हर्टी स्कूल में छात्रों के सवालों के जवाब में राहुल गांधी ने दावा किया कि देश की संस्थागत संरचना पर फुल-स्केल अटैक हो रहा है। उनका कहना था कि चुनावी प्रक्रिया से लेकर जांच एजेंसियों तक, कई संस्थाओं का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष सिर्फ चुनावों में गड़बड़ी की बात भर नहीं कर रहा, बल्कि इस संस्थागत कब्जे के खिलाफ एक व्यवस्थित प्रतिरोध खड़ा करेगा।

राहुल गांधी ने और क्या कहा?

जांच एजेंसियों पर आरोप: राहुल गांधी ने अपनी स्पीच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का जिक्र करते हुए कहा कि इन एजेंसियों की कार्रवाई का रुख एकतरफा है। उनके मुताबिक ज्यादातर केस विपक्षी नेताओं के खिलाफ दर्ज हैं, जबकि भाजपा से जुड़े नेताओं के खिलाफ कार्रवाई न के बराबर दिखती है।

कारोबारियों को डराने का दावा: राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र ने जांच एजेंसियों को हथियार बना लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें एक लेन-देन हो रहा है जिसमें भारत में बिजनेसमैन विपक्षी पार्टियों के बजाय भाजपा को आर्थिक रूप से सपोर्ट कर रहे हैं।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अगर कोई कारोबारी कांग्रेस या किसी भी विपक्षी दल का समर्थन करता है, तो उसे जांच एजेंसियों के जरिए डराया-धमकाया जाता है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल देश की संस्थाओं को अपनी निजी संपत्ति की तरह देखता है और उन्हें राजनीतिक ताकत बढ़ाने के औजार के रूप में इस्तेमाल करता है।

चुनावी प्रक्रिया पर सवाल: हरियाणा विधानसभा चुनाव को लेकर राहुल गांधी ने दावा किया कि कांग्रेस ने वहां साफ तौर पर जीत दर्ज की थी। वहीं महाराष्ट्र चुनाव की निष्पक्षता पर भी उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर संदेह बने हुए हैं।

संस्थाओं की भूमिका पर चिंता: राहुल गांधी ने कहा कि देश में ऐसा माहौल बन गया है, जहां कई संवैधानिक और लोकतांत्रिक संस्थाएं वह भूमिका नहीं निभा पा रही हैं, जिसके लिए उनका गठन किया गया था। यह स्थिति लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती है।

भारत की विविधता पर जोर: उन्होंने कहा कि भारत किसी एक व्यक्ति की इच्छा से नहीं, बल्कि राज्यों और समाज के बीच संवाद से चलता है। भारत एक जटिल और विविध देश है, जहां कई भाषाएं, संस्कृतियां और विचार एक साथ मौजूद हैं, और इसे एकतरफा फैसलों से नहीं चलाया जा सकता।

INDIA गठबंधन और RSS: INDIA गठबंधन को लेकर राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि गठबंधन की सभी पार्टियां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की मूल विचारधारा से सहमत नहीं हैं और इसी मुद्दे पर वे एकजुट हैं। उन्होंने माना कि राज्यों और स्थानीय चुनावों में गठबंधन दलों के बीच टैक्टिकल कॉन्टेस्ट होते रहेंगे, लेकिन संसद और वैचारिक संघर्ष में विपक्ष साथ खड़ा है।

आर्थिक नीतियों पर हमला: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों की आलोचना करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के आर्थिक मॉडल को ही आगे बढ़ाया है, लेकिन अब यह मॉडल अपनी सीमा पर पहुंच चुका है और आगे विकास की राह नहीं दिखा पा रहा।

दो विचारधाराओं की लड़ाई: अपने संबोधन के अंत में राहुल गांधी ने कहा कि भारत में लड़ाई सिर्फ चुनाव जीतने की नहीं, बल्कि देश के भविष्य को लेकर दो अलग-अलग सोचों के बीच है। एक तरफ भाजपा और आरएसएस का नजरिया है, जबकि दूसरी तरफ वह सोच है जो भारत को विविध, संघीय और संवाद आधारित देश मानती है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।

भाजपा ने बताया ‘लीडर ऑफ प्रोपेगैंडा’

भाजपा के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने राहुल गांधी के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वह एक बार फिर ‘डिफेम इंडिया टूर’ पर हैं। पूनावाला ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी विदेश जाकर भारत की छवि खराब करते हैं और झूठे बयान देते हैं।

उन्होंने कहा, “राहुल गांधी न तो नेता प्रतिपक्ष की तरह व्यवहार कर रहे हैं और न ही जिम्मेदार नेता की तरह। वह अब ‘लीडर ऑफ प्रोपेगैंडा’ बन चुके हैं। जर्मनी में उन्होंने कहा कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग नहीं है, देश की संस्थाएं तबाह हो चुकी हैं, जबकि चीन अच्छा कर रहा है।”

भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का रवैया भारत को बदनाम करने और चीन की तारीफ करने का है। चीन की प्रशंसा करना और भारत को बदनाम करना अब राहुल गांधी की पहचान बन गई है। वे लीडर ऑफ पार्टींइंग (पार्टी करने वाले नेता) हैं।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी ने यह मुद्दा उठाया है। इससे पहले संसद में चुनावी सुधारों पर चर्चा के दौरान भी उन्होंने चुनाव आयोग सहित अन्य संस्थाओं पर आरएसएस के कब्जे का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि यह देश के संस्थानों को अपने नियंत्रण में लेने के एक बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा है।

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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