पाल साहब सुबह 6 बजे मालाणी एक्सप्रेस से बाड़मेर रेलवे स्टेशन पर उतरे। जय सिंह बाहर ही खड़े थे उनके इंतजार में। सामान वगैरह गाड़ी में रखा और घर पहुंचे।
पाल साहब मूलतः पश्चिम बंगाल के रहने वाले है और वर्षों पहले यहाँ एयरफोर्स में नौकरी करते थे। उस वक्त जयसिंह के यहाँ ही किराए पर रहते थे। फिर पोस्टिंग हो गई, पर संपर्क लगातार बना रहा। अभी जय सिंह के बेटे की शादी है तो पाल साहब को खूब आग्रह करके बुलाया गया है।
थोड़ी देर और लेटने के बाद पाल साहब को चाय नाश्ता करवाया। फिर स्नान आदि के बाद दोनों शहर घूमने के लिए निकले।
जैसे जैसे शहर को देखते जा रहे थे, पाल साहब आश्चर्यचकित हुए जा रहे थे। जय सिंह से बोले, “यार ये बाड़मेर तो एकदम बदल गया है। इतनी बड़ी बड़ी बिल्डिंग्स, इतने लग्जरी वाहन, फ्लाईओवर, मॉल, कैफे, फैशन, हॉर्डिंग आदि। ये सब कैसे हुआ?
जय सिंह ने कहा, “ये सब तेल का खेल है साहब”
पाल साहब बोले, “क्या मतलब तेल का खेल ? किसी ने तेल की फैक्ट्री लगाई है क्या ?”
जय सिंह ने मुस्कुराते हुए कहा, “फैक्ट्री की क्या बिसात है पूरी रिफाइनरी लगाई है।”
पाल साहब ने झुंझलाते हुए कहा ” ऐसे पहेलियां न बुझाओ, पूरी बात बताओ”
जय सिंह ने कहा ” चलो एक नया कैफे खुला है वहाँ चलते है, वहीं सारी बात बताता हूँ।”
दो कैपेचीनो ऑर्डर करने के बाद जय सिंह बताने लगे कि, “आप तो 2002 में ही यहाँ से चले गए थे। बाड़मेर में तेल की खोज 2004 में हुई। यूं तो कच्चे तेल की खोज की शुरुआत 1968 में ही हो चुकी थी। वर्ष 2001 में ओएनजीसी, ओआईएल और शैल जैसी कंपनियों ने खोज के बाद ये संकेत दे दिए थे कि यहां पेट्रोलियम का बड़ा भंडार मिलने की उम्मीद न के बराबर है, लेकिन इसके तीन साल बाद 2004 में बाड़मेर में देश का सबसे बड़ा तेल भंडार खोज लिया गया। केयर्न एनर्जी ने अपने 16वें कुएं की ड्रिलिंग के बाद 2004 में ‘मंगला’ के नाम से देश का सबसे बड़ा ऑनशोर तेल भंडार खोज निकाला।”
”इसी दिन बाड़मेर ने अपने भाग्य से साक्षात्कार किया, जब इसके रेगिस्तानी भूभाग से कच्चा तेल निकलना शुरू हुआ। बीते एक दशक की इस यात्रा में इसने न केवल क्षेत्र की किस्मत बदली, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा में भी बड़ा योगदान दिया। बाड़मेर के तेल क्षेत्रों में क्षेत्र के हिसाब से सबसे तेज़ ‘डिस्कवरी से प्रोडक्शन’ गतिविधियां हुईं और महज 5 वर्षों में कच्चे तेल का उत्पादन शुरू हो गया।”
2009 में मंगला तेल क्षेत्र से उत्पादन शुरू हुआ। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने केयर्न एनर्जी के संस्थापक सर बिल गैमेल की उपस्थिति में उत्पादन की प्रतीकात्मक शुरुआत के लिए वाल्व खोला।
कच्चे तेल की खोज ने स्थानीय उद्यमियों के लिए अनेक अवसर खोले। बाड़मेर में ‘रैग्स टू रिचेस’ (रंक से राजा) बनने की कई कहानियां हैं, जहां लगभग बिना पूंजी के शुरू करने वाले स्थानीय उद्यमियों ने सैकड़ों करोड़ रुपये के व्यवसाय खड़े किए। इस तेल के खेल में बाड़मेर के हज़ार से अधिक व्यक्ति करोड़पति बने होंगे।
‘ऐश्वर्या’ दूसरा सबसे बड़ा तेल क्षेत्र है, साथ ही ‘रागेश्वरी’ ‘कामेश्वरी’, भाग्यम,दुर्गा, सरस्वती आदि देवी-देवताओं के नाम पर तेल क्षेत्रों के नाम रखे गए। विज्ञान के साथ अध्यात्म और परंपराओं का भी ख्याल रखा गया।
पचपदरा में रिफाइनरी बनने तक नागाणा के पास स्थित मंगला टर्मिनल से तेल का उत्पादन कर पाइप लाइन के जरिये 750 किमी दूर गुजरात की जामनगर रिफाइनरी तक क्रूड को रिफाइन करने के लिए भेजा जाता है।
बताते है 2009 में 5 हजार बैरल शुरुआत कर अब 1.75 लाख बैरल तेल का उत्पादन बाड़मेर के मंगला टर्मिनल से हो रहा है।
प्रतिवर्ष करीब 4000 करोड़ का राजस्व राज्य सरकार को और 10 हजार करोड़ का राजस्व केंद्र सरकार को मिल रहा है। 2009 से अब तक इन खोज के जरिये 15 खरब रुपए राजस्व देश को मिल चुका है। अब तक बाड़मेर से करीब 70 करोड़ से अधिक बैरल क्रूड ऑयल का उत्पादन हो चुका है। तेल उत्पादन को लेकर अभी भी प्रतिदिन 10 करोड़ रुपए से अधिक राज्य सरकार और 30 करोड़ केंद्र सरकार को राजस्व पहुंच रहा है।
पाल साहब ने बीच में टोकते हुए कहा “40 करोड़ रोज। इतना राजस्व एक दिन का। फिर तो कमाई कितनी होती होगी।”
जय सिंह बोले ” तेल का यही तो खेल है। जहाँ तक हम सोच सकते है उससे भी बहुत ज्यादा पैसा है इस क्षेत्र में। यानी हम अंदाजा ही नहीं लगा सकते कि यहाँ कितनी संभावना है।”
जय सिंह आगे कहने लगे, “रिफाइनरी भी यहीं अपने पास कवास में लगने वाली थी। पर किसानों के साथ मुआवजों को लेकर बात नहीं बनी। धरना प्रदर्शन और आंदोलन हुए। आखिर सरकार ने तय किया कि अपनी ही जमीन पर रिफाइनरी लगाई जाए, जिससे विवाद की स्थिति कम हो। क्योंकि नागाणा में इस दौरान खूब झगड़े फसाद हुए थे। इसलिए रिफाइनरी फाइनली पचपदरा स्थिति सरकारी भूमि पर बनी। और मजेदारी देखो अब वो जिला ही अलग है। अब रिफाइनरी बालोतरा जिले में है। बालोतरा नया जिला बन गया है।”
जय सिंह ने आगे कहा, ”राजस्थान का बाड़मेर-सांचौर सब-बेसिन, जो 2004 में मंगला तेल खोज के बाद एक प्रमुख हाइड्रोकार्बन प्रांत बन गया, अब पचपदरा रिफाइनरी के साथ और मजबूत हो रहा है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और राजस्थान सरकार के जॉइंट वेंचर HPCL राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) द्वारा विकसित यह 9 MMTPA (मिलियन मेट्रिक टन प्रति वर्ष) क्षमता वाली रिफाइनरी-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स पचपदरा तहसील, बाड़मेर जिले में 4,800 एकड़ में फैली हुई है।”
नवंबर 2025 तक निर्माण 88% पूरा हो चुका है, और 2026 तक चालू होने की उम्मीद भी है। कहते है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आयेंगे उद्घाटन करने। यह स्थानीय क्रूड (मंगला, भाग्यम जैसे फील्ड्स से 1.5 MMTPA) के साथ-साथ आयातित अरब मिक्स क्रूड (7.5 MMTPA) संसाधित करेगी। कहते है कुल ₹52,000 करोड़ से अधिक निवेश हुआ है, जो 35,000 से ज्यादा नौकरियां पैदा कर चुका है।
कहते है रिफाइनरी सिर्फ एक औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदलने वाला मेगा प्रोजेक्ट बनकर उभर रहा है। रिफाइनरी से जुड़ी नई रेल लाइन को भी औद्योगिक विकास की रीढ़ माना जा रहा है, जो न सिर्फ लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाएगी। बल्कि रोजगार और निवेश के नए अवसर भी खोलेगी।”
पाल साहब बोले “यार आंकड़े तो बहुत बड़े है। विकास दिखता भी है। यहाँ के लोग अब कैसे है, पहले जैसे या वो भी बदल गए।”
जय सिंह कहने लगे, “बाड़मेर बदला तो लोग भी बदलने लगे। पैसा अपने साथ कुछ बुराइयां भी लेकर आता है। लोग अब दिल की जगह दिमाग से ज्यादा सोचने लगे है। पहले भले और भोले लोग होते थे, अब सब नफा नुकसान सोचकर व्यवहार करते है। संपन्नता तो आई है, सुख सुविधा खूब बढ़ी है। आप जब थे उस वक्त AC का नामो निशान नहीं था। अब हर घर में लगे है। होटल कहाँ थे, एक सेवा सदन और कैलाश सरोवर होटल होती थी। अब आप देख ही रहे हो। गाड़िया भी कहाँ थी, सड़के खाली होती थी। सभी प्रकार के वाहनों की बिक्री में चार गुना वृद्धि हुई है। उनके अधिकांश चार पहिया वाहन यहां काम करने वाली विभिन्न कंपनियों द्वारा किराए पर लिए जाते हैं। पर इसके साथ अपराध भी बढ़ा है। हत्या, लूट, मारपीट, अपहरण की घटनाएं सुनते ही रहते है।”
उन्होंने आगे कहा, ”एक और बात है पाल साहब कि कहानी का दूसरा पहलू न बताऊं तो नाइंसाफी होगी। रोज करीब 40 करोड़ का राजस्व देने के बाद भी बाड़मेर में मूलभूत सुविधाओं की भी कमी है। जिला अस्पताल में MRI, CT स्कैन जैसी सुविधा भी नहीं है। अच्छा ट्रॉमा सेंटर नहीं है। आज भी गंभीर मरीजों को जोधपुर रैफर कर दिया जाता है। न जाने कितनी मौतें रास्ते में ही होती हैं। न्यूरोलॉजी और कार्डियोलॉजी के अच्छे डॉक्टर नहीं है। खेलों के प्रोत्साहन को लेकर कोई प्रयास नहीं हुए है। उच्च शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को अब भी जयपुर, दिल्ली या कोटा जाना पड़ता है। पार्क अब भी एक वही है जहां आप टहलने जाते थे। रेल सुविधा भी बहुत कम है, जो रेलगाड़ियां चलती थी उन्हें भी कोरोना काल में बंद कर दिया गया या रूट बदल दिया गया। जैसे मालानी एक्सप्रेस और बाड़मेर कालका एक्सप्रेस। एयरपोर्ट अब तक बना नहीं है। ये तो शहर के हालात है, गांवों में स्थिति और भी बुरी है।”
पाल साहब कहने लगे, “ऐसा ही है तो फिर आपके नेता लोग क्या करते है। सोशल मीडिया पर तो खूब छाए रहते है।”
जय सिंह निराश होकर बोले, “नेता सारे ठेकदार बन गए है। अपनी सात पीढ़ी की व्यवस्था में लगे है। बाड़मेर की किसी को नहीं पड़ी है। CSR फंड के नाम पर कुछ पानी के प्याऊ खोलकर खानापूर्ति कर दी जाती है।”
पाल साहब बोले, “चलो है सो है। नेता सब जगह ऐसे ही है। अपने तो चले शादी की तैयारियां देखते है।”

