नई दिल्लीः कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार, 8 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि जवाहरलाल नेहरू ने सुभाष चंद्र बोस को पत्र लिखकर कहा था कि वंदे मातरम की उत्पत्ति मुसलमानों को भड़का सकती है।
प्रियंका गांधी ने कहा कि इससे पहले पीएम ने अपने भाषण के दौरान पत्र से चुनिंदा उद्धरण ही दिए थे। लोकसभा में अपने भाषण के दौरान प्रियंका ने 1937 में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू द्वारा सुभाष चंद्र बोस को लिखे गए पत्र का हवाला देते हुए कहा कि “वंदे मातरम के शेष छंदों पर तथाकथित आपत्ति सांप्रदायिकतावादियों द्वारा गढ़ी गई थी।” प्रियंका ने आगे कहा कि पीएम मोदी ने अपने भाषण में इस हिस्से का जिक्र तक नहीं किया।
पीएम मोदी ने संसद में क्या कहा?
इससे पहले पीएम मोदी ने सोमवार, 8 दिसंबर को दिए गए भाषण में नेहरू द्वारा सुभाष चंद्र बोस के पत्र का जिक्र करते हुए कहा था कि पहले प्रधानमंत्री ने वंदे मातरम पर मुहम्मद अली जिन्ना की भावनाओं को स्वीकार किया था। पीएम मोदी ने नेहरू के हवाले से कहा कि उन्होंने बोस को बताया था कि वंदे मातरम की पृष्ठभूमि मुसलमानों को भड़काने वाली हो सकती है।
पीएम मोदी ने संसद में कहा “20 अक्तूबर को, नेहरू ने बोस को सूचना देते हुए लिखा कि वह वंदे मातरम पर जिन्ना की भावनाओं से सहमत हैं। उन्होंने कहा कि इस गीत का आनंदमठ से जुड़ाव मुसलमानों को भड़का सकता है। नेहरू ने बोस को लिखा था ‘मैंने वंदे मातरम की पृष्ठभूमि पढ़ी है और मेरा मानना है कि यह संदर्भ मुसलमानों को भड़का सकता है।'”
प्रियंका गांधी वाड्रा ने यह भी कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर और संघ नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मौजूदगी वाली विधानसभा में सिर्फ दो श्लोकों को ही अपनाया गया था। प्रियंका ने सवाल किया “तब उन्होंने आपत्ति क्यों नहीं जताई?”
लोकसभा में भाषण के दौरान प्रियंका ने सरकार पर लगातार जवाहर लाल नेहरू के शासन पर सवाल करने पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार नेहरू द्वारा की गई “गलतियों” की लिस्ट बनाए और संसद में उन पर विस्तृत बहस के लिए समय तय करे।
वंदे मातरम पर ओम बिरला ने क्या कहा?
लोकसभा में उद्घाटन भाषण के दौरान स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि जब देश ‘वंदे मातरम’ की 150 साल की गौरवशाली यात्रा का स्मरण कर रहा है यह आज भी हर भारतीय के दिल में बसा है।
उन्होंने कहा कि इस गीत ने लाखों भारतीयों और अनगिनत नायकों में स्वतंत्रता देखने का साहस जगाया जबकि उन्हें यातनाएं और फांसी का सामना करना पड़ा।
गौरतलब है कि 1-19 दिसंबर तक संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। इस दौरान कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो रही है। वहीं, वंदे मातरम गीत के 150 साल पूरे होने पर पीएम मोदी ने विशेष चर्चा की शुरुआत की, जिस पर कई नेताओं ने अपना पक्ष रखा। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने पीएम मोदी के बाद पक्ष रखा। वहीं, सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी वंदे मातरम पर बोलते हुए कहा कि इस गीत ने देश को एक किया और आजादी की लड़ाई में जान डाली। लोकसभा में भाषण के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि वंदे मातरम सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं बल्कि पालन करने के लिए भी है।

