नई दिल्ली: भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को नया पता मिल गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (13 फरवरी) को नवनिर्मित ‘सेवा तीर्थ परिसर’ का उद्घाटन किया। यहा पीएमओ सहित कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय भी स्थित होंगे। संयोगवश, ठीक इसी दिन, 13 फरवरी 1931 को अंग्रेजों ने नई दिल्ली को औपनिवेशिक भारत की राजधानी घोषित किया था।
बहरहाल, अब तक ब्रिटिश कालीन ‘साउथ ब्लॉक’ में स्वतंत्रता के बाद से पीएमओ था और दशकों तक यह भारत की कार्यकारी शक्ति का केंद्र रहा। इस तरह करीब 78 साल बाद प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक से बाहर जा रहा है। पीएम मोदी ने शुक्रवार को कर्तव्य भवन 1 और 2 का भी अनावरण किया, जिनमें केंद्र सरकार के कुछ अन्य मंत्रालय मौजूद होंगे।
सामने आई जानकारी के अनुसार वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, कॉरपोरेट मामलों, शिक्षा, संस्कृति, विधि एवं न्याय, सूचना एवं प्रसारण, कृषि एवं किसान कल्याण, रसायन एवं उर्वरक एवं जनजातीय मामलों से संबंधित केंद्रीय मंत्रालय कर्तव्य भवन 1 और 2 में स्थानांतरित होंगे।
लगभग 1,200 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित ‘सेवा तीर्थ परिसर’ केंद्र सरकार की व्यापक सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का हिस्सा है। साल 2019 में शुरू की गई इस परियोजना का उद्देश्य भारत की कार्यपालिका, विधायिका और सार्वजनिक स्थलों का आधुनिकीकरण करना है। सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत, नए संसद भवन का उद्घाटन 2023 में किया गया था और कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट की पहली इमारत 2025 में खोली गई।
साउथ ब्लॉक से कैसे अलग है ‘सेवा तीर्थ’?
सेवा तीर्थ लाल और पीले बलुआ पत्थर से निर्मित खुली मंजिल वाली इमारत है। बताया गया है कि इसकी आधुनिक डिजाइन इसे भारतीय सभ्यता के तत्वों से भी जोड़ती है, जबकि दिल्ली के रायसीना हिल पर स्थित साउथ ब्लॉक की बलुआ पत्थर की दीवारें औपनिवेशिक वास्तुकला की छाप दर्शाती हैं।
हर्बर्ट बेकर द्वारा 1926-27 में डिजाइन किए गए नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को आधुनिक तकनीकी आवश्यकताओं से लैस करने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कई लिहाज से पुनर्निर्मित करना पड़ा।
दूसरी ओर अब स्वदेशी रूप से निर्मित ‘सेवा तीर्थ परिसर’ व्यापक आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों से सुसज्जित है। यह भूकंपरोधी बताया जाता है और इसे हर परिस्थिति में काम करते रहने के लिए डिजाइन किया गया है।
सेवा तीर्थ की एक महत्वपूर्ण विशेषता ‘इंडिया हाउस’ है, जो एक आधुनिक सम्मेलन स्थल है और यहाँ उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठकें, अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन और प्रेस वार्ता आयोजित की जा सकेंगी। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार साउथ ब्लॉक में ऐसा कोई समर्पित स्थान मौजूद नहीं था, जिसके चलते अलग-अलग जगहों पर व्यवस्थाएं करनी पड़ती थी।
सेवा तीर्थ एक में प्रधानमंत्री कार्यालय, सेवा तीर्थ दो में मंत्रिमंडल सचिवालय और सेवा तीर्थ तीन में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय भी होगा। पहले ये कार्यालय अलग-अलग स्थानों से संचालित होते थे, जिससे संवेदनशील मामलों पर समन्वय में लगने वाला समय अक्सर बढ़ जाता था।
नई तकनीक…आधुनिक सुविधाएं
दोनों भवन परिसरों (कर्तव्य भवन-1 और 2) में डिजिटल रूप से एकीकृत कार्यालय, सुव्यवस्थित सार्वजनिक संपर्क क्षेत्र और केंद्रीकृत स्वागत सुविधाएं मौजूद हैं। ये सुविधाएं सहयोग, दक्षता, सुचारू संचालन, नागरिकों की बेहतर भागीदारी और कर्मचारियों के कल्याण को बढ़ावा देंगी। इन परिसरों में नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियां, जल संरक्षण उपाय, अपशिष्ट प्रबंधन समाधान और उच्च-प्रदर्शन वाली भवन संरचनाएं शामिल हैं। ये उपाय परिचालन दक्षता बढ़ाते हुए पर्यावरणीय प्रभाव को काफी हद तक कम करते हैं।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार भवन परिसरों में व्यापक सुरक्षा व्यवस्थाएं भी शामिल हैं, जैसे स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम, निगरानी नेटवर्क और उन्नत आपातकालीन प्रतिक्रिया अवसंरचना, जो अधिकारियों और आगंतुकों के लिए एक सुरक्षित और सुलभ वातावरण सुनिश्चित करती हैं।
वहीं, खाली हो रहे साउथ और नॉर्थ ब्लॉक को ‘युग युगीन भारत संग्रहालय’ नाम से एक सार्वजनिक संग्रहालय में परिवर्तित कर दिया जाएगा। योजनाबद्ध तरीके से संग्रहालय के विकास में तकनीकी सहयोग के लिए फ्रांस की म्यूजियम डेवलपमेंट एजेंसी के साथ 19 दिसंबर, 2024 को एक भी समझौता किया गया था।
(IANS के इनपुट के साथ)

