वेरावल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर में भगवान शिव की आराधना की। मंदिर पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री ने ऐतिहासिक ‘शौर्य यात्रा’ में भाग लिया। इस दौरान एक अनूठा दृश्य तब देखने को मिला जब प्रधानमंत्री ने स्वयं डमरू बजाया और वहां मौजूद विशाल जनसमूह का अभिवादन स्वीकार किया।
पूजा-अर्चना से पहले प्रधानमंत्री ने भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल और वीर हमीरजी गोहिल की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। वीर हमीरजी गोहिल का सोमनाथ के इतिहास में विशेष महत्व है, जिन्होंने साल 1299 में जफर खान के आक्रमण के समय मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया था।

प्रधानमंत्री ने सोमनाथ को ‘शाश्वत दिव्यता का प्रतीक’ बताते हुए कहा कि इसकी पवित्र उपस्थिति सदियों से पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती आ रही है। प्रधानमंत्री ने शनिवार शाम आयोजित कार्यक्रमों की स्मृतियां साझा करते हुए बताया कि 1,000 सेकंड तक हुए सामूहिक ‘ओंकार नाद’ की ऊर्जा से उनका अंतर्मन स्पंदित है।
उन्होंने सोमनाथ मंदिर परिसर में हुए भव्य ड्रोन शो की भी सराहना की, जहां प्राचीन आस्था और आधुनिक तकनीक का मेल देखने को मिला। प्रधानमंत्री के अनुसार, सोमनाथ की पावन धरा से निकला यह प्रकाशपुंज पूरे विश्व को भारत की सांस्कृतिक शक्ति का संदेश दे रहा है।

8 से 11 जनवरी 2026 तक आयोजित होने वाला यह स्वाभिमान पर्व सोमनाथ मंदिर के उस गौरवशाली इतिहास को समर्पित है, जिसने सदियों के हमलों के बावजूद अपनी आध्यात्मिक पहचान को बचाए रखा। शौर्य यात्रा असल में उन पूर्वजों के साहस और त्याग का प्रतीक है जिन्होंने मंदिर के अस्तित्व की रक्षा की। इस यात्रा की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें गुजरात पुलिस की घुड़सवार इकाई के 108 घोड़ों ने भी भाग लिया।
सोमनाथ मंदिर का इतिहास विनाश और पुनरुद्धार की एक अनोखी गाथा है। 1026 में गजनवी के पहले हमले के बाद इसे कई बार नष्ट किया गया, लेकिन यह हर बार फिर से उठ खड़ा हुआ। आजादी के बाद 12 नवंबर 1947 को सरदार पटेल ने सोमनाथ के खंडहरों को देखकर इसके पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था, जिसे उन्होंने भारत के सांस्कृतिक आत्मविश्वास की बहाली के लिए जरूरी बताया था।

जन सहयोग से बने वर्तमान मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 11 मई 1951 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की मौजूदगी में हुई थी। साल 2026 इस ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा की 75वीं वर्षगांठ भी है। अरब सागर के तट पर 150 फीट ऊंचे शिखर के साथ खड़ा यह मंदिर आज केवल 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम ही नहीं, बल्कि भारत के राष्ट्रीय संकल्प और कभी न खत्म होने वाली श्रद्धा का जीवंत प्रतीक है।
सोमनाथ में आध्यात्मिक उपस्थिति के बाद प्रधानमंत्री का कार्यक्रम विकास की योजनाओं पर केंद्रित है। वे दोपहर में राजकोट के मारवाड़ी विश्वविद्यालय में कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र के लिए ‘वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन’ का उद्घाटन करेंगे और एक जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद शाम को वे अहमदाबाद पहुंचेंगे, जहाँ वे महात्मा मंदिर मेट्रो स्टेशन पर अहमदाबाद मेट्रो के दूसरे चरण के शेष हिस्से का उद्घाटन करेंगे।

