नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (16 फरवरी) को नई दिल्ली में इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने विभिन्न स्टॉलों का दौरा किया और एक्सपो में भाग लेने वाली कंपनियों से बातचीत की। इस समिट में कई देशों के ग्लोबल एआई लीडर्स ने हिस्सा लिया।
नई दिल्ली के भारत मंडपम में 16 से 20 फरवरी तक आयोजित होने वाले इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट और एक एक्सपो में नीति निर्माता, उद्योगपति और प्रौद्योगिकी नवप्रवर्तक एक साथ आएंगे। ऐसे समय में जब राष्ट्र अपने एआई एजेंडा को परिभाषित करने की होड़ में लगे हैं।
AI समिट में कई देश ले रहे हैं हिस्सा
एआई एक्सपो में 600 से अधिक उच्च क्षमता वाले स्टार्टअप और 13 देशों के पवेलियन शामिल हैं जो एआई इकोसिस्टम में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को प्रदर्शित करते हैं। एक्सपो वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों, स्टार्टअप्स, शिक्षाविदों और अनुसंधान संस्थानों, केंद्र और राज्य सरकारों और अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों को एक साथ लाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर, कई वैश्विक नेता एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लेने वाले हैं। इनमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा शामिल हैं। इन राष्ट्राध्यक्षों की उपस्थिति एआई एजेंडा के आसपास उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव और रुचि को रेखांकित करती है।
इस शिखर सम्मेलन में 45 से अधिक देशों के मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भाग लेंगे। संयुक्त राष्ट्र महासचिव और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी भी विचार-विमर्श में शामिल होंगे।
प्रधानमंत्री मोदी शिखर सम्मेलन को संबोधित करेंगे, एक्सपो का दौरा करेंगे और सीईओ के साथ गहन बातचीत करेंगे। इस आयोजन पर वैश्विक स्तर पर बारीकी से नजर रखी जाएगी क्योंकि प्रौद्योगिकी जगत की कहानी को आकार देने वाले कुछ सबसे बड़े नाम इसमें शामिल होने वाले हैं।
क्या हैं इस समिट की खास बातें?
समिट की खास बात तीन प्रमुख ग्लोबल इम्पैक्ट चैलेंज – एआई फॉर ऑल, एआई बाय हर और युवाई हैं। इन प्रतियोगिताओं के फाइनलिस्ट की घोषणा और ग्रैंड फिनाले प्रस्तुति इसी समिट में होगी। इनका उद्देश्य ऐसी एआई तकनीकों को बढ़ावा देना है जो समावेशी, जिम्मेदार और विकासोन्मुख हों। इन चुनौतियों में 60 से अधिक देशों से 4,650 से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए, जो भारत की वैश्विक स्तर पर एआई क्षेत्र में बढ़ती पहचान को दर्शाता है।
विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की बहु-स्तरीय जांच प्रक्रिया के बाद तीनों श्रेणियों में कुल 70 टीमों को फाइनलिस्ट चुना गया है। ये टीमें 16 और 17 फरवरी को भारत मंडपम और सुषमा स्वराज भवन में अपने समाधान प्रस्तुत करेंगी। उन्हें नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, निवेशकों और शिक्षाविदों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
18 फरवरी को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी हैदराबाद के सहयोग से ‘एआई और उसका प्रभाव’ विषय पर रिसर्च संगोष्ठी आयोजित की जाएगी, जिसके लिए अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका से लगभग 250 शोध पत्र प्राप्त हुए हैं। इसमें एस्टोनिया के राष्ट्रपति एलर कॅरीस और केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव भी शामिल होंगे।
(समाचार एजेंसी आईएएनएस से इनपुट्स के साथ।)

