नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (29 मार्च) को मासिक संबोधन ‘मन की बात’ दिया। इस दौरान उन्होंने खाड़ी देशों में जारी संघर्षों के बीच वहां रह रहे एक करोड़ से अधिक भारतीयों को समर्थन देने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने नागरिकों से एकजुट और सतर्क रहने का आग्रह किया और संकट के बारे में अफवाहों और राजनीतिकरण से बचने की चेतावनी दी।
कार्यक्रम के संबोधन के दौरान उन्होंने वैश्विक स्तर पर व्याप्त चुनौतियों को रेखांकित करते हुए कहा कि “यह निःसंदेह एक चुनौतीपूर्ण समय है।
नागरिकों से एकजुट रहने की अपील
आज के ‘मन की बात’ के माध्यम से मैं अपने सभी देशवासियों से एक बार फिर आग्रह करता हूं कि इस चुनौती से पार पाने के लिए हमें एकजुट होना चाहिए।”
उन्होंने भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए संघर्षग्रस्त क्षेत्र के रणनीतिक महत्व की ओर इशारा करते हुए कहा कि व्यवधानों ने विश्व स्तर पर पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति को प्रभावित किया है।
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हालांकि, इस दौरान उन्होंने संकट का राजनीतिकरण करने के प्रयासों की आलोचना करते हुए कहा “यह 140 करोड़ देशवासियों के हितों से जुड़ा मामला है और इसमें स्वार्थपूर्ण राजनीति का कोई स्थान नहीं है।” उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे केवल सरकारी जानकारी पर ही भरोसा करें और गलत सूचनाओं से बचें।
पीएम मोदी ने कोविड का किया फिर एक बार जिक्र
उन्होंने हाल ही में वैश्विक स्तर पर उत्पन्न कठिनाइयों पर विचार करते हुए कहा, “हम सभी को याद है कि कोविड के कारण पूरी दुनिया को लंबे समय तक अनगिनत समस्याओं का सामना करना पड़ा। वास्तव में, हम सभी ने उम्मीद की थी कि कोरोना संकट से उबरने के बाद दुनिया नए सिरे से प्रगति के पथ पर आगे बढ़ेगी। हालांकि, दुनिया के विभिन्न हिस्सों में लगातार युद्ध और संघर्ष की स्थितियां उत्पन्न होती रही हैं।”
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कार्यक्रम संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने वैश्विक मामलों के अलावा भारत में समुदाय आधारित पहलों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने वर्षा जल संचयन, तालाबों का जीर्णोद्धार और जलभंडारण के प्रयासों की सराहना की और नागा समुदाय द्वारा मोरंग प्रणाली के माध्यम से परंपरा और आधुनिक शिक्षा के मिश्रण का उल्लेख किया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों, व्यक्तिगत योगदान और खेल, विज्ञान और सामाजिक कार्य में राष्ट्रीय उपलब्धियों को भी सराहा।

