नई दिल्लीः संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले ही दिन पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध को लेकर दोनों सदनों में जोरदार हंगामा देखने को मिला। विदेश मंत्री एस जयशंकर के वक्तव्य के दौरान विपक्षी दलों ने नारेबाजी की, जबकि सरकार ने विपक्ष पर गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार का आरोप लगाया।
सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे समेत विपक्षी सांसद संसद के मकर द्वार पर इकट्ठा हुए। एक बड़ा बैनर पकड़े हुए विपक्षी सदस्यों ने पश्चिम एशिया संघर्ष के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किया।
कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “खाड़ी के देश जल रहे हैं, भारतीय फंसे हुए हैं और केंद्र सरकार चुप है।” पार्टी ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “आज भारत को ऐसे लीडरशिप की जरूरत है, जो देश के हितों की रक्षा कर सके। केंद्र सरकार का डर देश को नुकसान पहुंचा रहा है।”

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “जब संसद के बजट सेशन का अंतराल हुआ था तब विषय अलग थे और आज के युद्धकालीन हालातों की वजह से संकट के इस माहौल में हमारी प्राथमिकता युद्ध के संदर्भ में देश का पक्ष व राय और विदेश नीति के गिरवी रखने का विषय होनी चाहिए।”
उन्होंने आगे लिखा, “तेल जैसी आपूर्ति पर आत्मनिर्णय की जगह अमेरिकी आदेश का आना, हमारी संप्रभुता और आत्मनिर्भरता का प्रश्न, युद्ध से प्रभावित क्षेत्रों में फंसे वहां कार्यरत भारतीय या पर्यटक बनकर गए भारत के नागरिकों की सुरक्षा व उन्हें सकुशल भारत लाने का सवाल भी प्राथमिकता का विषय होना चाहिए। इन प्राथमिकताओं में युद्ध शुरू होने के कारण भारत न लौट पाए पत्रकारों व मीडियाकर्मियों को सुरक्षित देश वापस लाने का प्रश्न और युद्ध के कारण जरूरी आपूर्ति को नियमित व सुनिश्चित करने के साथ ही उनके बढ़ते दामों को नियंत्रित करने का विषय भी होना चाहिए।”
जयशंकर के बयान पर लोकसभा-राज्यसभा में हंगामा
लोकसभा में जब जयशंकर पश्चिम एशिया में अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते संघर्ष तथा उससे भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर जानकारी दे रहे थे, उसी दौरान कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया। नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई और लोकसभा को कुछ समय के लिए स्थगित करना पड़ा।
वहीं राज्यसभा में भी इसी मुद्दे पर भारी हंगामा हुआ। जयशंकर जब पश्चिम एशिया की स्थिति और भारत सरकार की रणनीति पर बयान दे रहे थे, तब कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि विदेश मंत्री ने स्वतः बयान तो दिया, लेकिन उसके बाद सवाल पूछने या स्पष्टीकरण मांगने की अनुमति नहीं दी गई। इसी के विरोध में विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट किया।
जयशंकर ने क्या कहा?
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा में कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के बीच भारतीय उपभोक्ताओं के हित सरकार की “सर्वोच्च प्राथमिकता” बने रहेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि क्षेत्र में जारी तनाव के कारण वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर गंभीर असर पड़ सकता है।
नारेबाजी के बीच अपने बयान में उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति और गंभीर हुई है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री शिपिंग मार्गों और वैश्विक व्यापार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि सरकार हालात पर लगातार नजर रखे हुए है और भारत की अर्थव्यवस्था तथा आपूर्ति शृंखलाओं पर इसके संभावित प्रभाव का आकलन किया जा रहा है।
जयशंकर ने कहा, “हमारी सरकार ने 20 फरवरी को एक बयान जारी कर गहरी चिंता व्यक्त की थी और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी। हम अब भी मानते हैं कि तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति ही सबसे बेहतर रास्ता है।”
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में स्थिरता भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत की आर्थिक जरूरतों से सीधे जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि सरकार क्षेत्र के घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रही है और साझेदार देशों के संपर्क में है।
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि क्षेत्र में रहने और काम करने वाले भारतीयों की सुरक्षा सरकार की प्रमुख चिंता है। बढ़ते तनाव के बीच अब तक करीब 67 हजार भारतीय नागरिक उस क्षेत्र से वापस भारत लौट चुके हैं।
जयशंकर ने ईरान के युद्धपोत आईआरआईएस लवन को कोच्चि बंदरगाह पर शरण देने के भारत के फैसले का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ईरान ने अपने तीन जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर आने की अनुमति मांगी थी। इसके बाद 1 मार्च को अनुमति दी गई और 4 मार्च को यह पोत कोच्चि बंदरगाह पहुंचा। जहाज पर 183 चालक दल के सदस्य थे, जिनमें अधिकतर युवा कैडेट शामिल थे और जहाज में तकनीकी समस्या की सूचना दी गई थी। उन्होंने कहा कि यह फैसला मानवीय आधार पर लिया गया था और इसे सही कदम बताते हुए भारत लगातार संयम और कूटनीतिक समाधान की वकालत करता रहेगा।
सरकार का विपक्ष पर हमला
लोकसभा में हंगामे के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष पूरी तरह भ्रम की स्थिति में है और उसे खुद नहीं पता कि वह क्या करना चाहता है।
रिजिजू ने कहा कि जिस मुद्दे को विपक्ष उठा रहा है, उस पर विदेश मंत्री पहले ही सदन में विस्तार से जवाब दे चुके हैं, लेकिन विपक्ष को जवाब सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने कहा, “मैंने कभी इतनी गैर-जिम्मेदार पार्टी नहीं देखी। संसद में नियम और संविधान हैं, लेकिन विपक्ष के लोग इन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।”
उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से कहा कि वे अपनी अंतरात्मा से पूछें कि उनके व्यवहार से संसद की गरिमा को कितना नुकसान पहुंच रहा है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है और यदि विपक्ष में हिम्मत है तो वह सदन में बहस शुरू करे।
रिजिजू ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि बजट सत्र की शुरुआत ही स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव से होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके मुताबिक कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को कम करने की कोशिश कर रही है और इस कदम पर उसे बाद में पछताना पड़ सकता है।
नड्डा का भी विपक्ष पर निशाना
राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा ने भी विपक्ष के रवैये की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि विपक्ष का व्यवहार बेहद गैर-जिम्मेदाराना है और ऐसा लगता है कि उसे देश के हितों या गंभीर चर्चा में कोई रुचि नहीं है।
नड्डा ने कहा कि विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया की स्थिति, ऊर्जा सुरक्षा और वहां मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर विस्तार से जानकारी दी है, लेकिन विपक्ष ने चर्चा में भाग लेने के बजाय हंगामा करना चुना।
उन्होंने कहा कि विपक्ष का इतिहास भी यही रहा है कि जब गंभीर मुद्दों पर चर्चा होती है तो वह बहस में हिस्सा लेने के बजाय सदन से वॉकआउट कर देता है। सरकार देश के हितों को ध्यान में रखते हुए हर स्थिति पर नजर रख रही है और आवश्यक कदम उठा रही है।

