रायपुर: छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त करने की दिशा में सरकार को एक बड़ी सफलता मंगलवार को मिली। बस्तर क्षेत्र में सक्रिय रहे अंतिम प्रमुख टॉप नक्सल कैडर पापा राव उर्फ मंगू ने अपने हथियारबंद समूह के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। पापा राव का सरेंडर सरकार द्वारा बस्तर सहित छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त घोषित करने की तय गई 31 मार्च की डेडलाइन से ठीक पहले हुआ है।
पापा राव की पत्नी उर्मिला उन छह माओवादियों में शामिल थीं, जो नवंबर 2025 में छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाकर्मियों के साथ मुठभेड़ में मारे गए थे। उर्मिला नक्सल के लिए लॉजिस्टिक सप्लाई का कामकाज देखती थी। पापा राव की उम्र 56 साल है। स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ 1997 में नक्सली गतिविधियों में शामिल पापा राव पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। माना जाता है कि वह कई बड़े नक्सली हमलों को अंजाम देने की साजिशों में शामिल था।
बीजापुर के पुलिस स्टेशन में सरेंडर
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार सुकमा जिले का रहने वाला और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसीएम) का सीनियर सदस्य पापा राव मंगलवार को एक एके-47 और कुछ दूसरे हथियार लेकर बीजापुर जिले के कुतरू पुलिस स्टेशन पहुंचा। पापा राव के 17 साथी भी साथ थे। इनमें 10 पुरुष और 8 महिलाएं शामिल थीं। इन्हें सरेंडर के बस से जगदलपुर ले जाया गया। सुरक्षा बलों ने इस ग्रुप से आठ एके-47 राइफलें, एक एसएलआर और एक आईएनएसएएस राइफल बरामद की है।
पापा राव को पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की बटालियन नंबर 1 के पूर्व कमांडर माडवी हिडमा के मारे जाने के बाद बस्तर का सबसे ज्यादा वांटेड नक्सली माना जाता था।
राव के खिलाफ करीब 45 मामले दर्ज हैं, जिनमें 2010 में ताडमेटला में हुए सबसे बड़े नक्सली हमले से संबंधित मामला भी शामिल है। उस घटना में घात लगाकर किए गए नक्सली हमले में 76 जवानों की जान चली गई थी। राव जनवरी 2025 में बीजापुर के अंबेली में हुए नक्सलियों के आखिरी बड़े हमले में भी शामिल था, जिसमें आठ सुरक्षाकर्मी और एक नागरिक ड्राइवर मारे गए थे।
‘छत्तीसगढ़ में अब कोई नक्सली सक्रिय नहीं’
छत्तीसगढ़ सरकार ने पापा राव के सरेंडर को बस्तर से ‘सशस्त्र नक्सलवाद का पूरी तरह से खात्मा’ बताया है। राज्य के गृह मंत्री और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि इसके साथ ही दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी में अब कोई भी सक्रिय सदस्य नहीं बचा है। विजय शर्मा ने ये भी बताया कि आत्मसमर्पण से ठीक पहले उन्होंने पापा राव से मोबाइल फोन पर बात की थी। मंत्री ने कहा कि राज्य के बाहर अब सिर्फ दो सबसे बड़े नक्सली नेता, मिशिर बेसरा और गणपति ही सक्रिय हैं, जो संगठन के बचे-खुचे हिस्से को चला रहे हैं।
दूसरी ओर अधिकारियों ने इस घटना को नक्सली संगठन की पश्चिम बस्तर डिवीजनल कमेटी का लगभग पूरी तरह से खात्मा बताया है। बटालियन नंबर 1 के कमांडर देवा के सरेंडर और पिछले साल मुठभेड़ों में 17 बड़े नेताओं के मारे जाने के बाद पापा राव ही आखिरी फ्रंटलाइन लड़ाके बचे थे। बता दें कि पिछले साल मारे गए 17 बड़े नक्सली नेताओं में माडवी हिडमा, महासचिव बसवराजू और गणेश उइके जैसे शामिल हैं।
गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सल समस्या से मुक्ति के लिए 31 मार्च, 2026 की समयसीमा तय की थी। यह ताजा आत्मसमर्पण उस तारीख से करीब एक हफ्ते पहले हुआ है। इससे पहले बस्तर दशकों से नक्सली गतिविधियों का केंद्र रहा है।
इस क्षेत्र के घने जंगलों और दुर्गम भूभाग की वजह से नक्सलियों से निपटना दशकों से सुरक्षाकर्मियों के लिए भी चुनौती बनी रही है। हालांकि, पिछले दो वर्षों में सुरक्षाबलों ने लक्षित अभियानों और आत्मसमर्पण कराने जैसी पहलों को बढ़ावा देकर नक्सली बुनियादी ढांचे को काफी हद तक कमजोर कर दिया है।
(समाचार एजेंसी IANS के इनपुट के साथ)
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