नई दिल्ली: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के ऑपरेशन सिंदूर और फिर छिड़े संघर्ष को रोकने के लिए पाकिस्तान ने अमेरिका में एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। इसका खुलासा हाल ही में सामने आई अमेरिकी सरकारी फाइलों से हुआ है। इससे पता चलता है कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने वॉशिंगटन में जबरदस्त लॉबिंग की थी। इन दस्तावेजों से पता चलता है कि मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के मिलिट्री जवाब को रोकने के लिए इस्लामाबाद ने वॉशिंगटन पर कितना कूटनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की थी।
NDTV की एक रिपोर्ट के अनुसार दस्तावेजों से पता चलता है कि पाकिस्तानी राजनयिकों और रक्षा अधिकारियों ने अप्रैल 2025 में जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने और सीजफायर पूरी तरह लागू होने के बीच अमेरिकी प्रशासन के बड़े अधिकारियों, सांसदों और प्रभावशाली मीडिया आउटलेट्स के साथ 50 से ज्यादा बैठकें की थीं।
60 से ज्यादा अधिकारियों और बिचौलियों से बैठक
अमेरिकी फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के तहत फाइल किए गए रिकॉर्ड से पता चलता है कि अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत और उसके डिफेंस अटैचे ने 60 से ज्यादा अधिकारियों और बिचौलियों से ईमेल, फोन कॉल और आमने-सामने की मुलाकातों के जरिए बार-बार संपर्क किया। इसका मकसद वॉशिंगटन पर दखल देने का दबाव डालना और जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत के सैन्य अभियान को ‘किसी भी तरह रोकना’ था।
पाकिस्तान का यह संपर्क कांग्रेस (अमेरिकी संसद), पेंटागन, विदेश विभाग और जाने-माने अमेरिकी पत्रकारों तक फैला हुआ था। पाकिस्तानी प्रतिनिधियों ने कश्मीर, क्षेत्रीय सुरक्षा, दुर्लभ खनिज और व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की, साथ ही प्रमुख अमेरिकी मीडिया संगठनों के साथ इंटरव्यू और बैकग्राउंड ब्रीफिंग की भी मांग की।
नवंबर 2025 में अमेरिकी अखबार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने रिपोर्ट किया था कि पाकिस्तान ने ट्रंप प्रशासन तक जल्दी पहुँच बनाने और व्यापार और डिप्लोमेटिक मामलों में अपने पक्ष में नतीजे हासिल करने के लिए छह वॉशिंगटन लॉबिंग फर्मों के साथ सालाना लगभग 50 लाख डॉलर (45 करोड़ रुपये) के करार भी किए थे।
गौरतलब है कि इस्लामाबाद द्वारा जेवलिन एडवाइजर्स के जरिए सेडेन लॉ एलएलपी के साथ डील करने के कुछ हफ्ते बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर की मेजबानी की थी। इस बैठक को बड़े पैमाने पर पाकिस्तान की अमेरिकी सत्ता के उच्चतम स्तर तक दोबारा पहुँच के प्रतीक के तौर पर देखा गया।
अप्रैल-मई में लॉबिंग में भारत से तीन गुना ज्यादा खर्च
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार पाकिस्तान ने अप्रैल और मई में लॉबिंग पर अपना खर्च नाटकीय रूप से बढ़ा दिया था, और उसी अवधि के दौरान उसने भारत की तुलना में कम से कम तीन गुना ज्यादा खर्च किया।
अखबार ने इसके परिणामस्वरूप नीतियों में हुए फेरबदल को पहले से तनावपूर्ण अमेरिकी-पाकिस्तान संबंधों में एक बड़ा बदलाव बताया। इसमें राष्ट्रपति ट्रंप की सार्वजनिक रूप से तारीफ, नोबेल शांति पुरस्कार के लिए उनके नाम का नॉमिनेशन, और फायदेमंद बिजनेस और व्यापार रियायतों की कोशिश शामिल थी।
कई राजनयिक सूत्रों ने कहा कि 2025 FARA फाइलिंग एक बड़े पैटर्न की पुष्टि करती हैं। इसके अनुसार पाकिस्तान ने कैपिटल हिल और अमेरिकी मीडिया इकोसिस्टम में अपनी लॉबिंग का दायरा बढ़ाया है, जिसमें कुछ व्यक्तिगत कॉन्ट्रैक्ट और प्रयासों पर लाखों डॉलर खर्च हुए।
हालांकि साल के आखिर में ये खर्च कम हो गया, लेकिन ये दस्तावेज साफ तौर पर ऐसे देश की तस्वीर पेश कर रहे हैं जो भारी सैन्य और राजनयिक दबाव में था। साथ ही उसने भारत की युद्ध के मैदान में बढ़ती ताकत को रोकने की उम्मीद में तुरंत वाशिंगटन का रुख किया।

