पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ आम तौर पर बहुत कड़वी भाषा और नाटकीयता का सहारा कम ही लेते नजर आए है। आमतौर पर उनका दृष्टिकोण संतुलित रहता है, लेकिन शनिवार को वे भी उस प्रलोभन से बच नहीं पाए जो अधिकांश पाकिस्तानी राजनेताओं को आकर्षित करता है। यह है- भारत के बारे में अपशब्द बोलना, उग्र भाषा का प्रयोग करना और संदर्भ से हटकर बातें करना।
सुचेतगढ़ बॉर्डर से 11 किलोमीटर और जम्मू से 38 किलोमीटर दूर स्थित सियालकोट में बोलते हुए उन्होंने धमकी दी कि इस बार पाकिस्तान कोलकाता को निशाना बनाएगा। दिलचस्प बात ये है कि भारत का यह पूर्वी शहर पाकिस्तानी राजधानी इस्लामाबाद से लगभग 2,000 किलोमीटर और उस स्थान से लगभग 1,750 किलोमीटर दूर स्थित है जहाँ से उन्होंने यह बयान दिया। आसिफ का यह बयान उस समय आया है जब पिछले साल 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी के अब केवल तीन सप्ताह ही रह गए हैं।
ऐसा लगता है कि जैसे-जैसे ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरा होने के दिन करीब आ रहे हैं, हमारे पश्चिमी पड़ोसी को बुरे सपने आने लगे हैं।
शायद जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश से निकटता की वजह से आसिफ के मन में ऐसे विचार आए। पिछले साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने जम्मू क्षेत्र में 180 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) पर स्थित शहरों और कस्बों को निशाना बनाने की कोशिश की थी। हालांकि, पाकिस्तानी ड्रोन और तोप के गोलों को भारतीय सेना ने नाकाम कर दिए थे। इससे पाकिस्तानी हताश हो गए थे, क्योंकि भारतीय बमों के हमले में उनके खुद के कई ठिकाने आग की लपटों में घिर गए थे।
पाकिस्तान से पहले भी आती रही है गीदड़भभकी
दिल्ली में कुछ साल बिता चुके पूर्व पाकिस्तानी राजनयिक अब्दुल बासित ने लगभग दो हफ्ते पहले ही दिल्ली और मुंबई के बारे में इसी तरह की टिप्पणी की थी। बासित ने बिना किसी आधार के कहा था कि अगर पाकिस्तान पर हमला हुआ तो वह इन भारतीय शहरों पर हमला करने में जरा भी नहीं हिचकिचाएगा। यह अलग बात है कि बाद में उन्होंने यह साबित करने की कोशिश की कि ऐसी स्थिति की संभावना बहुत कम है!
दूसरी ओर ख्वाजा आसिफ ने दावा किया कि भविष्य में होने वाला कोई भी संघर्ष बॉर्डर के पास (मई 2025 के संघर्ष की तरह 200-250 किलोमीटर के दायरे में) सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दूर-दराज के इलाकों तक भी फैलेगा। सियालकोट में पत्रकारों से बात करते हुए आसिफ ने कहा, ‘अगर भारत इस बार कोई झूठा ऑपरेशन चलाने की कोशिश करता है, तो इंशाल्लाह, हम इसे कोलकाता तक ले जाएंगे।’
उन्होंने दावा किया कि ऐसे संकेत थे कि भारत में उनके अपने ही लोग या हिरासत में लिए गए पाकिस्तानी नागरिक झूठे प्लॉट शामिल हो सकते हैं। वे शायद यह कहना चाह रहे थे कि शवों को कहीं (भारत में) रखा जा सकता है और (भारत द्वारा) यह दावा किया जा सकता है कि यह आतंकवाद का कृत्य था (पाकिस्तान के इशारे पर किया गया)। हालांकि, उन्होंने अपने आरोपों को लेकर कोई सबूत पेश नहीं किया। आसिफ ने कहा, ‘घर में घुस कर मारेंगे।’
ये टिप्पणियां पाकिस्तान की उन पहले की चेतावनियों से मिलती-जुलती हैं जिनमें संघर्ष के भारत में सुदूर पूर्व तक फैलाने की बात कही गई थी। आसिफ की टिप्पणियां वैसे उनके भारतीय समकक्ष राजनाथ सिंह के उस बयान का जवाब भी प्रतीत होती हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान की किसी भी ‘दुस्साहस’ का ‘अभूतपूर्व और निर्णायक’ जवाब दिया जाएगा।
केरलम में बोलते हुए राजनाथ सिंह ने अप्रैल 2025 में बैसरन (पहलगाम) में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की प्रतिक्रिया का जिक्र किया था, जिसमें दो दर्जन हिंदुओं के अलावा एक स्थानीय कश्मीरी मुस्लिम की भी हत्या कर दी गई थी। उन्होंने कहा, ‘मैं आपको बताना चाहता हूं कि ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है। अगर पाकिस्तान द्वारा ऐसी घिनौनी हरकतें दोहराई गईं, तो हमारी सेनाएं उन्हें मुंहतोड़ जवाब देंगी जिसे वे कभी नहीं भूलेंगे।’
हवा-हवाई बयानों में माहिर पाकिस्तानी नेता और अधिकारी
दो सप्ताह पहले अब्दुल बासित की भारतीय शहरों को निशाना बनाने की हवा-हवाई वाली विवादास्पद टिप्पणियों ने रक्षा प्रतिष्ठान में हलचल मचा दी थी। बासित ने एक चर्चा के दौरान कहा था, ‘अगर अमेरिका पाकिस्तान पर हमला करता है, तो हमें बिना किसी हिचकिचाहट के भारत, मुंबई, नई दिल्ली पर हमला करना होगा। हम इसे नहीं छोड़ेंगे, बाद में देखेंगे कि क्या होता है।’
यदि हम पाकिस्तान के इतिहास को ध्यान में रखें, तो ख्वाजा आसिफ (और इससे पहले बासित) द्वारा किए गए ऐसी बेतुके कमेंट कोई नई बात नहीं हैं। एक समय, पाकिस्तान के पूर्व मंत्री शेख राशिद अहमद ने दावा किया था कि पाकिस्तान के पास युद्धक्षेत्र में इस्तेमाल के लिए डिजाइन किए गए 250 ग्राम जितने हल्के ‘सामरिक परमाणु हथियार’ हैं। जबकि अमेरिका समेत दुनिया की विभिन्न सेनाओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले अधिकांश हथगोले भी आमतौर पर लगभग 400 ग्राम के होते हैं!
उन्होंने दावा किया था कि ये छोटे परमाणु उपकरण युद्धक्षेत्र में भारतीयों के खिलाफ इस्तेमाल के लिए हैं। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार सबसे हल्के काम कर रहे परमाणु हथियारों का वजन भी 10 से 15 किलोग्राम के बीच होगा। सबसे छोटा परमाणु बम अमेरिका ने बनाया था और इसका वजन लगभग 23 किलोग्राम था, जो शेख राशिद के ‘सामरिक परमाणु हथियार’ से 90 गुना से भी अधिक भारी है!
रशीद द्वारा पाकिस्तान के जिस कथित ‘हथगोले के आकार’ वाले परमाणु हथियारों का दावा किया गया, उसका जिक्र फिर बाद में कभी नहीं हुआ। वैसे भी, इस बात का कोई विश्वसनीय प्रमाण नहीं है कि दुनिया में कहीं भी परमाणु हथियारों को इतने छोटे आकार में विकसित किया गया है।
एक और तुलना के लिए यह याद रखना भी जरूरी होगा कि 1945 में अमेरिका द्वारा जापान के हिरोशिमा शहर पर इस्तेमाल किए गए ‘लिटिल बॉय’ नाम के बम का वजन लगभग 4,400 किलोग्राम था। ऐसे में, पाकिस्तान के पास मौजूद छोटे परमाणु हथियारों के बारे में रशीद के दावे महज एक कोरी कल्पना और मनगढ़ंत कहानी लगते हैं, और कुछ नहीं।
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