Friday, March 20, 2026
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ऑपरेशन सिंदूर पर पाकिस्तान का बड़ा कबूलनामा, विदेश मंत्री ने मानी सैन्य तबाही की बात; राष्ट्रपति बोले- मुझे बंकर में छिपने को कहा गया था

भारत ने अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले (जिसमें 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे) का प्रतिशोध लेने के लिए 6-7 मई की रात को यह ऑपरेशन शुरू किया था। इस सैन्य कार्रवाई के दौरान भारतीय सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान के भीतर स्थित 9 प्रमुख आतंकी ठिकानों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया था।

अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले (26 नागरिकों की मौत) के प्रतिशोध में भारत द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान के भीतर किस कदर तबाही मचाई थी, इसका सच अब खुद पाकिस्तानी हुकूमत की जुबान पर आ गया है। साल के अंत में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने स्वीकार किया कि भारत ने रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस को निशाना बनाया और वहां के सैन्य प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान पहुंचाया।

इशाक डार ने कहा कि 10 मई की सुबह भारत ने रावलपिंडी के चकलाला स्थित प्रमुख एयरबेस पर हमला किया था। डार के अनुसार, भारत ने 36 घंटों के भीतर कम से कम 80 ड्रोन भेजे। उन्होंने दावा किया कि 79 ड्रोन इंटरसेप्ट किए गए, लेकिन एक ड्रोन बच गया जिसने सैन्य प्रतिष्ठान को तबाह कर दिया और कई सैन्यकर्मी घायल हुए।

हालांकि, भारत और स्वतंत्र सैटेलाइट इमेजों (मैक्सार) ने पुष्टि की है कि केवल एक नहीं, बल्कि पाकिस्तान के 11 एयरबेस (सर्गोधा, रफिकी, जैकबाबाद, मुरीदके आदि) इस हमले की चपेट में आए थे। डार ने यह भी कहा कि 9 मई की रात प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अगुवाई में पाकिस्तान की नागरिक और सैन्य नेतृत्व की बैठक हुई, जिसमें हालात को देखते हुए कुछ फैसलों को मंजूरी दी गई। उन्होंने 10 मई की तड़के नूर खान एयरबेस पर हमले को भारत की गलती करार दिया।

नूर खान एयरबेस पाकिस्तान वायुसेना का एक अहम ठिकाना है और यह उन 11 एयरबेस में शामिल था, जिन्हें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने निशाना बनाया। इन ठिकानों में सरगोधा, रफीकी, जैकोबाबाद और मुरिदके जैसे एयरबेस भी शामिल थे। पाकिस्तान की इस स्वीकारोक्ति को भारत की उस रणनीतिक कार्रवाई की पुष्टि के तौर पर देखा जा रहा है, जिसके तहत पहले पाकिस्तान और पीओके में मौजूद नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए गए थे।

भारतीय सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने इशाक डार के मामूली नुकसान वाले दावे को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए खुलासा किया कि खुद पाकिस्तान की मीडिया (Samaa TV) ने 14 अगस्त को 138 ऐसे सैन्यकर्मियों की सूची जारी की जिन्हें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय कार्रवाई में मारे जाने के बाद मरणोपरांत वीरता पुरस्कार दिए गए।

जनरल ढिल्लों के अनुसार, “अगर 138 लोगों को मरणोपरांत पुरस्कार मिला है, तो इसका मतलब है कि कम से कम 400 से 500 पाकिस्तानी सैनिक इस ऑपरेशन में मारे गए थे।” मैक्सार की सैटेलाइट तस्वीरों ने भी नूर खान, भोलारी और शाहबाज एयरबेस पर व्यापक तबाही की पुष्टि की है।

इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी यह स्वीकार कर चुके हैं कि 9 और 10 मई की रात सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने उन्हें नूर खान एयरबेस पर हमले की जानकारी दी थी। जुलाई में उनके सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने यह भी माना था कि भारत की ओर से दागी गई ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर पाकिस्तान के पास यह तय करने के लिए महज 30 से 45 सेकंड थे कि उसमें परमाणु वारहेड है या नहीं।

राष्ट्रपति जरदारी को मिली थी बंकर में छिपने की सलाह

ऑपरेशन सिंदूर की गंभीरता का अंदाजा पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के हालिया बयान से भी मिलता है। जरदारी ने अपनी पत्नी और पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की पुण्यतिथि पर आयोजित एक रैली में स्वीकार किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दहशत का माहौल ऐसा था कि उनके मिलिट्री सेक्रेटरी ने उन्हें सुरक्षा के लिए बंकर में छिपने की सलाह दी थी। जरदारी ने कहा, मुझसे कहा गया कि बंकर में चले जाइए, लेकिन मैंने मना कर दिया। नेता बंकरों में नहीं, मैदान-ए-जंग में मरते हैं।

रैली को संबोधित करते हुए जरदारी ने कहा, “अगर शहादत आनी है, तो वह यहीं आएगी। नेता बंकरों में छिपकर नहीं मरते, वे युद्ध के मैदान में मरते हैं। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के कार्यकर्ता देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने को तैयार हैं।”

पीएम शरीफ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने स्वीकार किया कि जब भारत ने ब्रह्मोस मिसाइल दागी, तो पाकिस्तान के पास यह समझने के लिए केवल 30 से 45 सेकंड थे कि इसमें परमाणु हथियार है या नहीं। पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने तंज कसते हुए कहा कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर की तस्वीरें सामने आईं जहां वे अपने ही मुख्यालय में बुलेटप्रूफ कांच के पीछे खड़े होकर और बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। आतंक के आकाओं में भी खौफ का आलम यह था कि अजहर मसूद जैसे लोग फूट-फूट कर रोते देखे गए।

भारत ने अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले (जिसमें 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे) का प्रतिशोध लेने के लिए 6-7 मई की रात को यह ऑपरेशन शुरू किया था। इस सैन्य कार्रवाई के दौरान भारतीय सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान के भीतर स्थित 9 प्रमुख आतंकी ठिकानों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया था। जब पाकिस्तान ने इस पर जवाबी कार्रवाई की कोशिश की, तो भारतीय वायुसेना ने उनके कई महत्वपूर्ण हवाई अड्डों पर एयरस्ट्राइक की जिसमें काफी नुकसान हुआ। 10 मई को दोनों देशों के बीच आपसी सहमति से युद्धविराम हुई।

भारत साफ कर चुका है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को केवल अस्थायी रूप से रोका गया है। अगर पाकिस्तान की ओर से आतंक की कोई भी हरकत दोबारा होती है, तो भारत अपनी रणनीतिक पहुंच और मारक क्षमता का इस्तेमाल कर इसे फिर से शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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