ढाकाः बांग्लादेश के चर्चित छात्र नेता और इंकलाब मंच के संयोजक शरीफ उस्मान हादी (Osman Hadi) की हत्या को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। हादी के भाई शरीफ ओमर हादी ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि सत्ता से जुड़े एक गुट ने आगामी राष्ट्रीय चुनाव को प्रभावित करने के लिए उनके भाई की हत्या करवाई।
ओमर हादी ने ढाका के शाहबाग इलाके में राष्ट्रीय संग्रहालय के सामने इंकलाब मंच द्वारा आयोजित ‘शहीदी शपथ’ कार्यक्रम में सरकार को सीधे घेरते हुए कहा, “यह आप ही हैं जिन्होंने उस्मान हादी की हत्या करवाई और अब इसी मुद्दे का इस्तेमाल कर चुनाव को पटरी से उतारने की कोशिश कर रहे हैं।” उनके इस बयान को बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है।
आम चुनाव के उम्मीदवार थे उस्मान हादी
32 वर्षीय शरीफ उस्मान हादी आगामी 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव के उम्मीदवार थे और चाहते थे कि समय पर चुनाव हों। ओमर हादी ने सरकार से अपील की कि चुनावी माहौल को खराब न किया जाए और हत्यारों पर तुरंत कार्रवाई की जाए।
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “हत्यारों पर जल्द मुकदमा चलाइए, ताकि चुनाव प्रभावित न हों। सरकार अब तक कोई ठोस प्रगति दिखाने में नाकाम रही है। अगर उस्मान हादी को न्याय नहीं मिला, तो एक दिन आपको भी बांग्लादेश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ेगा।” उन्होंने यूनुस सरकार को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना जैसी स्थिति का सामना करने की चेतावनी दी।
ओमर हादी ने यह भी आरोप लगाया कि उनके भाई की हत्या इसलिए की गई क्योंकि वह किसी एजेंसी या “विदेशी आकाओं” के सामने झुकने को तैयार नहीं थे। उनके मुताबिक, सरकार के भीतर मौजूद एक स्वार्थी समूह ने साजिश रचकर यह वारदात करवाई।
हादी की मौत के बाद बांग्लादेश के बिगड़े हालात
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शरीफ उस्मान हादी को 12 दिसंबर को ढाका के बिजयनगर इलाके में बैटरी चालित रिक्शा से जाते समय बेहद नजदीक से गोली मारी गई। मोटरसाइकिल पर सवार दो हमलावरों ने उनके सिर में गोली चलाई। पहले उन्हें ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने गंभीर ब्रेन स्टेम डैमेज की पुष्टि की। बाद में उन्हें सिंगापुर एयरलिफ्ट किया गया, जहां 18 दिसंबर को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
हादी की मौत की खबर सामने आते ही बांग्लादेश में भारी आक्रोश फैल गया। ढाका के शाहबाग चौराहे समेत कई इलाकों में प्रदर्शन हुए, जिनमें तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं। उत्तेजित भीड़ ने मीडिया संस्थानों- प्रथम आलो और द डेली स्टार के साथ ही छायानट भवन में भी हमले, तोड़फोड़ और आगजनी की। हादी समर्थकों ने इन संस्थानों पर ‘भारत के दलाल’ और ‘फासीवादी के मित्र’ होने जैसे आरोप लगाए।
इसी दौरान 18 दिसंबर की रात ढाका-मयमनसिंह हाईवे पर एक हिंदू मजदूर, दीपु चंद्र दास, को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और शव को आग के हवाले कर दिया। इंकलाब मंच के सदस्य सचिव अब्दुल्ला अल जाबेर ने भी सरकार को 30 दिनों का अल्टीमेटम दोहराते हुए कहा है कि इस अवधि में हत्यारों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए।
बीबीसी हिंदी के अनुसार, हादी को गोली मारने की घटना में शामिल दो संदिग्धों की पहचान कर ली गई है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों के नाम फैसल करीम मसूद और मोहम्मद आलमगीर शेख हैं। दोनों प्रतिबंधित छात्र लीग की राजनीति में शामिल थे।
खबरों में दावा किया जा रहा है कि गोलीबारी के बाद फैसल और उसका सहयोगी आलमगीर शेख किसी दूसरे देश में भाग गए और वहां शरण ले ली। हालांकि, बांग्लादेश पुलिस की डिटेक्टिव ब्रांच ने इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
वहीं, बांग्लादेश पुलिस ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि हादी हत्याकांड के सिलसिले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें फैसल करीम मसूद और मोहम्मद आलमगीर शेख के परिवार के कुछ सदस्य भी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और फरार आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है।

