नई दिल्ली: दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Oracle को लेकर बड़ी खबर बुधवार को आई। दुनिया भर से लगभग 30 हजार कर्मचारियों की छंटनी कंपनी (Oracle Layoff) कर रही है। इनमें भारत में ही करीब 12 हजार कर्मचारी है, जो प्रभावित होने वाले हैं। कंपनी ने तत्काल प्रभाव से इन्हें निकाने का फरमान सुना दिया। कंपनी ने आधिकारिक तौर पर इसे पुनर्गठन और ‘स्ट्रेटेजिक रियलाइन्मेंट’ बताया है। हालांकि, इसके पीछे एक वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव को भी माना जा रहा है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि बदलते दौर में एआई और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ता निवेश मौजूदा समय में हो रही छंटनी की एक अहम वजह हो सकती है।
Oracle की ही बात करें तो रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने हाल में OpenAI के साथ लगभग 300 बिलियन डॉलर की एक बड़ी क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर डील की है। इस डील के तहत Oracle अगले पांच साल में एआई डेटा सेंटर तैयार करेगा। इसमें बड़े पैमाने पर खर्चें की संभावना है। ऐसे में कंपनी का फोकस पारंपरिक आईटी सर्विसेज से हटकर एआई आधारित ऑटोमेशन, डेटा प्रोसेसिंग और हाई-परफॉर्मेंस क्लाउड सिस्टम की ओर शिफ्ट हो रहा है।
इस विस्तार के लिए भारी खर्च की आवश्यकता है। संभावना जताई जा रही है कि ऑरेकल इन डेटा केंद्रों को सपोर्ट करने के लिए लगभग 30 लाख विशेष चिप्स खरीदेगी। इस तरह के बुनियादी ढांचे पर इसका खर्च दो साल पहले लगभग 6.9 अरब डॉलर सालाना से बढ़कर इस साल लगभग 50 अरब डॉलर हो गया है। इस बड़े पैमाने के निवेश को पूरा करने के लिए, कंपनी अपने कर्मचारियों सहित अन्य क्षेत्रों में लागत में कटौती करती दिख रही है।
बदल रहा IT सेक्टर
Oracle अकेली कंपनी नहीं, बदलते समय को देखते हुए कई कंपनियों ने पारंपरिक या कहें तो बेसिक कामकाज के रोल को खत्म करते हुए एआई और मशीन लर्निंग पर जोर दिया है। वैसे भी छंटनी की घटना टेक इंडस्ट्री में कोई अकेली घटना नहीं है। पिछले दो वर्षों में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और मेटा जैसी कंपनियों ने भी बड़े पैमाने पर छंटनी की है। इन कंपनियों ने लागत कम करने के साथ-साथ एआई में भारी निवेश की रणनीति अपनाई है।
माइक्रोसॉफ्ट ने OpenAI में अरबों डॉलर का निवेश किया, जबकि गूगल ने अपने Gemini एआई मॉडल को प्राथमिकता देते हुए कई प्रोजेक्ट्स को बंद किया।
विश्लेषकों का कहना है कि एआई की वजह से कंपनियों को कम कर्मचारियों में ज्यादा काम करवाने की क्षमता मिल रही है। उदाहरण के तौर पर, जहां पहले एक सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट में 10 डेवलपरों की जरूरत होती थी, वहीं अब एआई कोडिंग टूल्स की मदद से वही काम 6-7 लोगों की टीम कर पा रही है।
भारत का IT सेक्टर भी महसूस कर रहा बदलाव
भारत का आईटी सेक्टर भी नए बदलाव से अछूता नहीं है। देश की बड़ी आईटी कंपनियां जैसे TCS, इंफोसिस, विप्रो और HCLTech अब एआई स्किल को प्राथमिकता दे रही हैं। पिछले दो से तीन वर्षों में इन कंपनियों ने फ्रेशर हायरिंग की गति धीमी की है और पारंपरिक सपोर्ट रोल की जगह एआई, डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसी नई स्किल वाले प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ाई है।
NASSCOM की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में AI मार्केट 2027 तक 17 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। साथ ही यह भी अनुमान है कि एआई लगभग 10 लाख नई नौकरियां पैदा कर सकता है, लेकिन साथ ही करीब 6-7 लाख पारंपरिक नौकरियां अप्रासंगिक भी हो सकती हैं।
कह सकते हैं कि तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है, लेकिन यह एक बदलाव का दौर है जिसमें नई स्किल सबसे बड़ी जरूरत बन गए हैं। पिछले कुछ सालों में मसलन- 2023 और 2024 के बाद से कई कंपनियों और भारतीय स्टार्ट अप ने कस्टमर सपोर्ट में एआई चैटबॉट्स का इस्तेमाल शुरू किया, जिससे मानव संसाधन की जरूरत कम हुई। वहीं कई मल्टीनेशनल कंपनियों ने अपने बैक-ऑफिस ऑपरेशंस में एआई ऑटोमेशन लागू किया है।
अब कंपनियां कोई भी नया प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले यह देख रही हैं कि क्या उसे एआई से किया जा सकता है। इससे आईटी सेक्टर में एंट्री लेवल जॉब्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है।
Oracle की छंटनी को इसी बड़े ट्रेंड के हिस्से के रूप में देखा जा सकता है। यह सिर्फ लागत कम करने का मामला नहीं बल्कि टेक इंडस्ट्री के बदलते रूप की झलक है, जहां कंपनियां मानव संसाधन की संख्या से ज्यादा उनकी तकनीकी क्षमता पर ध्यान दे रही हैं।
यह भी पढ़ें- Apple, Google समेत 18 कंपनियों को बनाएंगे निशाना, ईरान की अमेरिका को कड़ी धमकी; कर्मचारियों को दी ये सलाह

