मुंबई: महाराष्ट्र में लंबे समय से अटके नगर निगम चुनावों में एक भी वोट पड़ने से पहले ही भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने कम से कम 66 वार्ड जीत लिए हैं। साथ ही अजीत पवार की NCP के खाते में भी दो सीटें तय हैं। इन 66 में से भाजपा के 44 और शिवसेना के 22 उम्मीदवारों की जीत शामिल है। दरअसल, शुक्रवार नामांकन पत्र वापस लेने का आखिरी दिन था और दूसरी पार्टियों, गठबंधनों के कई उम्मीदवारों ने नाम वापस लिया। कई बागी भी थे जिन्होंने नाराजगी में चुनाव में उतरने का फैसला किया था। इनमें से भी कई ने नाम वापस लिए। इससे इन 66 नेताओं के निर्विरोध जीतने का रास्ता साफ हो गया है।
हालांकि, शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने सत्ताधारी पार्टी पर विपक्षी उम्मीदवारों को पैसे और धमकियों का इस्तेमाल करके नामांकन वापस लेने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है। राज्य चुनाव आयोग ने अब यह पता लगाने के लिए जांच के आदेश दिए हैं कि क्या नामांकन दबाव या पैसे के कारण वापस लिए गए थे।
सबसे ज्यादा जीत वाले उम्मीदवार मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) के अहम माने जाने कल्याण डोंबिवली नगर निगम से हैं। यहां 21 महायुति उम्मीदवार चुने गए हैं। इसमें 15 बीजेपी से और छह शिवसेना से हैं।
सत्ताधारी पार्टियों के नेताओं ने पूरे राज्य में बागियों को नॉमिनेशन वापस लेने के लिए मनाने की जोरदार कोशिशें कीं। नासिक से सोलापुर और मुंबई से नागपुर तक, नाटकीय दृश्य देखने को मिला। इस दौरान तनाव के कारण सोलापुर में एक राजनीतिक कार्यकर्ता की मौत भी हो गई। सोलापुर में, कथित तौर पर बीजेपी के दो गुटों के बीच झड़पें हुईं, जिसमें एक पार्टी कार्यकर्ता की मौत हो गई। शांति बहाल करने के लिए पुलिस को तैनात किया गया है।
मुंबई में, भाजपा नेतृत्व की लगातार कोशिशों के बावजूद, पार्टी के 5 बागियों ने वार्ड 60, 173, 205, 177 और 180 से चुनाव मैदान में बने रहने का फैसला किया। इसी तरह, उद्धव-राज ठाकरे भाई करीब नौ वार्डों में बागियों को नॉमिनेशन वापस लेने के लिए मनाने में नाकाम रहे।
जलगांव, पनवेल में कई उम्मीदवारों की जीत पक्की
उत्तरी महाराष्ट्र के जलगांव ने भी दोनों पार्टियों को एक दर्जन कॉर्पोरेटर दिए हैं। यहां शिवसेना और भाजपा को छह-छह जीत मिली हैं। यह क्षेत्र वैसे भी भाजपा और शिवसेना के लिए एक अहम राजनीतिक जमीन रहा है। यही ट्रेंड MMR के पनवेल में भी दिखा, जहाँ सात बीजेपी उम्मीदवारों ने जीत हासिल की।
भाजपा के लिए भिवंडी में भी छह जीत बिना मुकाबले के निश्चित हो गई है, जो कुछ समय से NCP (शरदचंद्र पवार) गुट का गढ़ रहा है।
एकनाथ शिंदे के गढ़ ठाणे में भाजपा के साथ साफ दरार के बावजूद उपमुख्यमंत्री की शिवसेना छह जीत हासिल करने में कामयाब रही। इसे लेकर राज ठाकरे की MNS ने जिले में विरोध प्रदर्शन किया, और सत्ताधारी सरकार की प्रक्रिया और तरीके पर सवाल उठाए।
दूसरी जगहों पर भी छोटे लेकिन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण फायदे भाजपा के लिए दर्ज किए गए। धुले में तीन भाजपा उम्मीदवार बिना मुकाबले के जीते, जबकि अहिल्या नगर में NCP ने दो सीटें और भाजपा ने एक सीट जीती।
पूरे राज्य भर के आंकड़े मिलाकर कर देखें तो भाजपा ने कल्याण में 15 सीटों के साथ सबसे ज्यादा निर्विरोध उम्मीदवार हासिल किए। इसके बाद भिवंडी (6), पनवेल (6), जलगांव (6), धुले (4), अहिल्यानगर (3), पुणे (2) और पिंपरी-चिंचवड़ (2) का नंबर आता है। शिवसेना ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गृह क्षेत्र ठाणे में सात निर्विरोध उम्मीदवार दर्ज किए, जबकि उसने कल्याण में सात, जलगांव में छह और भिवंडी में दो सीटें हासिल की।
इस्लामिक पार्टी ने मालेगांव में एक अकेली निर्विरोध सीट हासिल की। बृहन्मुंबई नगर निगम सहित नगर निगमों के चुनाव 15 जनवरी को होने हैं। माना जा रहा है कि बिना मुकाबले वाली जीतें हाल ही में हुए नगर परिषद चुनावों में सत्तारूढ़ गठबंधन की लगभग पूरी जीत के बाद राज्य में उनके लिए एक नई ताकत बनेंगी। इससे पार्टियों को भी राहत मिलेगी और वे दूसरे इलाकों में चुनाव प्रचार पर ध्यान दे पाएंगी।

