Monday, April 13, 2026
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नोएडा फेस-2 में कर्मचारियों का आंदोलन हिंसक हुआ, पत्थरबाजी और आगजनी से बिगड़े हालात, क्या है पूरा मामला?

इस पूरे विवाद की शुरुआत रिचा ग्लोबल कंपनी से मानी जा रही है। दरअसल, हरियाणा के फरीदाबाद स्थित कंपनी की यूनिट में हाल ही में 35% तक वेतन वृद्धि को मंजूरी दी गई थी।

नोएडा के फेज-2 में निजी कर्मचारियों का आंदालोन हिंसक हो गया है। प्रदर्शनकारियों ने सोमवार पुलिस सहित कई गाड़ियों में तोड़फोड़ की और उन्हें आग के हवाले कर दिया। दरअसल पिछले तीन दनों से नोएडा की प्राइवेट कंपनियों के हजारों कर्मचारी सड़क पर हैं, ये वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। सोमवार उनका धैर्य जवाब दे गया और सड़कों पर ना सिर्फ तोड़फोड़ की बल्कि पुलिस बल पर पथराव कर कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया।

सोमवार सुबह फेस-2 स्थित औद्योगिक इकाइयों के लगभग 1,000 कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। पुलिस के अनुसार, ये कर्मचारी पिछले तीन दिनों से वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। सोमवार को बड़ी संख्या में श्रमिक सड़कों पर उतर आए और सेक्टर 1, 15 और 62 सहित कई इलाकों में जाम की स्थिति बन गई।

हिंसा की सबसे भयावह तस्वीरें मदरसन कंपनी के बाहर से आईं, जहां करीब 500 कर्मचारी जमा थे। भीड़ ने उग्र होकर पथराव शुरू कर दिया और वहां खड़ी बसों व निजी वाहनों को आग लगा दी। स्थिति को नियंत्रित करने पहुंची पुलिस की गाड़ी को भी प्रदर्शनकारियों ने पलट दिया। बचाव में पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और कई थानों की फोर्स को मौके पर तैनात करना पड़ा।

विवाद की जड़ रिचा ग्लोबल का ‘फरीदाबाद फॉर्मूला’

इस पूरे विवाद की शुरुआत रिचा ग्लोबल कंपनी से मानी जा रही है। दरअसल, हरियाणा के फरीदाबाद स्थित कंपनी की यूनिट में हाल ही में 35% तक वेतन वृद्धि को मंजूरी दी गई थी। इसके तहत टेक्निकल कर्मचारियों की सैलरी 20,000 रुपये और नॉन-टेक्निकल स्टाफ की 15,000 रुपये कर दी गई।

इसी के बाद नोएडा फेज-2 में स्थित रिचा ग्लोबल की अन्य यूनिटों के कर्मचारियों ने भी समान वेतन की मांग शुरू कर दी। उनका कहना है कि एक ही कंपनी में अलग-अलग स्थानों पर काम करने वाले कर्मचारियों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। उनकी मांग है कि नोएडा में भी सभी कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 20,000 रुपये किया जाए। धीरे-धीरे ऐसी ही मांगे मदरसन, रेनबो, पैरामाउंट और एसएनडी जैसी आसपास की अन्य कंपनियों के कर्मचारियों की तरफ से भी की जाने लगीं।

श्रमिकों की क्या मांगें हैं?

कर्मचारियों की मौटे तौर पर 4-5 मांगे हैं। पहली यही मांग है कि उनका न्यूनतम मासिक वेतन 20,000 रुपये की जाए। इसके साथ ओवरटाइम का भुगतान दोगुनी दर पर की जाए। उनकी मांगों में यह भी है कि रविवार को काम करने पर अतिरिक्त भुगतान जैसी शर्तें शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त वे 30 नवंबर तक बोनस के भुगतान और बिना कारण छंटनी पर रोक लगाने की मांग भी कर रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि अधिकांश मांगों को लिखित रूप में मान लिया गया है, लेकिन श्रमिकों का कहना है कि वेतन वृद्धि जैसे मुख्य मुद्दे पर अब भी टालमटोल की जा रही है।

प्रदर्शन कर रहे एक कर्मचारी ने आईएएनएस से कहा, “हमारा वेतन नहीं बढ़ रहा है। हम इस कंपनी में पांच साल से काम कर रहे हैं, लेकिन आज भी हमारी सैलरी 12,000 रुपये के आसपास ही है। जब भी हम वेतन वृद्धि की मांग करते हैं, तो हमें धमकाया जाता है और नौकरी छोड़ देने को कहा जाता है।”

बाजार की महंगाई का जिक्र करते हुए एक अन्य प्रदर्शनकारी ने से कहा, 11,000-12,000 रुपये की सैलरी लेकर जब हम बाजार में सामान खरीदने जाते हैं, तो क्या हमें वहां अलग (कम) रेट मिलते हैं? इस महंगाई में इतने पैसों में गुजारा करना नामुमकिन है।

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों में कई महिलाएं भी शामिल हैं। एक महिला कर्मचारी ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा, “हमें कमरे का किराया देना होता है, राशन खरीदना होता है और बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उठाना पड़ता है, इतने में हम कैसे गुजारा करेंगे?”

वहीं, एक अन्य प्रदर्शनकारी ने अपनी मांग दोहराते हुए कहा, “हमारी मांगें पूरी की जानी चाहिए। 12,000 में कुछ भी मैनेज नहीं हो पाता; एक घर चलाने के लिए इतनी सैलरी काफी नहीं है।”

प्रशासन की बातें और कर्मचारियों के आरोप

जिलाधिकारी मेधा रूपम ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील करते हुए बताया कि कंपनियों के साथ बैठक में कई अहम फैसले लिए गए हैं। इनमें कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम समिति का गठन, शिकायत पेटियां, समय पर वेतन भुगतान और वेतन पर्ची देना शामिल है। इसके अलावा, हर महीने की 10 तारीख तक वेतन का एकमुश्त भुगतान करना और अनिवार्य रूप से वेतन पर्ची देना तय किया गया है।

हालांकि, श्रमिकों का आरोप है कि सबसे अहम मुद्दा वेतन वृद्धि पर अभी तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है और प्रबंधन इस पर टालमटोल कर रहा है। इसी कारण उनका आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। फिलहाल इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और शांति बहाली की कोशिश में लगी हुई है।

चिल्ला बॉर्डर से नोएडा आने वाली लिंक रोड जाम

आंदोलन की वजह से आस-पास के क्षेत्र की ट्रैफिक व्यवस्था बाधित हुई है। प्रदर्शनकारियों ने चिल्ला बॉर्डर (दिल्ली) से नोएडा आने वाली लिंक रोड को पूरी तरह जाम कर दिया है, जिसके चलते इस रूट पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हो गया है और लंबा जाम लग गया है। स्थिति को देखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने एडवाइजरी जारी कर लोगों से यात्रा की योजना सोच-समझकर बनाने की अपील की है।

पुलिस ने सुझाव दिया है कि नोएडा जाने वाले लोग डीएनडी फ्लाईवे का इस्तेमाल करें, खासकर सराय काले खां की ओर से। इसके अलावा एनएच-24 और कोंडली ब्रिज के रास्ते नोएडा मोड़ से भी एंट्री ली जा सकती है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और ट्रैफिक अपडेट्स पर नजर रखते हुए ही अपने रूट का चयन करें, ताकि जाम से बचा जा सके।

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अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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