Friday, March 20, 2026
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भारत के स्टेडियम में अब नहीं दिखेंगे ‘तंबाकू’ और ‘गुटखे’ के विज्ञापन?

नई दिल्लीः भारत में मैचों के दौरान मैदान में लगे होर्डिंग्स में कई तरह के विज्ञापन नजर आते हैं। इन विज्ञापनों से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की अच्छी खासी कमाई होती है। लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय अब इस पर बड़ा फैसला लेने जा रहा है। मंत्रालय बीसीसीआई से क्रिकेट मैचों के दौरान प्रदर्शित होने वाले धूम्र रहित तंबाकू विज्ञापनों पर रोक लगाने को कह सकता है। इसमें गुटखा ब्रांडों के उन छद्म विज्ञापनों को हटाना भी शामिल है जिसे अक्सर बॉलीवुड हस्तियां और पूर्व क्रिकेटर एंडोर्स करते हैं।

तंबाकू और गुटके के विज्ञापनों पर रोक की तैयारी कर रहा स्वास्थ्य मंत्रालय

खबरों के मुताबिक, ये विज्ञापन असल में युवाओं को लक्षित करते हैं, इसलिए स्वास्थ्य मंत्रालय इन्हें रोकने की कोशिश कर रहा है। क्रिकेट मैच युवाओं में काफी लोकप्रिय हैं। परेशानी ये है कि इन मैचों के दौरान छिपे हुए तरीके से धूम्र रहित तंबाकू उत्पादों का विज्ञापन दिखाया जाता है, और कई बार मशहूर हस्तियां भी इनका प्रचार करती हैं। इससे युवा इन उत्पादों की तरफ आकर्षित हो सकते हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य मंत्रालय के डीजीएचएस बीसीसीआई से किसी भी तरह के तंबाकू विज्ञापनों पर रोक लगाने का आग्रह कर सकते हैं। अधिकारी का ये भी कहना है कि “भारत ने धूम्र रहित तंबाकू उत्पादों के इस्तेमाल को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन अभी और करने की जरूरत है।”

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दरअसल सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद (कोटपा) अधिनियम और केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमों के तहत इस तरह के विज्ञापनों को दिखाना पहले से ही गैरकानूनी है। ये नियम फिल्मों, टेलीविजन और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी तंबाकू उत्पादों के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष विज्ञापन पर रोक लगाते हैं।

ऐसे विज्ञापनों को लेकर क्या है कहना ?

दिल्ली सरकार के अंतर्गत तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ के पूर्व प्रमुख रहे डॉ. एस.के. अरोड़ा ने रिपोर्ट में कहा कि ये विज्ञापन असल में तो जाने-माने तंबाकू और गुटका ब्रांडों के विज्ञापन होते हैं, लेकिन कानून को चकमा देने के लिए इन्हें पान मसाला, इलायची और दूसरी खाने की चीजों के नाम पर दिखाया जाता है।

अरोड़ा ने कहा कि दिल्ली राज्य में तंबाकू नियंत्रण का काम देखने के दौरान, मैंने बॉलीवुड और हॉलीवुड हस्तियों और क्रिकेट स्टार्स को कई बार कारण बताओ नोटिस जारी किए थे, जब पान मासाला का विज्ञापन बहुत ज्यादा चल रहा था। कई मामलों में इन्हें रोका भी गया और अब ये लोग ज्यादातर इलायची के नाम पर तंबाकू का ही प्रचार करते हैं।

हाल के एक अध्ययन में इन विज्ञापनों की व्यापकता को उजागर किया गया है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और वैश्विक स्वास्थ्य संगठन वाइटल स्ट्रैटेजीज द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि मई 2023 में प्रकाशित ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में, क्रिकेट विश्व कप के अंतिम 17 मैचों के दौरान प्रदर्शित धूम्र रहित तंबाकू ब्रांडों के सभी छद्म विज्ञापनों में से 41.3% विज्ञापन देखे गए।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) बीसीसीआई से इन छद्म विज्ञापनों के प्रसारण को रोकने का आग्रह करने की योजना बना रहा है।

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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