बिहार में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक मुस्लिम महिला डॉक्टर के चेहरे से हिजाब खींचने का मामला तुल पकड़ता जा रहा है। कश्मीर में इसको लेकर कड़ा विरोध देखने को मिल रहा है।
15 दिसंबर को आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र सौंपने के दौरान सीएम नीतीश कुमार ने मंच पर मौजूद एक मुस्लिम महिला डॉक्टर के चेहरे से हिजाब खींच दिया था। इस व्यवहार को लेकर देशभर में तीखी आलोचना हुई। इस मामले की निंदा करते हुए राजनीतिक और धार्मिक नेताओं ने इसे महिला की गरिमा और व्यक्तिगत सम्मान का गंभीर उल्लंघन बताया है।
शुक्रवार को श्रीनगर की जामिया मस्जिद में जुमे की नमाज के दौरान मीरवाइज उमर फारूक ने इस घटना को नैतिक सीमाओं और व्यक्तिगत गरिमा का गंभीर उल्लंघन करार दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी पद, सत्ता या अधिकार किसी को यह हक नहीं देता कि वह दूसरे व्यक्ति के आत्मसम्मान में दखल दे। मीरवाइज ने जोर देकर कहा कि जब सार्वजनिक रूप से, खासकर सत्ता में बैठे व्यक्ति द्वारा किसी की गरिमा को ठेस पहुंचाई जाती है, तो यह बेहद चिंताजनक संदेश देता है कि ताकत, नैतिकता और बुनियादी मानवीय मूल्यों से ऊपर हो सकती है।
उन्होंने इस बात पर भी अफसोस जताया कि घटना पर माफी मांगने के बजाय कुछ राजनीतिक दल और मीडिया के हिस्से इसे महिला सशक्तिकरण का मुद्दा बताकर सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं और जानबूझकर बहस को हिजाब के सवाल की ओर मोड़ा जा रहा है। मीरवाइज ने कहा कि ऐसी भटकाने वाली दलीलें दुर्भावनापूर्ण हैं और इससे इस्लाम के प्रति पूर्वाग्रह और सीमित समझ ही उजागर होती है।
नीतीश कुमार पर एफआईआर दर्ज
इस बीच, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने श्रीनगर के कोठी बाग पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने नीतीश कुमार के खिलाफ एक मुस्लिम महिला की गरिमा भंग करने और जबरन नकाब हटाने के आरोप में एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
अपनी शिकायत में इल्तिजा मुफ्ती ने इस घटना को घृणित बताया। उन्होंने लिखा कि पूरे देश ने हैरानी, डर और गुस्से के साथ देखा कि बिहार के मुख्यमंत्री ने एक सरकारी समारोह में सार्वजनिक रूप से एक युवा मुस्लिम डॉक्टर का नकाब खींचकर हटा दिया। उन्होंने कहा कि हालात को और भी परेशान करने वाला बना वहां मौजूद लोगों का रवैया, जिसमें बिहार के उपमुख्यमंत्री भी शामिल थे, जो इस पर हंसते हुए तमाशा देखते नजर आए।
इल्तिजा ने कहा कि किसी महिला से जबरन नकाब हटाना सिर्फ एक मुस्लिम महिला पर हमला नहीं है, बल्कि यह हर भारतीय महिला की स्वायत्तता, पहचान और सम्मान पर सीधा हमला है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब देश में मुसलमानों को जानबूझकर अलग-थलग करने और राजनीतिक व आर्थिक रूप से कमजोर करने की कोशिशों की चर्चा हो रही है, जिससे मामला और भी गंभीर हो जाता है।
इससे पहले बुधवार को ‘एक्सप्रेस अड्डा’ कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस घटना को बेहद परेशान करने वाला बताया था। उन्होंने कहा कि यह सोचना सभी के लिए चिंता का विषय होना चाहिए कि भारत में एक निर्वाचित मुख्यमंत्री किसी युवा महिला के चेहरे से ढकाव हटाने जैसा कदम उठा सकता है और उसे कोई जवाबदेही नहीं झेलनी पड़ती। उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिनिधित्व की कमी के कारण एक बड़े तबके में खुद को बेबस महसूस करने की भावना गहरी होती जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।
रांची में भी शिकायत
इस मामले में झारखंड की राजधानी रांची के इटकी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता मो. मुरतेजा आलम के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने इटकी थाना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया है। शिकायत में कहा गया है कि बिहार में हुए एक सरकारी नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने मंच पर मौजूद एक मुस्लिम महिला डॉक्टर के हिजाब के साथ सार्वजनिक रूप से छेड़छाड़ की।
शिकातय में कहा गया है कि कैमरों और बड़ी भीड़ के सामने हिजाब को छूने और हटाने की कोशिश की गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर सामने आ चुका है। आवेदन में इसे अपमानजनक और असंवैधानिक बताया गया है और कहा गया है कि हिजाब मुस्लिम महिलाओं की धार्मिक आस्था और निजी सम्मान से जुड़ा विषय है। बिना सहमति इसके साथ हस्तक्षेप करना धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है और सार्वजनिक मंच पर ऐसा व्यवहार महिला की गरिमा और आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाता है।
वहीं, नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) ने इस पूरे विवाद को क्षणिक घटना बताते हुए मुख्यमंत्री का बचाव किया है। पार्टी का कहना है कि नीतीश कुमार को इस एक घटना के आधार पर नहीं, बल्कि महिलाओं और मुसलमानों के कल्याण के लिए किए गए उनके कामों के आधार पर आंका जाना चाहिए।

