Friday, March 20, 2026
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भाषा विवाद पर ठाकरे भाइयों पर निशिकांत दुबे का हमला- हिम्मत है तो महाराष्ट्र से बाहर आओ… शिवसेना ने दी प्रतिक्रिया

नई दिल्लीः भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने महाराष्ट्र में हिंदी भाषी लोगों पर हमलों को लेकर राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोला है। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में भाजपा सांसद ने हाल के उन वीडियो की निंदा की जिनमें मराठी न बोल पाने पर लोगों की पिटाई की गई। उन्होंने कहा, “अगर हिम्मत है तो यूपी, बिहार या तमिलनाडु आओ, तुम्हें जनता पटखनी देगी।”

निशिकांत ने राज ठाकरे के उस बयान पर भी निशाना साधा जिसमें उन्होंने कहा था, “मारो, लेकिन वीडियो मत बनाओ।” इस पर दुबे ने कहा, “तुम लोग हमारे पैसे पर जिंदा हो, क्या उद्योग हैं तुम्हारे पास? अगर हिंदी बोलने वालों को पीट सकते हो तो उर्दू, तमिल और तेलुगु बोलने वालों को भी पीटो। अगर इतने बड़े ‘ठाकरे’ हो तो महिम दरगाह के सामने जाकर किसी हिंदी या उर्दू बोलने वाले को मारकर दिखाओ।”

हाल ही में मुंबई के मीरा रोड में एक दुकानदार की सिर्फ इसलिए पिटाई कर दी गई क्योंकि वह मराठी नहीं बोल पाया। इस घटना का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एमएनएस कार्यकर्ता दुकानदार को थप्पड़ मारते और व्यापार बंद करने की धमकी देते नजर आ रहे हैं। राज ठाकरे की मनसे ने इन हमलों को सही ठहराते हुए कहा कि “मराठी भाषा का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में महाराष्ट्र सरकार द्वारा हिंदी, अंग्रेजी और मराठी की अनिवार्यता वाली त्रिभाषा नीति को वापस लेना भी है। ठाकरे बंधुओं ने इस नीति का विरोध करते हुए इसे “हिंदी थोपना” करार दिया था।

शनिवार को, लगभग दो दशकों बाद राज और उद्धव ठाकरे एक साथ मंच पर नजर आए। यह “विजय रैली” त्रिभाषा नीति को वापस लिए जाने के जश्न में आयोजित की गई थी। बाद में उद्धव की पार्टी ने स्पष्ट किया कि वे हिंदी के विरोधी नहीं हैं, बल्कि किसी भी भाषा के थोपे जाने के खिलाफ हैं।

निशिकांत ने आरोप लगाया कि ठाकरे बंधु बीएमसी चुनाव के मद्देनजर सस्ती राजनीति कर रहे हैं और मराठी अस्मिता की आड़ में हिंदी भाषियों को निशाना बना रहे हैं।

इससे पहले उन्होंने एक्स पर एक के बाद एक कई पोस्ट किए। निशिकांत ने 6 जुलाई को एक्स पर लिखा था कि मुम्बई में शिवसेना उद्धव,मनसे राज ठाकरे और एनसीपी पवार साहब में और कश्मीर से कश्मीरी हिंदुओं को भगाने वाले सलाउद्दीन,मौलाना मसूद अजहर तथा मुम्बई में हिंदुओं के उपर अत्याचार करने वाले दाउद इब्राहिम में क्या फर्क है? एक ने हिंदू होने के नाते अत्याचार किया दूसरे हिंदी के कारण अत्याचार कर रहे हैं?

एक अन्य पोस्ट में लिखा कि हिंदी भाषी लोगों को मुम्बई में मारने वाले यदि हिम्मत है तो महाराष्ट्र में उर्दू भाषियों को मार कर दिखाओ। अपने घर में तो कुत्ता भी शेर होता है? कौन कुत्ता कौन शेर खुद ही फैसला कर लो।

निशिकांत के बयानों पर आदित्य ठाकरे ने क्या कहा?

निशिकांत के बयानों को महाराष्ट्र विरोधी करार देते हुए शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वह न तो बिहार, न उत्तर प्रदेश और न ही हिंदी भाषा के प्रतिनिधि हैं, बल्कि केवल बीजेपी की “तोड़ो-फोड़ो, राज करो” की विचारधारा का प्रतीक हैं।

आदित्य ठाकरे ने कहा कि बीजेपी और निशिकांत दुबे की ओर से दिए गए बयान सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, जो समाज को बांटने का काम करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी हार के डर से हिंदू-मुस्लिम या जातिगत मुद्दों को हवा देती है। उन्होंने बिहार के चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि निशिकांत दुबे को वहां की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन उनकी नीतियां और बयान महाराष्ट्र के प्रति नफरत और द्वेष को दर्शाती है। उन्होंने दावा किया कि बिहार में तेजस्वी यादव के नेतृत्व में बदलाव की लहर है और बीजेपी को हार का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने महाराष्ट्र की एकता पर जोर देते हुए कहा कि यह राज्य पूरे देश से आए लोगों का स्वागत करता है।

आदित्य ने कोविड काल का जिक्र करते हुए कहा कि जब पूरा देश संकट में था, तब उद्धव ठाकरे ने बतौर मुख्यमंत्री सभी को महाराष्ट्र में रहने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा, “हमारा झगड़ा हिंदी भाषी या किसी समुदाय से नहीं, बल्कि सरकार की गलत नीतियों से है।” उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि भाजपा के बयानों से गुस्सा तो स्वाभाविक है, लेकिन इसका जवाब राजनीतिक तरीके से देना होगा।

आदित्य ठाकरे ने गठबंधन की रणनीति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि शिवसेना, कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों का गठबंधन महाराष्ट्र में लोगों के हितों के लिए काम कर रहा है। तीसरी भाषा नीति के विरोध में एकजुट हुए संगठनों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में दो भाइयों (शिवसेना और अन्य सहयोगी) के एक साथ आने का उत्साह दिख रहा है। इस जोश को बनाए रखने के लिए रणनीति पर काम करना होगा। निशिकांत दुबे के बयानों को सामाजिक नहीं, बल्कि राजनीतिक बताते हुए ठाकरे ने कहा कि बीजेपी की नीतियां महाराष्ट्र के खिलाफ हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने और बीजेपी की विभाजनकारी नीतियों का जवाब वोटों के जरिए देने की अपील की। 

समाचार एजेंसी आईएएनएस इनपुट के साथ

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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