Saturday, November 29, 2025
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नया लेबर कोड: अब एक साल में ग्रेच्युटी…ओवरटाइम पर दोगुना पेमेंट; भारत में श्रमिकों के लिए क्या कुछ बदला?

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से नए लेबर कोड को लागू करने की घोषणा कर दी गई है। इससे वेतन से लेकर ग्रेच्युटी सहित गिग वर्करों और अन्य श्रमिकों के लिए काफी कुछ बदलने जा रहा है। महिलाओं को सभी जगहों पर सभी तरह के काम करने की अनुमति होगी, बशर्ते उनकी सहमति हो और जरूरी सुरक्षा उपाय किए गए हों।

नई दिल्ली: भारत सरकार ने शुक्रवार को एक बड़ा ऐलान करते हुए चार नए लेबर कोड यानी श्रम संहिताएँ को लागू करने की घोषणा कर दी। इन लेबर कोड में वेतन संहिता-2019, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्त संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता-2020 और औद्योगिक संबंध संहिता-2020 मौजूदा 29 कानूनों की जगह लेंगे, जिसे सरकार आजादी के बाद से किए गए सबसे बड़े श्रम सुधारों में से एक बता रही है।

साल 2019 और 2020 में संसद द्वारा पारित इन संहिताओं को अभी तक लागू नहीं किया जा सका था क्योंकि केंद्र और राज्यों ने इन्हें एक साथ अधिसूचित नहीं किया था। श्रम मंत्रालय ने कहा कि ये संहिताएँ – जिनमें वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा शामिल हैं – ‘देश के कार्यबल के लिए बेहतर वेतन, सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करेंगी।’

मिनिस्ट्री ऑफ लेबर एंड एम्प्लॉयमेंट ने एक्स पोस्ट में लिखा, ‘भारत के लेबर लैंडस्केप में एक बड़ा बदलाव। सरकार ने चार लेबर कोड लागू किए हैं जो 29 कानूनों को एक आसान, ट्रांसपेरेंट और भविष्य के लिए तैयार फ्रेमवर्क में जोड़ते हैं, जिससे वर्कर्स को मजबूती मिलती है और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।’

पीएम नरेंद्र मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन बदलाव की प्रशंसा करते हुए लिखा, ‘आज मेरे श्रमिक भाई-बहनों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। हमारी सरकार ने चार लेबर कोड लागू कर दिए हैं। आजादी के बाद यह श्रमिकों के हित में किया गया सबसे बड़ा रिफॉर्म है। यह देश के कामगारों को बहुत सशक्त बनाने वाला है। इससे जहां नियमों का पालन करना बहुत आसान होगा, वहीं ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’को बढ़ावा मिलेगा।’

पीएम मोदी ने आगे लिखा, ‘ये कोड श्रमिक भाई-बहनों के लिए सामाजिक सुरक्षा, समय पर वेतन और सुरक्षित कार्यस्थल की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। इसके साथ ही, ये बेहतर और लाभकारी अवसरों के लिए एक सशक्त नींव भी बनाएंगे। हमारी माताएं-बहनें और युवा साथी इनसे विशेष रूप से लाभान्वित होंगे।’

साथ ही उन्होंने कहा, ‘इन सुधारों के जरिए एक ऐसा मजबूत इकोसिस्टम तैयार होगा, जो भविष्य में हमारे कामगारों के अधिकारों की रक्षा करेगा और भारत की आर्थिक वृद्धि को नई शक्ति देगा। इससे नौकरियों के नए-नए अवसर तो बनेंगे ही, प्रोडक्टिविटी भी बढ़ेगी। इसके साथ ही विकसित भारत की हमारी यात्रा को भी तेज गति मिलेगी।’

क्या हैं नए लेबर कोड, क्या बदलाव हुआ है?

वेतन संहिता-2019: चार संहिताओं में से पहली वेतन संहिता दरअसल न्यूनतम वेतन, वेतन भुगतान, बोनस और समान पारिश्रमिक से संबंधित चार पुराने कानूनों को समाहित करती है। इसमें सबसे बड़ा बदलाव ‘वेतन’ की परिभाषा को सुव्यवस्थित करना है। अब इसमें मूल वेतन, महंगाई भत्ता और रिटेनिंग शामिल होना चाहिए और कुल पारिश्रमिक का कम से कम 50 प्रतिशत वेतन के रूप में गिना जाएगा। यह वर्तमान की स्थिति से एक बड़ा बदलाव है, जहाँ मूल वेतन और महंगाई भत्ता अंतिम सीटीसी का एक छोटा सा हिस्सा होता है। नए बदलाव से भविष्य निधि (पीएफ), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी), श्रमिक मुआवजा और मातृत्व लाभ जैसे सामाजिक सुरक्षा योगदान में वृद्धि होगी।

विशेषज्ञों के अनुसार इससे कर्मचारियों को विशेष रूप से सेवानिवृत्ति पर बड़ी एकमुश्त राशि प्राप्त करने का लाभ होगा। हालाँकि, इससे नियोक्ता की लागत भी बढ़ने की संभावना है। नियोक्ताओं को वेतन संरचना, रोजगार अनुबंध और परिवर्तनीय वेतन घटकों में बदलाव करना होगा। यह नया कानून केंद्र को एक बुनियादी न्यूनतम वेतन सीमा निर्धारित करने की भी अनुमति देती है, जिसे राज्य कम नहीं कर सकते। सभी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र भी मिलेंगे जिनमें उनके पद, वेतन और सामाजिक सुरक्षा के अधिकार स्पष्ट होंगे।

साथ ही सरकार ने नियोक्ताओं के लिए समय पर वेतन देना अनिवार्य कर दिया है। इसके अलावा, महिलाओं को सभी जगहों पर सभी तरह के काम करने की अनुमति होगी, बशर्ते उनकी सहमति हो और जरूरी सुरक्षा उपाय किए गए हों। नए सुधारों के साथ ईएसआईसी कवरेज और इसके लाभ पूरे देश में बढ़ाए गए हैं। 10 से कम कर्मचारियों वाली जगहों के लिए यह स्वैच्छिक है और खतरनाक कामों में लगे एक भी कर्मचारी वाली जगहों के लिए यह अनिवार्य है।

औद्योगिक संबंध संहिता: इस हिस्से में नियुक्ति, बर्खास्तगी और विवादों के समाधान के संबंध में बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए हैं। इस संहिता के तहत निश्चित अवधि के रोजगार में एक साल के बाद ग्रेच्युटी की पात्रता होगी। अब तक 5 साल की अवधि पर ही ग्रेच्युटी मिलती थी।

इसके अलावा जिन कंपनियों में 299 कर्मचारी हैं, वे अब बिना सरकारी मंजूरी के कर्मचारियों की छंटनी कर सकती हैं। इससे पहले पिछली श्रम संहिता के तहत यह संख्या 100 थी। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे अनुपालन आसान होगा और छोटी फर्मों को ज्यादा लचीलापन मिलेगा।

हालांकि, ट्रेड यूनियनों ने श्रमिकों की सुरक्षा के नाम पर इसका विरोध किया है। उनका यह भी कहना है कि इससे नौकरी की सुरक्षा कम होगी।

पुराने कानूनों के तहत केवल सार्वजनिक उपक्रम वाली कंपनियों के कर्मचारियों को ही हड़ताल से दो हफ्ते पहले नोटिस देना होता था। हालाँकि, अब यह सभी उद्योगों पर लागू है। इस प्रकार बिना सूचना के अचानक हड़ताल और बंद की व्यवस्था खत्म हो गई है।

सामाजिक सुरक्षा संहिता: इसके लागू होने से भी बड़े अहम बदलाव अब देखने को मिलेंगे। यह पहली बार है जब कानून के तहत गिग वर्कर, प्लेटफॉर्म वर्क और एग्रीगेटर्स को परिभाषित किया गया है। यह संहिता गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को पीएफ, ESIC और ग्रेच्युटी जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करती है। एग्रीगेटर्स को अब अनिवार्य रूप से अपने वार्षिक टर्नओवर का 1 से 2 प्रतिशत – पाँच प्रतिशत से ज्यादा नहीं – सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए अलग रखना होगा।

नीति आयोग के अनुसार कोरोना महामारी के बाद से गिग वर्कफोर्स की संख्या में तेजी आई है और 2030 तक इस क्षेत्र में 2.35 करोड़ से ज्यादा लोगों के रोजगार मिलने की उम्मीद है। यह 2024-2025 में लगभग 1 करोड़ था।

फिक्स्ड टर्म इम्प्लॉई (एफटीई), जो मुख्य रूप से खुदरा, ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स, आईटी सेवाओं और विनिर्माण क्षेत्र में काम करते हैं, अब पाँच साल के बजाय एक साल बाद ग्रेच्युटी के लिए पात्र हो सकते हैं। इस प्रकार, एफटीई एक तरह से स्थायी कर्मचारियों की तरह हो जाएँगे।

साथ ही सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के श्रमिकों को कर्मचारियों की संख्या के आधार पर, न्यूनतम वेतन की गारंटी और कैंटीन, पेयजल और विश्राम क्षेत्र जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पहुँच मिलेगी। इसके अलावा, श्रमिकों के लिए निःशुल्क वार्षिक स्वास्थ्य जाँच की भी व्यवस्था होगी।

व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्त संहिता: इसमें कार्यदशाओं, कारखाना सुरक्षा, ठेका श्रमिकों और प्रवासी श्रमिकों से संबंधित एक दर्जन से अधिक कानूनों को समाहित किया गया है। अब बीड़ी और सिगार बनाने वाले श्रमिकों को 12 घंटे की पाली में काम पर रखा जा सकता हैं। हालाँकि, केंद्र ने स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए साप्ताहिक कार्य सीमा 48 घंटे रखी है। कानून के तहत, श्रमिक इस सीमा को तभी पार कर सकते हैं जब वे ऐसा करने के लिए सहमत हों और उन्हें अपने सामान्य वेतन से कम से कम दोगुना वेतन मिले। बागान श्रमिकों को OSHWC संहिता के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत भी लाया गया है।

अब महिलाओं को रात की पाली में काम करने की अनुमति होगी, बशर्ते वे ऐसा करने के लिए सहमत हों। केंद्र ने लिखित सहमति अनिवार्य करने, ओवरटाइम के लिए दोगुना वेतन, सुरक्षित परिवहन, सीसीटीवी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था जैसे कई सुरक्षा और कल्याणकारी उपायों को अनिवार्य किया है। OSHWC कोड में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार, डबिंग कलाकार और स्टंट कलाकार जैसे डिजिटल और दृश्य-श्रव्य कर्मचारी भी शामिल हैं।

विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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