Sunday, March 29, 2026
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New Income Tax Rule: 1 अप्रैल से नया नियम, क्या बदला नए आयकर सिस्टम में…बड़ी बातें जो जानना जरूरी है

नया आयकर नियम 1 अप्रैल से लागू हो जाएगा। यह नया कानून 64 साल पुराने आयकर अधिनियम 1961 की जगह लेगा। नए आयकर सिस्टम में कुछ अहम बदलाव किए गए हैं।

भारत की टैक्स व्यवस्था में लंबे समय बाद एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नया Income-tax Act 2025 करीब 64 साल पुराने Income-tax Act 1961 की जगह लेने के लिए तैयार है। नया इनकम टैक्स नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हो जाएगा। सरकार के अनुसार यह बदलाव टैक्स कानून की भाषा, संरचना और प्रक्रियाओं को सरल बनाने की कोशिश है। इसके अलावा कुछ बदलाव भी हुए हैं।

दरअसल, सरकार के अनुसार पिछले छह दशकों में आयकर कानून में इतने संशोधन हो चुके थे कि यह कानून आम करदाताओं के लिए काफी जटिल हो गया था। लगातार बदलावों के कारण इसकी भाषा भारी और संरचना उलझी हुई हो गई थी। यही वजह है कि सरकार ने इसे पूरी तरह नए ढांचे में लाने का निर्णय लिया।

पिछले साल संसद से इसे मंजूरी मिली और पिछले ही हफ्ते केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने इसे अधिसूचित कर दिया। सरकार का कहना है कि इससे टैक्स सिस्टम ज्यादा सरल, पारदर्शी और विवाद मुक्त हो सकेगा। टैक्स स्लैबों या दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है लेकिन नियमों में कुछ अहम बदलाव जरूर हैं, जो आम लोगों, नौकरीपेशा, निवेशकों, व्यवसायियों सहित आयकर भुगतान करने वाले या रिटर्न फाइल करने वाले अन्य दूसरे लोगों को प्रभावित करेगा। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

PAN से जुड़े नियमों में बदलाव

  • किसी व्यक्ति के एक या अधिक खातों में एक वित्तीय वर्ष में कुल मिलाकर 10 लाख रुपये या उससे अधिक की नकद जमा या निकासी पर PAN जरूरी होगा।
  • मोटर वाहनों की खरीद के लिए पैन नंबर बताने की सीमा 5 लाख रुपये (मोटरसाइकिलों सहित) निर्धारित की गई है। वर्तमान में किसी भी मोटर वाहन या वाहन की बिक्री या खरीद के लिए पैन नंबर आवश्यक था। इसमें दोपहिया वाहन शामिल नहीं थे।
  • होटल या रेस्तरां के बिलों, कन्वेंशन सेंटरों या बैंक्वेट हॉलों या इवेंट मैनेजमेंट के लिए 1 लाख रुपये से अधिक के भुगतानों के लिए पैन कार्ड अनिवार्य हो जाएगा। वर्तमान में होटल या रेस्तरां के बिलों के मामले में 50,000 रुपये से अधिक के भुगतानों के लिए पैन कार्ड अनिवार्य है।
  • किसी भी अचल संपत्ति की खरीद, बिक्री, उपहार या ज्वाइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट के लिए, यदि लेनदेन की लागत 20 लाख रुपये से अधिक है, तो PAN मेंशन करना होगा। अभी मौजूदा सीमा 10 लाख रुपये है।

अब केवल ‘टैक्स ईयर’

नए नियमों के तहत अब ‘फाइनेंशियल ईयर’ और ‘असेसमेंट ईयर’ की जगह केवल एक ही ‘टैक्स ईयर’ होगा। इससे टैक्स भरने की प्रक्रिया आसान होगी और उलझनें कम होंगी। लोगों को अलग-अलग टर्म समझने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नए नियम में रिटर्न फाइल करने की समयसीमा भी तय कर दी गई है, जिसमें साधारण आईटीआर के लिए 31 जुलाई, बिजनेस और प्रोफेशन वालों के लिए 31 अगस्त, जबकि ऑडिट वाले मामलों में 31 अक्टूबर तक रिटर्न भरना होगा।

खास परिस्थितियों में यह समयसीमा 30 नवंबर तक बढ़ सकती है। इसके अलावा अब टैक्स ईयर खत्म होने के 12 महीने तक संशोधित रिटर्न फाइल किया जा सकेगा।

वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए क्या है?

  • नौकरी बदलने की स्थिति में कर्मचारियों को कर देयता का आकलन करने के लिए पिछले नियोक्ता के साथ चुनी गई कर प्रणाली का उल्लेख करना आवश्यक होगा। फॉर्म 16 का स्थान फॉर्म 130 लेगा और कर्मचारी या पेंशनभोगी को अर्जित वेतन, टैक्स डिडक्शन और जमा किए गए टैक्स, तथा लागू कटौतियों का विस्तृत विवरण देना होगा।
  • नियोक्ताओं द्वारा कर्मचारियों को वेतन के साथ मिलने वाले अतिरिक्त लाभ, या सुविधाएं या लाभ फॉर्म 123 का हिस्सा होंगे। इसे डिजिटल रूप से फॉर्म 130 से जोड़ा जाएगा। नियोक्ता द्वारा प्रदान किए जाने वाले लाभ में आवास, कार, ब्याज मुक्त या रियायती ऋण, होलीडॉ के खर्च, मुफ्त या रियायती यात्रा, मुफ्त भोजन, मुफ्त शिक्षा, उपहार, वाउचर और क्रेडिट कार्ड व्यय शामिल हैं।
  • हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) को लेकर नए नियम लागू किए गए हैं। अब कर्मचारियों को छूट पाने के लिए मकान मालिक और किरायेदार के संबंध की जानकारी देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा अब मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई के साथ हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु में रहने वाले कर्मचारियों को सैलरी के 50 प्रतिशत तक एचआरए छूट मिलेगी। बाकी शहरों में यह सीमा 40 प्रतिशत ही रहेगी। अगर कोई व्यक्ति साल में 1 लाख रुपए से ज्यादा किराया देता है, तो उसे मकान मालिक का पैन देना जरूरी होगा।
  • नए नियमों के तहत कंपनी द्वारा दिए गए घर (परक्विजिट) की टैक्स वैल्यू घटा दी गई है। अब यह शहर की आबादी के आधार पर तय होगी। 40 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में सैलरी का 10 प्रतिशत, मध्यम शहरों में 7.5 प्रतिशत और छोटे शहरों में 5 प्रतिशत होगा।
  • कंपनी की कार के इस्तेमाल पर भी टैक्स नियम बदले हैं। अगर कर्मचारी कार का निजी और ऑफिस दोनों कामों में उपयोग करता है, तो 1.6 लीटर तक की कार पर 5,000 रुपये और उससे बड़ी कार पर 7,000 रुपये प्रति माह टैक्सेबल वैल्यू मानी जाएगी। अगर कंपनी ड्राइवर देती है, तो इसमें 3,000 रुपये और जुड़ेंगे।
  • कर्मचारियों को मिलने वाले फूड और बेवरेज पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ाकर 200 रुपये प्रति मील कर दी गई है, जो पहले 50 रुपये थी। वहीं कंपनी द्वारा दिए गए गिफ्ट या वाउचर अब 15,000 रुपये तक टैक्स-फ्री होंगे।
  • बच्चों के एजुकेशन अलाउंस पर राहत दी गई है। अब हर महीने 100 रुपये की जगह 3,000 रुपये तक टैक्स छूट मिलेगी (अधिकतम दो बच्चों के लिए)। हॉस्टल अलाउंस पर 9,000 रुपये प्रति माह तक छूट मिलेगी, जो पहले काफी 300 रुपये थी।

निवेशकों और व्यवसायियों के लिए क्या नया?

नए कानून के तहत, कुछ शर्तों के साथ 10 करोड़ रुपए तक के टर्नओवर वाले व्यवसायों को विस्तृत लेखा-बही (बुक्स ऑफ अकाउंट) रखने और ऑडिट कराने से छूट दी जाएगी। यह कारोबारियों के लिए बड़ी राहत साबित होगी।

नई व्यवस्था में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी निवेश को कितने समय तक रखा गया, यह कैसे तय होगा। खासकर कन्वर्ट होने वाली सिक्योरिटीज (जैसे बॉन्ड से शेयर) के मामले में अब पहले की होल्डिंग अवधि को भी जोड़ा जाएगा। इससे यह तय करना आसान होगा कि लाभ शॉर्ट टर्म है या लॉन्ग टर्म।

एक्सचेंजों को सेबी से अनुमोदन प्राप्त करना होगा और पैन और विशिष्ट आईडी जैसे ग्राहक-स्तरीय डेटा सहित सभी लेन-देन का विस्तृत रिकॉर्ड रखना होगा। उन्हें सात वर्षों तक ऑडिट ट्रेल रखना होगा और ट्रेडिंग गतिविधियों पर कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए कर विभाग को मासिक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

(समाचार एजेंसी IANS के इनपुट के साथ)

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विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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