नेपाल के केंद्रीय बैंक नेपाल राष्ट्र बैंक (एनआरबी) ने गुरुवार से 100 रुपये मूल्य के नए बैंक नोट प्रचलन में ला दिए हैं, जिन पर एक अद्यतन (अपडेटेड) मानचित्र दर्शाया गया है। इस मानचित्र में उन विवादित भारतीय क्षेत्रों- कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को भी नेपाल के हिस्से के रूप में दिखाया गया है, जिन पर भारत अपना दावा करता है।
गौरतलब बात है कि करीब पांच साल पहले नेपाल ने अपना राजनीतिक मानचित्र संशोधित कर इन क्षेत्रों को शामिल किया था और अब पहली बार बैंक नोटों पर वही अपडेटेड मानचित्र को शामिल किया है।
नेपाल राष्ट्र बैंक (एनआरबी) के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल ने बताया कि मानचित्र को सरकार के निर्णय के अनुसार अद्यतन किया गया है और चीन की कंपनी चाइना बैंकनोट प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन से 300 मिलियन नए नोटों की आपूर्ति के बाद इन्हें चलन में लाया गया है। यह वही कंपनी है जिसे अक्टूबर 2023 में नोटों की प्रिंटिंग का ठेका दिया गया था।
नए नोट की डिजाइन कैसी है?
नए 100 रुपये के नोट में सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई उन्नत फीचर्स जोड़े गए हैं। नोट के बाईं ओर दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट की तस्वीर है, जबकि दाईं तरफ नेपाल के राष्ट्रीय फूल रोडोडेंड्रोन का वॉटरमार्क दिया गया है। मध्य भाग में नेपाल का अद्यतन नक्शा और अशोक स्तंभ प्रदर्शित है। मुख्य डिज़ाइन में एक गैंडा और उसके बच्चे की तस्वीर शामिल की गई है। वहीं बाईं ओर, सिल्वर मेटैलिक इंक में माया देवी की आकृति को ओवल आकार के अंदर दर्शाया गया है।
दृष्टिबाधित लोगों की सुविधा के लिए अशोक स्तंभ के पास एक टैक्टाइल ब्लैक डॉट लगाया गया है, जिससे नोट को स्पर्श से पहचानना संभव हो सके। नोट में उस समय के गवर्नर महा प्रसाद अधिकारी के हस्ताक्षर मौजूद हैं और नीचे “2081” की सीरीज नेपाली अंकों में अंकित है। इन नोटों की छपाई पर कुल लगभग 8.99 मिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च हुए हैं, जो नेपाली मुद्रा में 1.2 अरब रुपये से अधिक बैठता है। एक-एक नोट की अनुमानित छपाई लागत करीब 4 रुपये और 4 पैसा बताई गई है।

2020 गहराया था क्षेत्रों को लेकर विवाद
यह सीमा विवाद नेपाल की उत्तर-पश्चिमी सीमा तथा भारत के उत्तराखंड राज्य के बीच स्थित इन क्षेत्रों को लेकर है। वर्ष 2020 में, भारत द्वारा इन क्षेत्रों को शामिल करते हुए नया मानचित्र जारी करने के बाद नेपाल ने भी एक संवैधानिक संशोधन के माध्यम से लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को अपनी भूमि घोषित करते हुए एक नया मानचित्र जारी किया था। इस कदम से भारत-नेपाल संबंध तनावपूर्ण हो गए थे। भारत ने नेपाल के इस कदम को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा था कि यह एकतरफा कार्रवाई ऐतिहासिक तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित नहीं है और यह द्विपक्षीय समझ के विपरीत है।
भारत ने ऐसी क्षेत्रीय दावों की कृत्रिम वृद्धि को अस्वीकार किया था। हाल ही में, अगस्त 2024 में, भारत ने लिपुलेख दर्रे के माध्यम से भारत-चीन सीमा व्यापार को फिर से शुरू करने पर नेपाल की आपत्ति को भी खारिज कर दिया था। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि इन दावों का कोई औचित्य नहीं है और किसी भी “एकतरफा कृत्रिम क्षेत्रीय दावों की वृद्धि अस्थिर है।” कई दौर की बातचीत के बावजूद यह सीमा विवाद अभी तक सुलझ नहीं सका है और द्विपक्षीय संबंधों में लगातार एक संवेदनशील मुद्दे के रूप में बना हुआ है।

