Friday, March 20, 2026
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12 साल तक कांस्टेबल नहीं गया नौकरी, मिलती रही सैलरी; बिना प्रशिक्षण के जुटाए 28 लाख

भोपालः मध्य प्रदेश से एक आश्चर्यजनक मामला सामने आया है जहां पर एक कांस्टेबल पिछले 12 साल से नौकरी पर नहीं जा रहा था। हालांकि उसकी सैलरी बराबर आती रही। इस तरह से 12 सालों में बिना काम किए हुए कांस्टेबल को 28 लाख रुपये मिले। 

इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, कांस्टेबल की भर्ती साल 2011 में मध्य प्रदेश पुलिस में हुई थी और उसे भोपाल पुलिस लाइन्स में नियुक्ति मिली थी। ज्वाइन करने के कुछ समय बाद उसे बुनियादी पुलिस प्रशिक्षण के लिए सागर पुलिस ट्रेनिंग सेंटर भेजा गया। लेकिन वह वहां जाने के बजाय अपने घर विदिशा लौट गया। इसकी जानकारी पुलिस आयुक्त (ACP) अंकिता खाटेरकर ने दी। 

12 साल तक विभाग ने नहीं दिया ध्यान

एसीपी के मुताबिक, उसने बिना किसी वरिष्ठ अधिकारी को सूचित किए या छुट्टी की अनुमति लिए अपना सर्विस रिकॉर्ड पुलिस स्पीड पोस्ट के जरिए भोपाल पुलिस लाइन्स को वापस भेज दिया। एसीपी ने आगे बताया कि ये दस्तावेज उसकी शारीरिक उपस्थिति या फिर प्रशिक्षण स्थिति के बगैर सत्यापन के प्राप्त किए गए थे। 

प्रशिक्षण केंद्र में न किसी ने कांस्टेबल की अनुपस्थिति पर ध्यान दिया और न ही भोपाल पुलिस लाइन्स में किसी ने इस पर सवाल उठाया। धीरे-धीरे महीने बीतते गए और साल हो गए लेकिन वह कभी ड्यूटी पर नहीं आया। हालांकि, इस बीच उसका नाम दर्ज रहा और वेतन उसके खाते में मिलता रहा। इस तरह से इतने सालों तक उसे वेतन मिलता रहा और बिना प्रशिक्षण के 28 लाख रुपये जुटाए। 

इस मामले को पोल तब खुली जब साल 2023 में विभाग ने वेतन ग्रेड मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू की। इस दौरान अधिकारियों को कांस्टेबल के नाम का कोई व्यक्ति नहीं मिला। अधिकारियों ने पिछले रिकॉर्ड की जांच की तब भी उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। 

एसीपी खाटेरकर के मुताबिक, जब कांस्टेबल को पूछताछ के बुलाया गया तो उसने कहा कि वह मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से पीड़ित था। इस दावे के समर्थन के लिए उसने दस्तावेज भी प्रस्तुत किए और कहा कि इस कारण से इतने दिनों तक ड्यूटी पर आने में असफल रहा। 

एसीपी खाटेरकर ने क्या बताया?

मामले की पूरी पोल खुलने पर इसे एसीपी खाटेरकर को सौंपा गया। इंडिया टुडे से बातचीत में उन्होंने बताया ” कांस्टेबल ने 2011 में पुलिस बल ज्वाइन किया था। हालांकि, उसे अन्य लोगों के साथ ही प्रशिक्षण पर जाना था लेकिन उसने व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया और उसे अलग से भेजा गया। बाकी लोग अपना प्रशिक्षण पूरा कर लौट आए लेकिन कांस्टेबल ने कभी रिपोर्ट नहीं किया। चूंकि वह अकेला गया था इसलिए उसका कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया।”

उन्होंने आगे कहा कि बिना प्रशिक्षण पूरा किए और ड्यूटी में शामिल न होने के बावजूद उसका नाम पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज रहा। उसके रोल पर बने रहने के चलते वेतन नियमित तौर पर मिलता रहा। 

अपने बचाव में कांस्टेबल ने कहा कि उस समय अपडेट किए गए पुलिस नियमों के बारे में उसे जानकारी नहीं थी और संवाद की कमी तथा स्वास्थ्य समस्याओं के चलते इन नियमों का पालन न कर पाने का दावा किया। 

अब तक कांस्टेबल ने विभाग को 1.5 लाख रुपये लौटा दिए हैं और बची हुई राशि को भविष्य के वेतन से काटने पर सहमित दी है। एसीपी ने कहा कि अभी वह भोपाल पुलिस लाइन में तैनात है और निगरानी में है। 

अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले की जांच अभी भी जारी है और इस संबंध में और गवाहियां दर्ज की जाएंगी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देशों पर मामलों को संभालने या निगरानी करने में लापरवाही बरतने वाले किसी भी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अमरेन्द्र यादव
अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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