कोलकाताः पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार, 30 दिसंबर को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर यह चेतावनी दी कि यदि यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक भी वैध मतदाता का नाम हटाया गया तो वह दिल्ली स्थित चुनाव आयोग का घेराव करेंगी। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने और बांग्लादेशी घुसपैठियों को शरण देने का आरोप लगाया।
बांकुरा जिले में एक रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य में SIR के नाम पर लोगों को ‘परेशान’ किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि “एसआईआर के कारण कम से कम 60 लोग मारे जा चुके हैं। बुजुर्ग लोगों को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया जा रहा है।”
ममता ने क्या निशाना साधा?
रैली को संबोधन के दौरान उन्होंने जोर देकर कहा “अगर एक भी वैध मतदाता का नाम हटाया गया तो टीएमसी दिल्ली में चुनाव आयोग के कार्यालय का घेराव करेगी।”
ममता बनर्जी ने एसआईआर को एआई की मदद से चलाया जा रहा एक बड़ा ‘घोटाला’ बताया और कहा कि राज्य की जनता इस तरह के उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं करेगी।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में लोग भाजपा को सत्ता में नहीं आने देंगे। इस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जिन राज्यों में भाजपा की सरकार है, वहां बंगाल के प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाया जा रहा है।
बनर्जी ने कहा कि भाजपा चुनाव नजदीक आने पर ‘सोनार बांग्ला’ बनाने का काम तो करती है लेकिन वास्तविकता में जिन राज्यों में भाजपा की सत्ता है वहां बंगाली बोलने वालों की पिटाई कर दी जाती है।
अमित शाह ने ममता सरकार पर बोला हमला
वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य में सत्तारूढ़ ममता बनर्जी की सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता के कार्यकाल में भ्रष्टाचार, भय और घुसपैठ का बोलबाला रहा है, जिससे राज्य की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य सरकार पर चुनावी लाभ के लिए बांग्लादेशी घुसपैठियों को भी शरण देने का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा सत्ता में आने पर घुसपैठियों को पहचान कर उन्हें बाहर निकालेगी।
शाह ने कहा कि अप्रैल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में यह स्पष्ट है कि बंगाल की जनता भय, भ्रष्टाचार, कुशासन और घुसपैठ के बजाय विकास, विरासत और गरीबों के कल्याण पर केंद्रित एक मजबूत सरकार बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित है।
गौरतलब है कि राज्य में 16 दिसंबर को जारी की गई सूची में 58 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। राज्य में कुल 7.66 करोड़ मतदाताओं की संख्या में चुनाव आयोग ने 1.66 करोड़ मतदाताओं की ‘प्रामाणिकता’ पर भी संदेह जताया है जिन्हें अपने दस्तावेजों के पुनर्सत्यापन के लिए सुनवाई हेतु बुलाया गया है।
पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव आयोग को लिखे पत्र में डब्ल्यूबीसीएस (कार्यकारी) अधिकारी संघ ने मसौदा मतदाता सूची से मतदाताओं के “स्वतः-प्रेरित विलोपन” पर आपत्ति जताई है, जो चुनावी पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) की वैधानिक भूमिका को दरकिनार करता है।

