मुंबई महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण द्वारा लातूर शहर से पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख की यादें ‘मिट जाने’ संबंधी बयान पर विवाद खड़ा हो गया है। दिवंगत पिता को लेकर दिए गए बयान पर अभिनेता रितेश देशमुख ने कड़ी और भावुक प्रतिक्रिया दी है। रितेश ने कहा कि जो जनता के लिए जिया, उसका नाम लोगों के दिलों में अंकित होता है और उसे मिटाया नहीं जा सकता।
रविंद्र चव्हाण सोमवार को एक चुनावी सभा को संबोधित करने लातूर पहुंचे थे। भाजपा कार्यकर्ताओं के उत्साह को देखते हुए चव्हाण ने कहा, “सच्चे अर्थों में आप सबका जोश देखकर यह शत-प्रतिशत सच लग रहा है कि इस शहर से विलासराव देशमुख की यादें मिटा दी जाएंगी और इसमें कोई संदेह नहीं है।” उनके इस बयान को विलासराव देशमुख की विरासत को खत्म करने की कोशिश के तौर पर देखा गया। चव्हाण के इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में विवाद खड़ा हो गया।
चव्हाण की टिप्पणी के बाद रितेश देशमुख ने एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने हाथ जोड़कर कहा, “जो लोग जनता के लिए जीते हैं, उनके नाम लोगों के मन में अंकित होते हैं। लिखा हुआ मिटाया जा सकता है, लेकिन जो अंकित है, उसे मिटाया नहीं जा सकता।”
इस बयान को लेकर कांग्रेस ने भी भाजपा पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने आरोप लगाया कि भाजपा एक ऐसे नेता के योगदान को कमतर आंकने की कोशिश कर रही है, जिसने अपना पूरा जीवन राज्य के विकास के लिए समर्पित कर दिया। कांग्रेस का कहना है कि इस तरह की टिप्पणियां सत्ता के घमंड और विलासराव देशमुख की विरासत को न समझ पाने का प्रमाण हैं।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि लातूर से विलासराव देशमुख की यादों को मिटाने वाला आज तक कोई पैदा नहीं हुआ है। पार्टी के मुताबिक, पहले भी कई लोग ऐसे इरादों के साथ आए, लेकिन लातूर की आत्मसम्मानी जनता ने उन्हें उनकी जगह दिखा दी।
पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे और कांग्रेस नेता अमित देशमुख ने भी रविंद्र चव्हाण के बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और पीड़ादायक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे शब्दों की उम्मीद न तो उनसे थी और न ही भाजपा से। अमित देशमुख ने कहा कि इन बयानों से लातूर के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है।
अमित ने कहा कि विलासराव देशमुख ने लातूर के हर व्यक्ति के जीवन को छुआ था और उनकी यादें लोगों के दिलों में गहराई से बसी हैं। उन्होंने भी रितेश देशमुख की तरह दोहराया कि बाहरी लोग आकर ऐसी बातें कहें, इससे इन यादों को मिटाया नहीं जा सकता।
विलासराव देशमुख की यादें मिट जाने संबंधी बयान पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता नवाब मलिक ने कड़ी आपत्ति जताई है। मलिक ने कहा कि ऐसे बयान न केवल अनुचित हैं, बल्कि एक दिवंगत नेता के प्रति नैतिक जिम्मेदारी की अनदेखी भी करते हैं।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए नवाब मलिक ने कहा कि विलासराव देशमुख ने लातूर से कई बार चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे, साथ ही केंद्र सरकार में भी मंत्री के रूप में सेवाएं दीं। उन्होंने कहा, “जब कोई व्यक्ति इस दुनिया में नहीं रहा, तब उसके बारे में इस तरह की बातें करने से बचना चाहिए। एक मर्यादा और नैतिक जिम्मेदारी होती है, जिसे निभाया जाना चाहिए।”
एनसीपी नेता ने साफ शब्दों में कहा कि विलासराव देशमुख के नाम या उनकी स्मृतियों को मिटाने की बात करना न तो उचित है और न ही स्वीकार्य। उनके मुताबिक, ऐसे बयान सार्वजनिक जीवन की गरिमा के खिलाफ हैं और नेताओं को शब्दों के चयन में संयम बरतना चाहिए।
विलासराव देशमुख महाराष्ट्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं में रहे और उन्होंने दो बार राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया था। उनका पहला कार्यकाल अक्टूबर 1999 से जनवरी 2003 और दूसरा नवंबर 2004 से दिसंबर 2008 तक रहा।
विवाद बढ़ने पर चव्हाण ने मांगी माफी
रितेश और अमित देशमुख की प्रतिक्रिया के बाद रविंद्र चव्हाण ने अपने बयान पर सफाई दी और माफी भी मांगी। उन्होंने कहा कि उनका बयान राजनीतिक मंशा से नहीं था। चव्हाण के मुताबिक, स्थानीय निकाय चुनावों में नागरिक सुविधाओं और विकास के मुद्दे अहम होने चाहिए।
उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने बयान में विलासराव देशमुख की आलोचना नहीं की थी, बल्कि कांग्रेस द्वारा उनके नाम पर वोट मांगने की बात कही थी। चव्हाण ने यह भी कहा कि अगर उनके बयान से उनके मित्र और विलासराव देशमुख के बेटे अमित देशमुख की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए क्षमा चाहते हैं। भाजपा नेता ने दोहराया कि लातूर की जनता को विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए और यही सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है।

