इंदौरः मध्य प्रदेश के इंदौर में बीते कुछ दिनों में कथित तौर पर शहर के भगीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से कम से कम सात लोगों की मौत हो गई है और 100 से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इंदौर के मेयर ने बुधवार, 31 दिसंबर को यह जानकारी दी।
मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा, “तीन मौतों की आधिकारिक तौर पर पुष्टि हो चुकी है लेकिन हमें चार अन्य लोगों के बारे में भी जानकारी मिली है।” उन्होंने इस घटना की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया कि वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मध्य प्रदेश के दो अधिकारी निलंबित
इस बीच मोहन यादव सरकार ने नगर निगम के दो जोनल अधिकारियों और एक सहायक इंजीनियर को निलंबित कर दिया है। वहीं, एक प्रभारी उप-अभियंता की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
मुख्यमंत्री ने मृतक लोगों के प्रति दुख व्यक्त किया और मृतकों के परिवार को 2 लाख रुपये वित्तीय सहायता का ऐलान किया। राज्य सरकार बीमार लोगों के इलाज का खर्ज भी वहन करेगी। इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, जिला प्रशासन ने भगीरथपुरा के निवासियों के लिए अरबिंदो अस्पताल में 100 अतिरिक्त बेड मुहैया कराए हैं।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने मारे गए लोगों में नंदलाल पाल (70), उर्मिला यादव (60) और तारा कोरी (65) की पहचान की है। इन लोगों की मौत कथित तौर पर दस्त के कारण हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने 2,703 घरों का सर्वेक्षण किया, लगभग 12,000 व्यक्तियों की जांच की और हल्के लक्षणों वाले 1,146 रोगियों को प्राथमिक उपचार प्रदान किया। अधिक गंभीर स्थिति वाले कुल 111 रोगियों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से 18 को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव प्रसाद हसनी ने कहा कि “मरीजों ने बताया कि दूषित पानी पीने के बाद उन्हें उल्टी, दस्त और निर्जलीकरण की शिकायत हुई।” उन्होंने बताया कि भागीरथपुरा में कई चिकित्सा दल और एम्बुलेंस तैनात किए गए हैं। अधिकारियों ने प्रयोगशाला परीक्षण के लिए पानी के नमूने एकत्र किए हैं जबकि प्रारंभिक आकलन से पता चलता है कि पीने के पानी की आपूर्ति में नाले का पानी मिला हुआ हो सकता है।
नगर आयुक्त दिलीप कुमार यादव ने भगीरथपुरा में मुख्य जल आपूर्ति पाइपलाइन में रिसाव का पता चलने की सूचना दी जहां पाइप के ऊपर शौचालय बनाया गया था। इस मामले की जांच की जा रही है क्योंकि यह दूषित होने का संभावित कारण हो सकता है। महापौर भार्गव ने कहा कि जल अवसंरचना के रखरखाव में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पीड़ित परिवारों ने क्या बताया?
स्थानीय पार्षद कमल बघेला ने निवासियों की शिकायतों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 25 दिसंबर को आपूर्ति किए गए पानी में असामान्य गंध थी। उन्होंने कहा कि “यह पानी पीने से लोग बीमार हो गए। पानी कैसे दूषित हुआ, यह केवल प्रयोगशाला रिपोर्ट से पता चलेगा।” निवासियों ने आरोप लगाया कि दुर्गंधयुक्त और अजीब स्वाद वाले पानी के बारे में बार-बार की गई शिकायतों पर नगर निगम अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया।
पीड़ितों के परिवार के सदस्यों ने लक्षणों के अचानक शुरू होने का वर्णन किया। नंदलाल पाल के पुत्र सिद्धार्थ ने बताया, “मेरे पिता का मंगलवार (30 दिसंबर) सुबह निधन हो गया।” उन्होंने बताया कि दूषित पानी पीने के बाद उनके पिता को 28 दिसंबर को उल्टी और दस्त के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाके के अन्य लोगों ने भी इसी तरह की बातें बताईं।
जितेंद्र प्रजापत की बहन सीमा प्रजापत की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि उनकी बहन को अचानक उल्टी और दस्त की शिकायत हुई और यह परिस्थिति संभालने में विफल रहे। अस्पताल ले जाते हुए उनकी मौत हो गई।
कांग्रेस ने साधा निशाना
विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इस घटना पर प्रशासन को घेरा। पार्टी ने मांग की है कि महापौर भार्गव और नगर आयुक्त दिलीप कुमार यादव के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाए।
इस घटना को “शर्मनाक” बताते हुए कांग्रेस ने दावा किया कि मध्य प्रदेश सरकार स्वच्छ पेयजल की मांग कर रहे लोगों की बार-बार की शिकायतों पर ध्यान देने में विफल रही है।
राज्य कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रभावित लोगों का हालचाल जानने के लिए एक निजी अस्पताल का दौरा किया और घटना पर सरकारी प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए।
पटवारी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा “अगर नाले का पानी पीने के पानी की पाइपलाइन में मिल जाता है तो लोगों को उल्टी, दस्त और पीलिया हो सकता है लेकिन उनकी मौत नहीं होती। ऐसा लगता है कि पीने के पानी की पाइपलाइन में किसी तरह का जहरीला पदार्थ मिल गया है और इसकी जांच होनी चाहिए।” उन्होंने मौतों के मद्देनजर नगर निगम के अधिकारियों से जवाबदेही की मांग की।

