नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आम लोगों की रसोई तक पहुंचने लगा है। देश में तेल विपणन कंपनियों ने घरेलू और वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है, वहीं सिलेंडर बुकिंग के नियमों में भी बदलाव किया गया है।
तेल कंपनियों ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में 60 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर में 115 रुपये की बढ़ोतरी की है। इसकी वजह से राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये हो गई है। बता दें कि यह एक साल से भी कम समय में दूसरी बार एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी है।
अन्य महानगरों में भी कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मुंबई में घरेलू सिलेंडर 912.50 रुपये, कोलकाता में 930 रुपये और चेन्नई में 928.50 रुपये का हो गया है। हालांकि, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। आखिरी बार 15 मार्च 2024 को केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी।
सरकार ने शुक्रवार को तेल विपणन कंपनियों को घरेलू मांग को पूरा करने के लिए एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। पश्चिम एशिया में इजराइल–ईरान युद्ध के कारण आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के बीच यह कदम उठाया गया है।
घरेलू आपूर्ति सुचारु बनाए रखने के लिए सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत आपात आदेश भी जारी किया है, जिसके तहत देश की सभी रिफाइनिंग कंपनियों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम स्तर तक बढ़ाने के लिए कहा गया है। वर्तमान में देश में लगभग 33.08 करोड़ सक्रिय एलपीजी उपभोक्ता हैं।
हालांकि, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को राहत जारी रहेगी। इस योजना के तहत 2016 से मुफ्त गैस कनेक्शन पाने वाले 10 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सब्सिडी साल में अधिकतम 12 रिफिल तक मिलती रहेगी।
सिलेंडर बुकिंग के नियम भी बदले
कीमतों में बढ़ोतरी के साथ गैस कंपनियों ने सिलेंडर बुकिंग के नियमों में भी बदलाव किया है। पहले जहां एक सिलेंडर की डिलीवरी के 15 दिन बाद अगली बुकिंग की जा सकती थी, वहीं अब यह अवधि बढ़ाकर 21 से 25 दिन कर दी गई है।
नई व्यवस्था के तहत उपभोक्ताओं को अगला सिलेंडर बुक कराने के लिए अधिक इंतजार करना होगा। गैस कंपनियों का कहना है कि यह कदम वैश्विक आपूर्ति दबाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों को देखते हुए उठाया गया है। फिलहाल इसे अस्थायी व्यवस्था बताया जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होने पर इसकी समीक्षा की जा सकती है।
नए नियमों का असर खासकर बड़े परिवारों पर पड़ सकता है, जहां सिलेंडर जल्दी खत्म हो जाता है। कई शहरों में पहले से ही सिलेंडर की डिलीवरी में देरी की शिकायतें मिल रही हैं। ऐसे में बुकिंग अंतराल बढ़ने से घरेलू बजट और रसोई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
कानपुर में गैस एजेंसियों के अनुसार, इस बदलाव का असर करीब 13 लाख घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। शनिवार को जैसे ही कीमतों में बढ़ोतरी की खबर फैली, कई उपभोक्ता सिलेंडर लेने के लिए गैस एजेंसियों पर पहुंच गए।
अयोध्या की एक महिला ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि सरकार गरीबों की मदद की बात करती है, लेकिन लगातार बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उनका कहना था कि हर चीज महंगी होती जा रही है, ऐसे में परिवार का खर्च चलाना दिन-ब-दिन कठिन होता जा रहा है।
अयोध्या के ही एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि अगर कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी होती है तो स्वाभाविक रूप से लोगों पर दबाव बढ़ेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि गैस तो खरीदनी ही पड़ेगी, क्योंकि इसके बिना घर चलाना संभव नहीं है। उनके मुताबिक रोजमर्रा के छोटे-छोटे कामों में भी बढ़ती लागत का असर साफ महसूस हो रहा है।
एक और व्यक्ति ने बढ़ती ईंधन कीमतों पर चिंता जताते हुए कहा कि पेट्रोल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल अब जरूरत बन चुका है और इसके बिना काम चलाना मुश्किल है।
वहीं महाराष्ट्र के नासिक में भी घरेलू और व्यावसायिक गैस के दाम बढ़ने से लोग परेशान हैं। नासिक की रहने वाली रोशनी कुलकर्णी ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए सरकार को गैस के दामों में कुछ राहत देनी चाहिए। उनके मुताबिक कीमत बढ़ने से घर का पूरा बजट बिगड़ जाता है।
नासिक की ही सविता दीक्षित ने भी कहा कि घरेलू गैस के दाम काफी बढ़ गए हैं और इस पर सरकार को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। उनका कहना था कि गैस महंगी होने से परिवार की पूरी आर्थिक व्यवस्था प्रभावित हो जाती है।
CNG और PNG आपूर्ति पर भी पड़ सकता है असर
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अगर एलएनजी की उपलब्धता घटती है, तो इसका असर सीएनजी और पीएनजी गैस आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। कानपुर में लगभग 2 लाख वाहन सीएनजी पर चलते हैं, जबकि करीब 1 लाख घरों में पीएनजी गैस का उपयोग होता है।
उद्योग सूत्रों के अनुसार, कई औद्योगिक क्षेत्रों में गैस की आपूर्ति पहले ही करीब 40 प्रतिशत तक कम कर दी गई है। अगर वैश्विक हालात और बिगड़ते हैं, तो उद्योगों को मिलने वाली गैस में और कटौती संभव है, जिससे उत्पादन और रोजगार पर भी असर पड़ सकता है।
एलपीजी की बढ़ी कीमतों पर सियासत तेज
घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर शनिवार सियासत भी तेज हो गई। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार को घेरते हुए इसे आम जनता पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ बताया है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए एक्स पर लिखा कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर में 60 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर में 115 रुपये की बढ़ोतरी कर सरकार ने जनता पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। खड़गे ने आरोप लगाया कि पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें कम होने का लाभ जनता को नहीं दिया गया और अब महंगाई बढ़ाकर लोगों की मुश्किलें बढ़ाई जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार पर्याप्त तेल, गैस और उर्वरक उपलब्ध कराने में भी असफल साबित हो रही है।
कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ अकाउंट से भी सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने कहा कि सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम सीधे 60 रुपये बढ़ाकर जनता को झटका दिया है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर के लिए 115 रुपये अधिक चुकाने होंगे। पार्टी के अनुसार पिछले तीन महीनों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में करीब 307 रुपये तक की बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ गया है।
आम आदमी पार्टी ने भी गैस की बढ़ी कीमतों पर सरकार को घेरा। पार्टी ने ‘एक्स’ पर टिप्पणी करते हुए कहा कि होली से पहले जनता को महंगाई का “गिफ्ट” मिला है। पार्टी का आरोप है कि पहले से महंगाई से जूझ रही जनता पर सरकार ने गैस सिलेंडर महंगा करके एक और बोझ डाल दिया है।
राजद सांसद मनोज झा ने कसा तंज
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा ने भी गैस की कीमतों में बढ़ोतरी पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि वे उन नेताओं को ढूंढ रहे हैं जो पहले डमी गैस सिलेंडर लेकर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करते थे और जंतर-मंतर पर बैठते थे। उन्होंने सवाल उठाया कि अब वे सभी लोग कहां हैं।
मनोज झा ने कहा कि जब आम लोगों की आय में बढ़ोतरी नहीं हुई है, तब एक बार में 60 रुपये की बढ़ोतरी करना जनता पर अतिरिक्त दबाव डालने जैसा है। उनके मुताबिक यह फैसला इस बात की ओर इशारा करता है कि नीतियां किसके हित में बनाई जा रही हैं और राहत आखिर किसे दी जा रही है।

