नई दिल्ली: खाड़ी देशों में छिड़े युद्ध और भारत में जारी एलपीजी संकट के बीच केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को गैस का आवंटन संकट (प्री-क्राइसिस लेवल) से पहले के स्तर के 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बताया है कि 23 मार्च से अतिरिक्त 20 प्रतिशत आपूर्ति लागू की जाएगी।
दूसरे शब्दों में कहें तो एलपीजी के आवंटन को संकट शुरू होने से पहले की डिमांड का आधा (50%) कर दिया गया है। सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में पेट्रोलियम मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने कहा कि इस बढ़े हुए आवंटन का उद्देश्य प्रमुख क्षेत्रों, विशेष रूप से खाद्य आपूर्ति और जन कल्याण से जुड़े क्षेत्रों को सहायता प्रदान करना है।
इसमें पहले से दिए गए 20 प्रतिशत और पीएनजी विस्तार से जुड़े सुधारों के आधार पर दिए गए 10 प्रतिशत के साथ अब अतिरिक्त 20 प्रतिशत आवंटन को जोड़ा गया है। मंत्रालय के अनुसार, यह अतिरिक्त 20 प्रतिशत एलपीजी उन क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर दिया जाएगा जहां इसकी ज्यादा जरूरत है। इनमें रेस्टोरेंट, ढाबे, होटल, औद्योगिक कैंटीन, फूड प्रोसेसिंग और डेयरी यूनिट, सरकारी सब्सिडी वाले कैंटीन, कम्युनिटी किचन और प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलो वाले सिलेंडर शामिल हैं।
मंत्रालय ने बताया कि पिछले एक हफ्ते में करीब 13,479 मीट्रिक टन एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति की गई है। शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों को प्राथमिकता दी गई है और कुल कमर्शियल एलपीजी का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं क्षेत्रों को दिया जा रहा है।
एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी पर एक्शन
नए कदमों के साथ-साथ सरकार ने शनिवार को ये भी बताया कि एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं। सरकार के अनुसार देश भर में लगातार छापेमारी की जा रही है। इसी के तहत उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में अब तक 3,500 से ज्यादा छापे मारे जा चुके हैं। इन कार्रवाई के दौरान करीब 1,400 सिलेंडर जब्त किए गए हैं।
इसके अलावा तेल कंपनियों के अधिकारियों ने 2,000 से ज्यादा पेट्रोल पंप और एलपीजी एजेंसियों पर अचानक जांच भी की है, ताकि सप्लाई सुचारू बनी रहे और किसी तरह की गड़बड़ी न हो।
सरकार ने बताया है कि कि युद्ध जैसे हालात के बावजूद घरेलू एलपीजी और पीएनजी को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है। अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को प्राथमिकता दी गई है।
इसके अलावा कई अन्य कदम उठाए गए हैं। इसमें रिफाइनरी उत्पादन बढ़ाना, शहरी क्षेत्रों में सिलेंडर बुकिंग का अंतर 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन करना और ग्रामीण क्षेत्रों में इसे 45 दिन तक करना जैसे कदम शामिल हैं।
एलपीजी संकट: दूसरे विकल्पों की भी तैयारी
सरकार अन्य ईंधन विकल्प को लेकर भी काम कर रही है। केरोसिन और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। देश में विभिन्न राज्यों को अतिरिक्त 48,000 किलोलीटर केरोसिन दिया गया है।
कोयला मंत्रालय ने भी कोल इंडिया और सिंगरेनी कोलियरीज को निर्देश दिए हैं कि वे राज्यों को ज्यादा कोयला उपलब्ध कराएं ताकि छोटे और मध्यम उपभोक्ताओं की जरूरतें पूरी हो सकें।
सरकार ने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात के कारण एलपीजी सप्लाई चिंता का विषय बनी हुई है, लेकिन घरेलू उत्पादन बढ़ाया गया है और पैनिक बुकिंग में कमी आई है। अब ज्यादातर डिलीवरी डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) के जरिए हो रही है।
तेल कंपनियों के अनुसार, किसी भी रिटेल आउटलेट पर ईंधन की कमी नहीं है और पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे घबराहट में खरीदारी न करें और अफवाहों पर ध्यान न दें।
सरकार ने कहा है कि देश में एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे डिजिटल तरीके से बुकिंग करें, एजेंसियों पर जाने से बचें और होम डिलीवरी का ही इस्तेमाल करें।
(समाचार एजेंसी IANS के इनपुट के साथ)

