पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की आग अब भारत की रसोई और रेस्तरां उद्योग तक पहुँच गई है। देश के कई बड़े शहरों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी से होटल और रेस्तरां कारोबार प्रभावित होने लगा है। बेंगलुरु, चेन्नई, मुंबई, गुरुग्राम और कोलकाता सहित कई शहरों के होटल संगठनों ने गैस आपूर्ति में भारी कमी की शिकायत की है। उनका कहना है कि अगर जल्द सप्लाई बहाल नहीं हुई तो कई रेस्तरां को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है।
यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है जब ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हुई है। हाल ही में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये और घरेलू सिलेंडर में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।
बेंगलुरु और चेन्नई में संकट ज्यादा
बेंगलुरु होटल एसोसिएशन और चेन्नई होटल्स एसोसिएशन ने सोमवार को कहा कि रेस्तरां को मिलने वाली कमर्शियल एलपीजी सप्लाई लगभग ठप हो गई है।
बेंगलुरु होटल एसोसिएशन के मानद अध्यक्ष पीसी राव ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि शहर के केवल करीब 10 प्रतिशत होटल और रेस्तरां को ही एलपीजी की सप्लाई मिल पाई है। उन्होंने कहा कि कई जगहों पर किचन चलाने के लिए गैस केवल मंगलवार दोपहर या शाम तक ही बची है।
एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि अगर सप्लाई बहाल नहीं हुई तो कई छोटे और मध्यम स्तर के होटल-रेस्तरां अस्थायी रूप से बंद करने पड़ सकते हैं।
उधर, चेन्नई होटल्स एसोसिएशन ने भी इसी तरह की चिंता जताते हुए कहा कि कई कमर्शियल एलपीजी वितरकों ने स्टॉक खत्म होने की बात कहकर सिलेंडर देना बंद कर दिया है। संगठन ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप की मांग की है।
होटल संगठनों का कहना है कि इसका असर आम लोगों, छात्रों और मेडिकल पेशेवरों पर भी पड़ेगा, जो रोजाना भोजन के लिए इन रेस्तरां पर निर्भर रहते हैं। साथ ही आईटी पार्कों और कॉलेज हॉस्टलों में होने वाली फूड सप्लाई तथा होटल में पहले से बुक किए गए बैंक्वेट कार्यक्रम भी प्रभावित हो सकते हैं।

अन्य शहरों में भी असर
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, कमर्शियल एलपीजी की कमी का असर केवल दक्षिण भारत तक सीमित नहीं है। मुंबई और गुरुग्राम में भी होटल कारोबारियों ने गैस की कमी की शिकायत की है।
गुरुग्राम के एक रेस्तरां मैनेजर रोहित अरोड़ा ने अखबार को बताया कि उनके सप्लायर ने कमर्शियल एलपीजी की डिलीवरी अस्थायी रूप से रोकने की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि उनके पास तीन दिन तक चलने वाला बैकअप है, लेकिन अगर स्थिति लंबी चली तो मेन्यू सीमित करना या घरेलू सिलेंडर का सहारा लेना पड़ सकता है।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई के दादर, अंधेरी और माटुंगा जैसे इलाकों में कई रेस्तरां ने गैस बचाने के लिए धीमी आंच पर बनने वाले व्यंजनों को मेन्यू से हटा दिया है और काम के घंटे भी घटा दिए हैं। शहर में एलपीजी रिफिल के लिए दो से आठ दिन तक की देरी की भी खबरें हैं।
पुणे नगर निगम ने भी स्थिति को देखते हुए शहर के गैस श्मशानों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है, ताकि उपलब्ध प्रोपेन और ब्यूटेन गैस को घरेलू एलपीजी आपूर्ति के लिए इस्तेमाल किया जा सके।
कोलकाता में भी होटल और बेकरी कारोबार से जुड़े लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई जल्द बहाल नहीं हुई तो उनके संचालन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
देशभर के रेस्तरां उद्योग के संगठन नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने भी सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन का कहना है कि रेस्तरां उद्योग का संचालन मुख्य रूप से कमर्शियल एलपीजी पर निर्भर करता है और सप्लाई में रुकावट से बड़ी संख्या में रेस्तरां बंद होने की नौबत आ सकती है।
सरकार ने क्या कदम उठाए?
सप्लाई में आ रही बाधा और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने मंगलवार को आवश्यक वस्तु अधिनियम (ईसीए) के तहत कड़े आदेश जारी किए हैं। सरकार ने घरेलू रसोई के लिए पाइपलाइन वाली प्राकृतिक गैस (पीएनजी), एलपीजी और परिवहन के लिए सीएनजी की निर्बाध आपूर्ति को ‘सर्वोच्च प्राथमिकता’ के आधार पर सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। केंद्र ने यह आकलन किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में एलएनजी शिपमेंट रुकने और आपूर्तिकर्ताओं द्वारा ‘फोर्स मेज्योर’ (अपरिहार्य परिस्थितियों) के एलान के बाद गैस को सबसे पहले प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में भेजना अनिवार्य हो गया है।
सरकार ने तेल रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को स्पष्ट आदेश दिया है कि वे एलपीजी का उत्पादन अधिकतम स्तर पर ले जाएं और प्रमुख हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम को एलपीजी पूल में भेजें। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भू-राजनीतिक संकट के दौरान घरों की ऊर्जा सुरक्षा सबसे ऊपर है। इसीलिए कमर्शियल सेक्टर की सप्लाई को सीमित कर उसे घरेलू उपभोक्ताओं की ओर मोड़ा गया है। साथ ही, अब घरेलू ग्राहकों के लिए दो सिलेंडर की बुकिंग के बीच 25 दिन का अनिवार्य अंतर तय कर दिया गया है ताकि जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग को रोका जा सके।
आदेश के अनुसार, गैस विपणन इकाइयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि चाय उद्योग, विनिर्माण और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को गैस की आपूर्ति उनके पिछले छह महीनों की औसत खपत के 80 प्रतिशत तक बनी रहे। वहीं, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) संस्थाओं को निर्देश दिया गया है कि वे अपने नेटवर्क से जुड़े औद्योगिक और वाणिज्यिक ग्राहकों को भी पिछली औसत खपत का 80 प्रतिशत हिस्सा उपलब्ध कराएं। उर्वरक संयंत्रों के लिए यह कोटा औसत खपत का 70 प्रतिशत तय किया गया है, बशर्ते वे इस गैस का उपयोग केवल उर्वरक उत्पादन के लिए ही करें।
होटल-रेस्तरां और अन्य उद्योगों को एलपीजी आपूर्ति से जुड़ी मांगों की समीक्षा के लिए तेल विपणन कंपनियों के तीन कार्यकारी निदेशकों की एक समिति भी गठित की गई है।
इस बीच केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद भारत के ऊर्जा आयात फिलहाल बाधित नहीं हुए हैं और सरकार नागरिकों को ऊर्जा की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है।

