LPG Booking : भारत सरकार ने बुधवार को उन तमाम मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें एलपीजी रिफिल बुकिंग की समय-सीमा में बड़े बदलाव की बात कही जा रही थी।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि गैस कनेक्शन के लिए मौजूदा रिफिल बुकिंग मानदंडों में कोई नया संशोधन नहीं किया गया है। मंत्रालय ने कहा कि ऐसी खबरें पूरी तरह से आधारहीन हैं और नागरिकों को घबराहट में आकर अनावश्यक बुकिंग से बचना चाहिए।
मंत्रालय ने उन भ्रामक खबरों का संज्ञान लिया जिनमें दावा किया जा रहा था कि उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों के लिए बुकिंग अंतराल 45 दिन, गैर-उज्ज्वला सिंगल सिलेंडर उपभोक्ताओं के लिए 25 दिन और डबल सिलेंडर उपभोक्ताओं के लिए 35 दिन कर दिया गया है।
LPG Booking नियमों में कोई बदलाव नहीं किए गए हैंः केंद्र
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे कोई बदलाव नहीं किए गए हैं। मौजूदा व्यवस्था के तहत शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन के अंतराल पर ही अगला रिफिल बुक किया जा सकता है। सरकार ने कहा है कि यही नियम चल रहा है और यही सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं पर पहले की तरह ही लागू रहेगा और इसमें किसी भी प्रकार का नया फेरबदल नहीं हुआ है।

गौरतलब है कि बुकिंग नियमों को लेकर फैली अफवाहों के बाद एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी की शिकायतें सामने आई थीं जिस पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है।
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पिछले हफ्ते केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में 3,500 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी की है। इस सघन अभियान के दौरान लगभग 1,400 अवैध सिलेंडर जब्त किए गए हैं। इसके अलावा, तेल विपणन कंपनियों के अधिकारियों ने देशभर में 2,000 से अधिक खुदरा दुकानों और वितरक केंद्रों का औचक निरीक्षण किया है ताकि आपूर्ति शृंखला में किसी भी तरह की बाधा या अवैध भंडारण को रोका जा सके।
सरकार ने कहा- एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद
सरकार ने जनता को आश्वस्त किया है कि ईरान युद्ध जैसे वैश्विक संकट के बावजूद देश में एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। सभी घरेलू रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं और कच्चे तेल का भंडार सुरक्षित स्तर पर है। घरेलू एलपीजी उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई है और विभिन्न देशों से कच्चे तेल व गैस लेकर आने वाले जहाज भारतीय बंदरगाहों पर पहुँच चुके हैं।
सरकार ने का कहना है कि घरेलू पीएनजी और एलपीजी की आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, साथ ही अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों के लिए भी विशेष प्रबंध किए गए हैं।
एलपीजी पर दबाव कम करने के लिए वैकल्पिक ईंधन पर जोर
एलपीजी की मांग पर दबाव कम करने के लिए सरकार ने मिट्टी के तेल (केरोसिन) और कोयले जैसे वैकल्पिक ईंधन की उपलब्धता भी सुनिश्चित की है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उनके नियमित कोटे के अलावा 48,000 किलोलीटर मिट्टी के तेल का अतिरिक्त आवंटन किया गया है। साथ ही, कोल इंडिया और अन्य कोयला कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे छोटे और मध्यम उपभोक्ताओं तक कोयले की पहुंच आसान बनाएं।
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सरकार ने राज्यों को यह सलाह भी दी है कि वे घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए नए पीएनजी कनेक्शन देने की प्रक्रिया को सरल और त्वरित बनाएं ताकि गैस सिलेंडरों पर निर्भरता को तर्कसंगत बनाया जा सके।
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बीपीसीएल ने भी ईंधन की किल्लत की अफवाहों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि भारत पेट्रोल और डीजल का शुद्ध निर्यातक है, इसलिए देश में इसकी कोई कमी नहीं है। वहीं, ईरान युद्ध के आर्थिक प्रभावों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने सात उच्च-स्तरीय ‘एम्पॉवर्ड ग्रुप्स’ का गठन किया है।
विशेषज्ञों के ये समूह तेल, गैस, उर्वरक और सप्लाई चेन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की चौबीसों घंटे निगरानी कर रहे हैं। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें और बुकिंग के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग करें, क्योंकि सिलेंडरों की होम डिलीवरी सुचारू रूप से सुनिश्चित की जा रही है।

